मुंबई की आशा सेविकाओं को दिवाली बोनस नहीं, यूनियन ने दी 'भीख मांगो' आंदोलन की चेतावनी
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सीटू से जुड़ी आशा यूनियन ने एनएचएम और बीएमसी की आशा सेविकाओं के लिए फौरन बोनस मांगा है, वरना महानगरपालिका के सामने आंदोलन होगा।
मुंबई महानगरपालिका (BMC) के स्वास्थ्य विभाग के तहत गली-मोहल्लों तक सेहत की सेवाएं पहुंचाने वाली आशा सेविकाओं को इस साल भी दिवाली बोनस घोषित नहीं हुआ है। इसी बात पर सीटू से जुड़ी आशा यूनियन ने कड़ी नाराजगी जताई है। यूनियन की मांग है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान (एनएचएम) और मुंबई महानगरपालिका की आशा सेविकाओं को फौरन ठीक-ठाक बोनस दिया जाए। यूनियन ने साफ चेतावनी दी है कि ऐसा न हुआ तो दिवाली के मुहाने पर मुंबई महानगरपालिका के सामने 'भीख मांगो' आंदोलन किया जाएगा।
यूनियन के मुताबिक आशा सेविकाओं के लिए दिवाली बोनस की मांग कई सालों से चल रही है और हर साल इसके लिए आंदोलन भी होता है। इस बार 26 अक्टूबर को आजाद मैदान में आंदोलन किया गया, फिर भी बोनस का ऐलान नहीं हुआ। यूनियन का कहना है कि इससे आशा सेविकाओं में नाराजगी है।
यूनियन ने दूसरी महानगरपालिकाओं का हाल भी गिनाया है। उसकी दी हुई जानकारी के मुताबिक नवी मुंबई महानगरपालिका ने आम तौर पर 45 हजार रुपये का बोनस घोषित किया है और उसमें आशा सेविकाएं भी शामिल हैं। कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका ने आशा सेविकाओं को छह हजार रुपये बोनस देना मान लिया है। यूनियन का दावा है कि ठाणे, मीरा-भाईंदर और वसई-विरार महानगरपालिकाओं में भी आशा सेविकाओं को हर साल दिवाली बोनस मिलता है।
संगठन का आरोप है कि मुंबई महानगरपालिका देश की अमीर महानगरपालिकाओं में गिनी जाती है, फिर भी यहां की आशा सेविकाओं को बोनस से दूर रखा जा रहा है।
यूनियन ने याद दिलाया है कि आशा सेविकाएं घर-घर जाकर लोगों तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने का काम लगातार करती हैं। कोरोना महामारी के दौर में भी उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया। संगठन की भावना है कि उनके काम के हिसाब से उन्हें सही आर्थिक फायदा नहीं मिल रहा।
यूनियन का कहना है कि आशा सेविकाओं और सामुदायिक स्वास्थ्य स्वयंसेविकाओं (सीएचवी) का काम एक जैसा है। उसने सीएचवी को घोषित 16 हजार रुपये के बोनस का मुद्दा उठाया है। यूनियन का आरोप है कि सीएचवी को बोनस मिल रहा है और आशा सेविकाओं को उससे बाहर रखा गया है, जो अन्याय और भेदभाव है।
यूनियन ने यह दावा भी किया है कि आशा सेविकाओं को मानदेय भी नियमित नहीं मिलता। संगठन के मुताबिक ऐसे हालात में दिवाली जैसा त्योहार मनाना आर्थिक तौर पर मुश्किल हो जाता है। इसलिए मांग की गई है कि मुंबई महानगरपालिका एनएचएम और बीएमसी, दोनों की आशा सेविकाओं के लिए तुरंत ठीक-ठाक बोनस घोषित करे।
सीटू से जुड़ी आशा यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर महानगरपालिका ने जल्द फैसला नहीं लिया तो ऐन दिवाली के वक्त महानगरपालिका के सामने 'भीख मांगो' आंदोलन किया जाएगा।
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