गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

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चिखली में कर्जमाफी की रकम जमा, फिर भी खाते बंद नहीं; किसानों को नहीं मिल रहा नया पीक कर्ज

चिखली में कर्जमाफी की रकम जमा, फिर भी खाते बंद नहीं; किसानों को नहीं मिल रहा नया पीक कर्ज तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कारोबार PT24 टीम

बुलढाणा के चिखली तालुका में कर्जमाफी का पैसा खातों में आने के बाद भी बैंकों ने पुराने कर्ज खाते बंद नहीं किए। शेतकरी संघटना ने दो दिन की मोहलत देकर बैंक में आंदोलन की चेतावनी दी है।

बुलढाणा जिले के चिखली तालुका में किसान इन दिनों नए पीक कर्ज के लिए भटक रहे हैं। सरकार की तरफ से कर्जमाफी का पैसा खातों में जमा हो चुका है, लेकिन बैंकों की देरी और अड़ियल रवैये की वजह से किसानों के पुराने कर्ज खाते अब तक बंद नहीं हुए हैं। नतीजा यह है कि जो किसान पात्र हैं, वे भी नया पीक कर्ज नहीं ले पा रहे।

इस मामले पर शेतकरी संघटना भड़क उठी है। संघटना ने साफ कहा है कि चिखली तालुका के शेलगाव जहागीर, चंदनपुर और भोरसा-भोरसी के किसानों का मसला अगले दो दिन में नहीं सुलझा, तो बैंक में तीव्र आंदोलन किया जाएगा। यह सख्त चेतावनी किसान नेता विनायक सरनाईक और शेतकरी संघटना की तरफ से दी गई है।

सरनाईक ने सरकार और बैंक प्रशासन के कामकाज पर तीखी नाराजगी जताई। उनका सवाल है कि हेयरकट के हिसाब से बची हुई रकम भरने की मुख्य जिम्मेदारी बैंकों की है, और सरकार व बैंकों के बीच करार भी हो चुका है, फिर भी बैंक टालमटोल क्यों कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि प्रशासन ने इस मनमानी पर तुरंत लगाम नहीं कसी, तो किसानों को हुए आर्थिक नुकसान और खर्च की भरपाई संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों से ही वसूली जाए।

इस मौके पर शेतकरी संघटना के जिलाध्यक्ष देविदास कणखर, सरपंच अरुण सरनाईक, उपसरपंच शिवशंकर ठेंग, श्रावण बडगे, गजानन टेंग, पंजाबराव आटोळे, समाधान पंडागळे, परमेश्वर साळवे, औचितराव चव्हाण, अनिल परीहार, राजेश आंभोरे, संजय पंडागळे और अजाबराव बडगे समेत इलाके के काफी किसान मौजूद थे।

अब देखिए कि किस बैंक में किन किसानों का मामला अटका है। शेलगाव जहागीर के किसानों का खाता सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की चिखली शाखा में है। वहीं चंदनपुर और भोरसा-भोरसी के किसानों का खाता इंडियन ओव्हरसीज बैंक की एकलारा शाखा में है। इन किसानों की कर्जमाफी की रकम सरकार ने पिछले अगस्त महीने में ही जमा कर दी थी।

नियमों के हिसाब से बैंकों को कर्ज खाते बंद करने के लिए जरूरी सूची वरिष्ठ अधिकारियों तक भेजनी थी। इसके साथ हेयरकट के मुताबिक ब्याज और फर्क की बची हुई रकम भी बैंकों को खुद जमा करनी थी। लेकिन डेढ़ से दो महीने बीत जाने के बाद भी बैंकों ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है।

इस तकनीकी देरी का खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। कागजों में उनके कर्ज खाते अब भी चालू दिख रहे हैं। खरीफ का सीजन हाथ से निकल चुका है और अब रब्बी सीजन के लिए भी नया पीक कर्ज नहीं मिल रहा, इसलिए किसान पूरी तरह परेशान और हताश हैं।

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