साय डोंगर के टोरंट प्रोजेक्ट पर महायुति में मतभेद, थोरवे के रुख पर राष्ट्रवादी नाराज
कर्जत के साय डोंगर में टोरंट पॉवर के प्रस्तावित प्रोजेक्ट पर महायुति के घटक दल आमने-सामने हैं। शिवसेना शिंदे गुट के महेंद्र थोरवे रोजगार के नाम पर समर्थन में हैं, जबकि राष्ट्रवादी के सुधाकर घारे पेड़ कटाई और स्थानीय विरोध का मुद्दा उठा रहे हैं।
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कर्जत तालुका के साय डोंगर इलाके में टोरंट पॉवर का ऊर्जा स्टोरेज प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। इसे लेकर राजनीति गरमा गई है। प्रोजेक्ट का विरोध पहले से चारों तरफ से हो रहा था, लेकिन अब महायुति के घटक दल भी इस पर आपत्ति जताते दिख रहे हैं। स्थानीय लोग, पर्यावरण प्रेमी और राजनीतिक विरोधी तो पहले से खिलाफ थे ही, अब सत्ताधारी पक्ष को अपने ही सहयोगियों का सामना भी करना पड़ रहा है।
विवाद के बीच एक तरफ शिवसेना शिंदे गुट के विधायक महेंद्र थोरवे हैं। उनका कहना है कि इस प्रोजेक्ट से स्थानीय लोगों को रोजगार के मौके मिलेंगे। दूसरी तरफ राष्ट्रवादी कांग्रेस अजित पवार गुट के रायगढ़ जिलाध्यक्ष सुधाकर घारे हैं। उन्होंने पेड़ों की कटाई और स्थानीय लोगों के विरोध का मुद्दा उठाते हुए प्रोजेक्ट का विरोध किया है।
साय डोंगर इलाके में स्थानीय लोग इस प्रोजेक्ट के खिलाफ हैं, फिर भी विधायक महेंद्र थोरवे ने इसका साथ दिया है। उन्होंने कहा कि इससे रोजगार पैदा होने की संभावना है। इस पर सुधाकर घारे ने सवाल उठाया कि इतने बड़े प्रोजेक्ट का विरोध हो रहा है, तो भी थोरवे उसका समर्थन क्यों कर रहे हैं।
घारे ने थोरवे के रुख की आलोचना की और कहा कि स्थानीय लोगों के हित का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि ऐसे प्रोजेक्ट लाए जा रहे हैं जिनसे स्थानीय लोगों को नुकसान पहुंचता है।
कर्जत तालुका के साय डोंगर इलाके में टोरंट पॉवर कंपनी का तीन हजार मेगावॉट क्षमता का जलविद्युत ऊर्जा स्टोरेज प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। इस प्रोजेक्ट से जुड़ी पेड़ कटाई को लेकर गांव वालों में नाराजगी बताई जा रही है। यह भी दावा किया गया है कि पेड़ों की कटाई करीब छह महीने तक चलेगी।
इस मुद्दे पर स्थानीय ग्रामीणों, किसानों और पर्यावरण से जुड़े संगठनों ने आपत्ति जताई है। शिवसेना ठाकरे गुट, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और शेतकरी कामगार पक्ष ने भी पेड़ कटाई का विरोध किया है।
राष्ट्रवादी के सुधाकर घारे का दावा है कि प्रोजेक्ट की जनसुनवाई के दौरान स्थानीय लोगों ने बड़े पैमाने पर विरोध किया था। ऐसे में प्रोजेक्ट को आगे कैसे बढ़ाया जा रहा है, यह सवाल उन्होंने उठाया।
एक तरफ रोजगार पैदा होने की बात कही जा रही है, तो दूसरी तरफ जंगल और स्थानीय पर्यावरण को बचाने की मांग उठ रही है। इसलिए अब सबकी नजर इस पर है कि साय डोंगर के प्रोजेक्ट पर आगे क्या फैसले होते हैं, और पेड़ कटाई तथा स्थानीय लोगों की आपत्तियों पर प्रशासन क्या रुख अपनाता है।
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