धाराशिव बस स्टेशन में रसवंती का टीन शेड, महिला शौचालय की हवा पर असर का आरोप
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
धाराशिव के नए बस स्टेशन में महिला शौचालय से सटे टीन शेड पर अतिक्रमण और यात्रियों की सुरक्षा के सवाल उठे हैं।
धाराशिव के नए बने बस स्टेशन के परिसर में गन्ने के रस की दुकान के लिए टीन का शेड खड़ा किया गया है। इसके बाद अतिक्रमण और यात्रियों की सुरक्षा का सवाल उठ गया है। शेड महिला शौचालय से सटाकर बनाया गया है और आरोप है कि इससे शौचालय के वेंटिलेशन में रुकावट आ रही है। पास में ही भीड़ वाला प्लेटफॉर्म है, इसलिए यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
सवाल यह भी है कि बस स्टेशन के परिसर में जगह खाली होते हुए शेड भीड़ वाली जगह पर ही क्यों बनाया गया। सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि एसटी प्रशासन बताए कि इस निर्माण की आधिकारिक मंजूरी है या नहीं, जगह बांटने के नियमों का पालन हुआ या नहीं, और बस स्टेशन के मूल नक्शे में बदलाव करने का अधिकार किसके पास है।
बस स्टेशन की इमारत में पहले भी कुछ बदलाव किए जाने का आरोप है। बताया जाता है कि महिला शौचालय के पास वाली कैंटीन का प्रवेश द्वार बदलकर बस के प्लेटफॉर्म से सटा दिया गया। इससे कैंटीन में आने-जाने वाले लोग और बस में चढ़ने-उतरने वाले यात्री एक ही जगह जमा होने की आशंका है। इस बदलाव को तकनीकी और प्रशासनिक मंजूरी मिली है या नहीं, और यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से इसकी जांच हुई या नहीं, यह साफ होना जरूरी है।
बस स्टेशन के दक्षिण की तरफ महिला शौचालय से सटा यह शेड गन्ने के रस की दुकान के लिए बना है। आरोप है कि इससे शौचालय का वेंटिलेशन प्रभावित हुआ है। बस स्टेशन की कंपाउंड वॉल के पास खुली जगह मौजूद है, फिर भी भीड़ वाली जगह पर निर्माण क्यों हुआ, यह सवाल भी उठ रहा है।
आरपीआई (खरात) के जिला अध्यक्ष राजाभाऊ राऊत, सुनील वाघमारे और विकास बनसोडे ने मांग की है कि निर्माण, जगह के बंटवारे और यात्रियों की सुविधाओं में बदलाव के वक्त मंजूर नक्शे, नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच हो। उनका कहना है कि शेड की इजाजत दी गई हो तो उसका आदेश, जगह का लाइसेंस और मंजूर क्षेत्रफल की जानकारी सार्वजनिक की जाए। निर्माण अनधिकृत निकले तो उसे हटाया जाए और जिम्मेदारों पर नियम के मुताबिक कार्रवाई हो।
इस मामले में विभागीय नियंत्रक अजय पाटील की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। परिसर की जगह इस्तेमाल के लिए देने, निर्माण की इजाजत देने या मूल नक्शे में बदलाव करने के लिए किस स्तर की मंजूरी चाहिए, यह साफ होना चाहिए। परिवहन मंत्री और पालक मंत्री प्रताप सरनाईक के निजी सहायक ज्ञानेश्वर वसेकर ने बताया कि विभागीय नियंत्रक ने कहा है कि शेड बनाने का फैसला समिति ने लिया।
विभागीय नियंत्रक अजय पाटील के मुताबिक गन्ने के रस की दुकान चलाने वाले ने जगह बदलने की गुजारिश की थी। उसी के आधार पर समिति ने टीन का शेड बनाने का फैसला किया। पाटील ने कहा कि कोई अप्रिय घटना न हो, इसका ध्यान रखा जाएगा।
लेकिन अगर फैसला समिति ने लिया है, तो उस समिति का नाम क्या है, फैसला किस तारीख को हुआ, जगह का आधिकारिक लाइसेंस दिया गया है या नहीं, निर्माण को तकनीकी मंजूरी है या नहीं, और यात्रियों की सुरक्षा के लिए कौन सी जांच हुई, इन सवालों के जवाब अब तक साफ नहीं हैं। इसलिए फैसले की प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और समिति की भूमिका को दस्तावेजों के आधार पर परखने की मांग हो रही है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कुछ समय पहले पुराने बस स्टेशन में यात्रियों की भीड़ की वजह से एक विद्यार्थी की हादसे में मौत का जिक्र किया है। इस पृष्ठभूमि में नए बस स्टेशन में यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है, जबकि भीड़ वाली जगह पर निर्माण के आरोप से चिंता बढ़ी है। मांग की गई है कि बसों की आवाजाही, यात्रियों के चढ़ने-उतरने, प्लेटफॉर्म की भीड़ और महिला शौचालय के इस्तेमाल पर इस निर्माण का क्या असर पड़ता है, इसकी मौके पर जाकर जांच करके तकनीकी रिपोर्ट बनाई जाए।
इस बारे में परिवहन मंत्री और पालक मंत्री प्रताप सरनाईक से संपर्क करने की कोशिश की गई, पर बात नहीं हो सकी। उनके निजी सहायक ज्ञानेश्वर वसेकर से संपर्क होने पर उन्होंने विभागीय नियंत्रक अजय पाटील से कॉन्फ्रेंस कॉल पर जानकारी ली। पाटील ने इस दौरान बताया कि समिति ने शेड बनाने का फैसला किया है और यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाएगा।
अब सवाल यह है कि बस स्टेशन के मूल नक्शे, शेड की मंजूरी और जगह बांटने की प्रक्रिया की जांच होगी या नहीं। सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि निर्माण नियमों के खिलाफ निकले तो उसे हटाया जाए, जिम्मेदारी तय हो और यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय किए जाएं।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।