उल्हासनगर में जाम में फंसी रिक्शा, अस्पताल पहुंचने से पहले महिला ने रिक्शे में बच्चे को जन्म दिया
उल्हासनगर में ट्रैफिक जाम की वजह से अस्पताल न पहुंच पाई गर्भवती महिला की डिलीवरी रिक्शे में ही हुई। मां और बच्चा दोनों ठीक हैं।
उल्हासनगर शहर में बढ़ते ट्रैफिक जाम का एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जाम में रिक्शा फंस जाने से एक गर्भवती महिला वक्त पर अस्पताल नहीं पहुंच सकी और आखिरकार रिक्शे के अंदर ही उसकी डिलीवरी हो गई। यह घटना गुरुवार को तड़के साढ़े तीन बजे की है।
डिलीवरी के बाद मां और नवजात को फौरन उल्हासनगर के मध्यवर्ती अस्पताल में भर्ती कराया गया। राहत की बात यह है कि दोनों की हालत स्थिर बताई गई है। अस्पताल के जिला शल्यचिकित्सक डॉ. मनोहर बनसोडे ने बताया कि महिला और बच्चे की तबीयत एकदम ठीक है।
अस्पताल में क्या हुआ, इसकी जानकारी भी दी गई है। एम्बुलेंस के ड्राइवर अस्पताल की तरफ दौड़े और डॉक्टर व नर्स को खबर दी। हालात की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों, नर्सों और स्टाफ ने महिला की स्थिति देखकर रिक्शे में ही डिलीवरी कराने का फैसला किया।
अस्पताल की महिला इंटर्न डॉक्टर और नर्सों ने तुरंत तत्परता दिखाई और रिक्शे में ही डिलीवरी सफल रही। रिक्शे में बैठी उस महिला ने बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद अस्पताल के वार्डबॉय धीरज सितापारा और प्राइवेट एम्बुलेंस ड्राइवर विशाल शेलार महिला को स्ट्रेचर पर रखकर प्रसूति वार्ड तक ले गए।
इस घटना से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि महानगरपालिका वाले शहर में अगर नागरिकों को सड़क पर जाम का इतना बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है, तो ट्रैफिक व्यवस्था की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।
उल्हासनगर की सड़कों की बदहाली और बढ़ता जाम आम लोगों की जान पर कैसे बन आता है, यह मामला उसकी एक दर्दनाक मिसाल है। स्थानीय नागरिकों में इसे लेकर तीखी नाराजगी है और उनका कहना है कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था का हाल एक बार फिर सबके सामने आ गया।
एक तरफ राजनीतिक नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप और आपसी झगड़े चल रहे हैं, दूसरी तरफ आम नागरिकों को सड़क पर बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है। नागरिकों की नाराज प्रतिक्रिया है कि आपस में लड़ने वाले नेता अब राजनीतिक विवाद किनारे रखें, शहर का यह हाल देखें और लोगों की समस्याओं पर ध्यान दें।