माथेरान में घोड़े वालों की हड़ताल, श्रीराम चौक पर बेमियादी उपोषण शुरू
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सड़कों के पेवर ब्लॉक और दूसरी मांगों पर अश्वपाल संगठनों ने सोमवार से घोड़े बंद रखे हैं और गुरुवार से उपोषण पर बैठे हैं।
माथेरान में सड़कों पर पेवर ब्लॉक लगाने के काम को लेकर घोड़े वालों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। माथेरान शहर के अश्वपाल संगठनों ने सोमवार से अपना धंधा बंद कर दिया है। इसका नतीजा यह है कि सोमवार से एक भी घोड़ा माथेरान की सड़कों पर सवारी के लिए नहीं उतरा है।
सोमवार 26 अक्टूबर से घोड़े बंद का आंदोलन चल रहा है। इसके बाद भी प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया, तो गुरुवार 29 अक्टूबर से अश्वपालकों ने श्रीराम चौक में बेमियादी अनशन शुरू कर दिया। यह अनशन अश्वपाल संगठन की नेता आशा कदम की अगुवाई में हो रहा है। स्थानीय अश्वपाल संगठन और मूलवासी अश्वपाल संगठन, दोनों इस आंदोलन में शामिल हैं।
एक ही मुद्दे पर घोड़ा व्यवसाय बंद करने का यह दूसरा आंदोलन है। संगठनों का कहना है कि पालिका कोई कार्रवाई नहीं कर रही, इसलिए मामला और बिगड़ सकता है।
संगठन की शिकायतों की सूची लंबी है। सड़कों की खराब हालत, घटिया क्ले पेवर ब्लॉक, टूटते-बिखरते घोड़ा स्टैंड, हेरिटेज बंगलों के कामों को दी गई परमिशन और ई-रिक्शा, इन सब पर प्रशासन ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है।
श्री छत्रपति शिवाजी महाराज के पुतले से खंडाळा पॉइंट रोड तक क्ले पेवर ब्लॉक का काम चल रहा है। संगठन ने इस काम की क्वालिटी पर सवाल उठाए हैं। मांग है कि क्वालिटी की जांच की जाए और घटिया काम को फौरन रोका जाए।
शार्लोट लेक के संवर्धन के काम में निकले पत्थर और मिट्टी को सड़कों और दूसरे कामों में इस्तेमाल करने की बात कही गई थी। संगठन पूछ रहा है कि यह सामान आखिर कहां लगा। उसकी मांग है कि इसकी जानकारी देकर पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए।
ई-रिक्शा को लेकर भी सवाल हैं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के मुताबिक ई-रिक्शा शुरू हुई हैं। संगठन का सवाल है कि मंजूरी 20 ई-रिक्शा की थी, तो 26 कैसे हो गईं? हाथरिक्शा चालकों की मांगों पर फैसला क्यों नहीं हुआ? हेरिटेज बंगलों के कामों की परमिशन और जर्जर घोड़ा स्टैंड की मरम्मत पर भी जवाब मांगा गया है।
अश्वपाल संगठन की अध्यक्षा आशा कदम ने नाराजगी जताई कि बार-बार पत्र लिखने के बावजूद अश्वचालकों के सवाल हल नहीं हो रहे। इसी वजह से घोड़े बंद आंदोलन के बाद आज से बेमियादी आमरण अनशन शुरू करने का फैसला लिया गया, यह उन्होंने बताया। अब सबकी नजर इस पर है कि प्रशासन माथेरान के अश्वचालकों की मांगों पर कोई ठोस फैसला लेता है या नहीं।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।