नेरळ में 13 नागरी मांगों पर अनशन दूसरे दिन भी जारी, कोई अधिकारी नहीं पहुंचा
मानवाधिकार कार्यकर्ता गोरख शेप 28 सितंबर से अनशन पर हैं। नेरळ के लोग प्रशासन के रवैये से नाराज हैं।
कर्जत तालुके के नेरळ गांव में नागरी सुविधाओं और राज्यमार्ग से जुड़े सवालों को लेकर चल रहा अनशन दूसरे दिन भी जारी रहा। अनशनकारियों की मांगों पर सकारात्मक बातचीत करके फैसला लेने के लिए अब तक एक भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। सरकारी अधिकारियों के इस असहयोग से नेरळ के ग्रामीणों में गुस्सा है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता गोरख शेप ने 28 सितंबर से 13 सवालों को लेकर अनशन शुरू किया है। इनमें नेरळ ग्रामपंचायत का अंधाधुंध कामकाज, अतिक्रमण, नगर परिषद बनाने का मामला, ठोस कचरा प्रबंधन परियोजना से जुड़े सवाल और डंपिंग ग्राउंड इलाके की जमीन की बिक्री शामिल हैं। इसके अलावा कर्जत-कल्याण राज्यमार्ग के आसपास का अतिक्रमण, नेरळ के व्यापारी संकुल की दुकानों का बंटवारा और गांव की सड़क पर फुटपाथ का अतिक्रमण भी मांगों में हैं।
अनशन को नेरळ गांव के सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संस्थाओं का समर्थन मिला है। समर्थन देने वालों में नेरळ मैत्री ग्रुप, आज़ाद समाज पार्टी, युवा नवरात्रोत्सव मंडल, कर्जत तालुका आगरी समाज संगठन, हुतात्मा स्मारक समिति, कर्जत प्रेस क्लब, कर्जत प्रेस एसोसिएशन, मानवाधिकार आयोग संगठन, नेरळ विकास संघर्ष समिति, सूचना अधिकार सामाजिक समूह, ज्ञानमाता सामाजिक संस्था, नेरळ व्यापारी फेडरेशन, नेरळ लोहाना समाज, एंटी करप्शन बोर्ड, नेरळ टैक्सी संगठन, किसान क्रांति संगठन और नेरळ माथेरान टैक्सी संगठन हैं। शिवसेना शिंदे गुट, शिवसेना ठाकरे गुट, राष्ट्रवादी अजित पवार गुट, राष्ट्रीय कांग्रेस और आरपीआई आठवले गुट ने भी खुला समर्थन दिया है।
यह अनशन कर्जत पंचायत समिति, नेरळ ग्रामपंचायत, नेरळ विकास प्राधिकरण, तहसीलदार दफ्तर और सार्वजनिक निर्माण विभाग से जुड़े मामलों को लेकर है। ऐसे में खंड विकास अधिकारी, तहसीलदार, जिला परिषद और सार्वजनिक निर्माण विभाग के उप अभियंता को मौके पर आकर रास्ता निकालना चाहिए था। लेकिन प्रशासन कोई भी पहल नहीं कर रहा, इसलिए नेरळ में सरकारी दफ्तरों के खिलाफ नाराजगी है।
नेरळ पुलिस और नेरळ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की मेडिकल टीम को छोड़कर किसी भी सरकारी दफ्तर ने अनशन स्थल का दौरा नहीं किया। पुलिस अधिकारी और कर्मचारी बंदोबस्त के तौर पर वहां पहुंचे थे। वहीं स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर और कर्मचारी गोरख शेप की सेहत जांचने आए थे। जिन सवालों को लेकर अनशन शुरू हुआ है, उनके जिम्मेदार अधिकारियों में से कोई भी अनशनकारियों से मिलने और हल निकालने के लिए नहीं आया।
गोरख शेप, मानवाधिकार कार्यकर्ता, ने कहा कि उन पर बायपास सर्जरी की नौबत भले आई हो, वे गांव के विकास को लेकर अड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि कोई उनकी सेहत का बहाना न बनाए और उन्हें अनशन छोड़ने की सलाह न दे। उनके मुताबिक अनशन शुरू करते समय ही उन्होंने जीवन के अंत तक अनशन करने की बात पहले ही जाहिर कर दी थी।