पीक कर्ज बाँटने की मियाद 30 अक्टूबर तक बढ़ाएं, मुनगंटीवार ने CM से की मांग
आ. सुधीर मुनगंटीवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर खरीफ पीक कर्ज वितरण की मियाद 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाने की मांग की।
कर्जमाफी का फायदा पा चुके किसान नए सीजन के लिए पीक कर्ज का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें राहत दिलाने के लिए आ. सुधीर मुनगंटीवार ने पहल की है। उन्होंने मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी निवास वर्षा पर उनसे मुलाकात की और निवेदन सौंपा। इसमें मांग की गई कि खरीफ पीक कर्ज बाँटने की मियाद 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई जाए।
मुनगंटीवार के मुताबिक पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर किसान कर्जमुक्ति योजना के तहत OTS के लिए पात्र कुछ किसानों की सूचियाँ अब तक संबंधित बैंकों को नहीं मिली हैं। कुछ कर्जखाते और बैंक रिकॉर्ड भी अपडेट नहीं हुए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने यह बात रखी कि सिर्फ प्रशासकीय प्रक्रिया में देरी की वजह से पात्र किसान पीक कर्ज से वंचित न रहें।
इस मांग पर ध्यान देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रधान सचिव, कृषि विभाग को तुरंत जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
मुनगंटीवार ने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों की मुश्किलों को देखते हुए पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर किसान कर्जमुक्ति योजना के जरिए कर्जमाफी का फैसला लिया, जो किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हुआ है। कर्ज के बोझ तले दबे किसानों को इससे दोबारा खड़े होने का हौसला मिला है। इस फैसले के लिए उन्होंने राज्य सरकार को बधाई दी और आभार जताया।
लेकिन अब कर्जमाफी पा चुके किसानों के सामने नए सीजन के लिए पीक कर्ज हासिल करने का सवाल खड़ा है। OTS के तहत पात्र किसानों की सूची बैंकों तक पहुँचनी बाकी है और कुछ किसानों के कर्जखाते व बैंक रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुए हैं। इस वजह से पीक कर्ज बाँटने की प्रक्रिया में अड़चन आने की आशंका है।
इस साल कम बारिश से खेती पर संकट और गहरा गया है। फसल की फिक्र, बढ़ती उत्पादन लागत और पैसों की तंगी के बीच फंसा किसान पीक कर्ज के सहारे की ओर देख रहा है। ऐसे में कर्जमाफी मिलने के बाद भी अगर सिर्फ सूची अटकी होने या बैंक रिकॉर्ड अपडेट न होने से पीक कर्ज नहीं मिला, तो किसानों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।
इसलिए मुनगंटीवार ने पीक कर्ज बाँटने की मियाद 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाने की मांग की। साथ ही उन्होंने मांग की कि OTS के तहत पात्र किसानों की अटकी सूचियाँ संबंधित बैंकों को तुरंत उपलब्ध कराई जाएँ, कर्जमाफी पा चुके किसानों के कर्जखाते और बैंक रिकॉर्ड अपडेट किए जाएँ, और बैंकों को साफ निर्देश दिए जाएँ कि प्रशासकीय देरी की वजह से एक भी पात्र किसान पीक कर्ज से वंचित न रहे।
मुनगंटीवार का कहना है कि सरकार ने कर्जमाफी से किसान के सिर का बोझ हल्का किया है, अब उसी किसान के हाथ में नए सीजन के लिए पीक कर्ज का सहारा भी जरूरी है। किसान की मेहनत और अगले सीजन की उसकी उम्मीद को प्रशासकीय देरी की कीमत नहीं चुकानी चाहिए। इसलिए मियाद बढ़ाकर पात्र किसानों को वक्त पर कर्ज देने की कार्रवाई तुरंत की जाए।