नेरल-माथेरान मिनी ट्रेन 30 अक्टूबर से फिर चलेगी, रोज दो फेरे, दिवाली से पहले राहत
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मध्य रेलवे की नेरल-माथेरान मिनी ट्रेन की यात्री सेवा शुक्रवार 30 अक्टूबर से दोबारा शुरू होगी। रोज दो फेरे चलेंगे।
माथेरान घूमने का प्लान बनाने वालों के लिए अच्छी खबर है। नेरल और माथेरान के बीच चलने वाली मशहूर मिनी ट्रेन शुक्रवार, 30 अक्टूबर से फिर पटरी पर लौट रही है। मध्य रेलवे के फैसले के बाद यात्री सेवा दोबारा शुरू होगी और इस बार सैलानी दिवाली शुरू होने से पहले ही इस ट्रेन में बैठकर पहाड़ी सफर का मजा ले सकेंगे।
बारिश के मौसम में सुरक्षा के लिहाज से यह सेवा हर साल 15 जून से बंद कर दी जाती है। आम तौर पर 15 अक्टूबर को ट्रेन फिर चालू हो जाती है, यानी चार-पांच महीने का ब्रेक रहता है। इस बार ट्रेन पूरे 15 दिन देर से चल रही है। 15 अक्टूबर को गाड़ी नहीं चली तो सैलानियों ने नाराजगी जताई थी। सूत्रों के मुताबिक सेवा महीने के आखिर में शुरू होनी थी।
नए टाइम टेबल में रोज दो नियमित फेरे रखे गए हैं। नेरल से माथेरान जाने वाली गाड़ी नंबर 52103 सुबह 8.50 बजे छूटेगी और 11.30 बजे माथेरान पहुंचेगी। गाड़ी नंबर 52105 सुबह 10.25 बजे निकलेगी और दोपहर 1.05 बजे मंजिल पर पहुंचेगी। इन दोनों गाड़ियों का टिकट स्टेशन पर रवानगी से एक घंटा पहले मिलने लगता है।
लौटते वक्त माथेरान से नेरल की गाड़ी नंबर 52104 दोपहर 2.45 बजे चलेगी और शाम 5.30 बजे नेरल पहुंचेगी। गाड़ी नंबर 52106 शाम 4 बजे माथेरान से रवाना होकर शाम 6.40 बजे नेरल उतारेगी।
डिब्बों की बात करें तो हर गाड़ी में छह डिब्बे जोड़े जाएंगे। एक गाड़ी में तीन सेकंड क्लास, एक विस्टाडोम और दो सेकंड क्लास सह सामान के डिब्बे होंगे, ताकि बाहर का नजारा खुलकर दिखे। दूसरी गाड़ी में तीन सेकंड क्लास, एक फर्स्ट क्लास और दो सेकंड क्लास सह सामान के डिब्बे लगेंगे।
अमन लॉज और माथेरान के बीच की शटल सेवा भी रोज चलेगी, दोनों तरफ से कुल छह फेरे। अमन लॉज से शटल सुबह 8.45 और 9.35 बजे, दोपहर 12, 2.25 और 3.40 बजे तथा शाम 5.45 बजे छूटेगी। माथेरान से अमन लॉज के लिए गाड़ियां सुबह 8.20, 9.10 और 11.35 बजे, दोपहर 2 और 3.15 बजे तथा शाम 5.20 बजे चलेंगी। शनिवार और रविवार को भीड़ ज्यादा रहती है, इसलिए मध्य रेलवे दोनों दिशाओं में दो-दो अतिरिक्त शटल फेरे भी चलाएगा, ताकि किसी को परेशानी न हो।
देरी की वजह क्या रही, इस पर भी जानकारी सामने आई है। इस साल 15 सितंबर के बाद बारिश नहीं हुई और रास्ता अच्छी हालत में था, फिर भी सेवा शुरू होने में टालमटोल चलती रही। बताया जा रहा है कि मध्य रेलवे इस रूट के ट्रैफिक में कुछ बदलाव की तैयारी में है। दूसरी वजह इंजनों की मरम्मत रही। नेरल के लोको वर्कशॉप में कुल आठ डीजल इंजन हैं, जिनमें से तीन खराब हालत में थे और बाकी पांच की मरम्मत देर से पूरी हुई। इसी वजह से 15 अक्टूबर को सेवा शुरू नहीं हो पाई।
यह ट्रेन 1907 में अंग्रेजों के दौर में नेरल जंक्शन स्टेशन से माथेरान के लिए शुरू हुई थी। नैरो गेज की यह लाइन करीब 21 किलोमीटर लंबी है। यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज ट्रेनों की सूची में नाम होने की वजह से इसे और आकर्षक बनाने पर जोर है। हालांकि इस ट्रेन के अफसरों और कर्मचारियों पर जितना खर्च आता है, उतना किराए से नहीं निकलता। फिर भी हेरिटेज दर्जे की वजह से मध्य रेलवे इसे चलाता रहेगा।
एक निराशा भी है। नई गाड़ियों का ऐलान नहीं हुआ है और फेरे बढ़ने की उम्मीद भी खत्म हो गई है। पिछले दो साल से इस रूट पर सिर्फ दो ही यात्री गाड़ियां चल रही हैं और फेरे बढ़ाने की कई साल पुरानी मांग मध्य रेलवे ने मंजूर नहीं की है। फिर भी ट्रेन शुरू होने से माथेरान के कारोबारियों और सैलानियों में खुशी का माहौल है। बारिश के बाद की गुलाबी ठंड में लाल मिट्टी और घने जंगल के बीच से गुजरती यह ट्रेन सफर का मजा दोगुना कर देगी।
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