बार-बार सिरदर्द हो तो विशेषज्ञ के पास कब जाएं, डॉक्टरों ने गिनाए संकेत
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
डॉक्टरों के मुताबिक ज्यादातर सिरदर्द गंभीर नहीं होते, मगर दर्द की बारंबारता, पैटर्न में बदलाव और कुछ खास लक्षण जांच की जरूरत बताते हैं।
पर्स में दवा की पट्टी रखना और लगभग हर हफ्ते उसे बदलना, कई लोगों के लिए यह रोज की बात बन चुकी है। सिरदर्द अब कभी-कभार की चीज नहीं रहा, कई लोग उसका इलाज कराने के बजाय उसी के साथ जीना सीख लेते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक यही आदत लंबे समय से चल रहे सिरदर्द को नजरअंदाज करना आसान बना देती है, क्योंकि जो दर्द बार-बार आता है, वह आखिर में लक्षण जैसा लगना ही बंद हो जाता है।
डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादातर सिरदर्द बड़ी समस्या नहीं होते। फिर भी कुछ मामलों में दर्द गंभीर होता है और फौरन मदद की जरूरत पड़ती है। इसलिए यह जानना काम आता है कि सिरदर्द में डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए।
दुनिया भर में हर 10 में से 4 लोगों को सिरदर्द होता है। 2021 में गिनती की गई तो यह आंकड़ा करीब 3 अरब लोगों तक पहुंचा। धरती पर बहुत कम सेहत की परेशानियां इतने लोगों को प्रभावित करती हैं, और शायद इसीलिए सिरदर्द को इतनी आसानी से टाल दिया जाता है।
डॉक्टर सिरदर्द को मोटे तौर पर दो तरह से देखते हैं। एक तो माइग्रेन जैसे सिरदर्द, जो खुद ही मुख्य समस्या होते हैं, लेकिन दिमाग को नुकसान नहीं पहुंचाते। दूसरे वे सिरदर्द, जो चेतावनी देते हैं। ये तब होते हैं जब कोई और दिक्कत चल रही हो, जैसे चोट, कोई बीमारी या सिर के अंदर बढ़ा हुआ दबाव। ज्यादातर सिरदर्द पहले गुट में आते हैं, इसलिए आम तौर पर घबराने की वजह नहीं होती। लेकिन दर्द का पैटर्न बदलने लगे या कुछ नया महसूस हो, तो जांच करा लेना समझदारी है।
डॉक्टरों के मुताबिक यहां तीव्रता से ज्यादा बारंबारता मायने रखती है। जो सिरदर्द महीने में 15 या उससे ज्यादा दिन हो और लगातार तीन महीने तक ऐसा ही रहे, उसे डॉक्टर क्रॉनिक कहते हैं। इसमें हल्का दर्द भी गिना जाता है। महीने के 20 दिन हल्का दर्द रहना भी उतना ही जांच के लायक है, जितने कुछ तेज दौरे।
पैटर्न में बदलाव भी उतना ही अहम है। जिसे 20 साल से एक ही तरह का माइग्रेन है, वह उसका स्वभाव अच्छी तरह जानता है। मगर जो सिरदर्द अलग ढंग से पेश आने लगे, वह दर्द बढ़े बिना भी ध्यान देने लायक है। तीसरा संकेत इलाज का बेअसर होना है। जो गोलियां कभी काम करती थीं और अब दर्द को मुश्किल से छूती हैं, या जो सिरदर्द जल्दी सोने पर मजबूर कर दे, या हर महीने एक काम का दिन खा जाए, वह भी यही बताता है।
कुछ संकेतों में उसी दिन जांच जरूरी बताई गई है। अगर सिरदर्द एक मिनट से भी कम समय में अचानक बहुत तेज हो जाए, तो यह बड़ी इमरजेंसी है। अब तक का सबसे तेज दर्द महसूस होने का मतलब दिमाग के पास खून बहना हो सकता है, और ऐसे व्यक्ति को फौरन डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए। बुखार और आगे न झुकने वाली अकड़ी हुई गर्दन के साथ सिरदर्द हो, तो उसी घंटे इमरजेंसी देखभाल चाहिए। सिर की चोट या पहली बार आया दौरा (सीजर) भी तुरंत डॉक्टर की जरूरत बताता है।
कुछ हालात में इंतजार करने के बजाय जल्दी अपॉइंटमेंट लेने की बात कही गई है। 50 साल की उम्र के बाद शुरू हुआ बिल्कुल नया सिरदर्द जांच के लायक है। लेटने, खांसने, छींकने या जोर लगाने पर बढ़ने वाला दर्द, या उठने पर और तेज होकर उल्टी के साथ आने वाला दर्द, खोपड़ी के अंदर बढ़े दबाव की ओर इशारा करता है। कैंसर का इतिहास हो, रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो या वजन बिना वजह घट रहा हो, तब भी यही लागू होता है। हफ्तों में धीरे-धीरे बढ़ता दर्द और धुंधला या दोहरा दिखना भी इसी गुट में आता है।
डॉक्टरों के मुताबिक बार-बार सिरदर्द की गोली लेने वालों में एक बुरा चक्कर बन सकता है। 3 महीने से ज्यादा नियमित दर्दनिवारक लेना खुद रोज का सिरदर्द पैदा कर सकता है, जिससे और दवा की जरूरत पड़ती है। साधारण दर्दनिवारक महीने में 15 या ज्यादा दिन, या माइग्रेन की गोलियां, ओपिओइड्स या मिली-जुली दवाएं महीने में 10 या ज्यादा दिन लेना जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल माना जाता है। आम आबादी में इसका अनुपात 0.5% से 2.6% है, फिर भी विशेषज्ञों के सिरदर्द क्लिनिक में आने वाले मरीजों का बड़ा हिस्सा यही होता है। दवा बंद करने का फैसला डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए, क्योंकि शरीर के ढलने के दौरान एक-दो हफ्ते दर्द ज्यादा लग सकता है।
विशेषज्ञ से मुलाकात में ज्यादातर निदान मरीज के इतिहास से होता है। डॉक्टरों के मुताबिक कम से कम 4 से 6 हफ्ते सिरदर्द का रिकॉर्ड रखना चाहिए, जिसमें समय, जगह, चेतावनी वाले लक्षण, वजह बनने वाली चीजें, नींद और दवाओं का इस्तेमाल लिखा हो। स्कैन नियमित नहीं, चुनिंदा मामलों में कराए जाते हैं। सिरदर्द माइग्रेन जैसा हो और शारीरिक जांच सामान्य हो, तो ब्रेन स्कैन की जरूरत भी नहीं पड़ सकती।
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