गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

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तोंड के अंदर के बदलाव को हल्के में न लें, सुपारी-पान-गुटखा से बढ़ सकता है कैंसर का खतरा

तोंड के अंदर के बदलाव को हल्के में न लें, सुपारी-पान-गुटखा से बढ़ सकता है कैंसर का खतरा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सेहत PT24 टीम

मुंबई के एसएसओ कैंसर हॉस्पिटल के डॉ. अमित चक्रवर्ती ने बताया कि सुपारी, पान और गुटखे की आदत से मुंह के अंदर शुरुआती बदलाव हो सकते हैं।

बहुत से लोगों को सुपारी, पान या गुटखा खाने की आदत मामूली लगती है। लेकिन मुंबई के एसएसओ कैंसर हॉस्पिटल में हेड एंड नेक कैंसर सर्जन डॉ. अमित चक्रवर्ती ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है। उनके मुताबिक इन आदतों से मुंह के अंदरूनी हिस्से को धीरे-धीरे नुकसान पहुंच सकता है।

डॉ. चक्रवर्ती के अनुसार शुरुआत में मुंह में जलन होना, सफेद या लाल चट्टे दिखना और मुंह खोलने में तकलीफ होना जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। अगर इन बदलावों पर वक्त रहते ध्यान न दिया जाए, तो आगे चलकर मुंह के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए ऐसे लक्षण दिखें तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

सुपारी के बारे में डॉक्टर ने बताया कि इसे रोज चबाने से मुंह के अंदर की नाजुक त्वचा को परेशानी होती है और कोशिकाओं में असामान्य बदलाव लाने वाले तत्वों से संपर्क होता है। इसमें तंबाकू भी जुड़ जाए तो कैंसर का खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि तंबाकू में कैंसर की वजह बनने वाले कई केमिकल होते हैं।

डॉ. चक्रवर्ती ने कहा कि कई लोग सोचते हैं कि मुंह में कोई जख्म या गांठ नहीं दिख रही, तो कोई गंभीर दिक्कत नहीं होगी। मगर सुपारी, पान या गुटखा लगातार खाने से कैंसर के साफ लक्षण दिखने से पहले ही अंदर की परत में बदलाव हो सकते हैं। इनमें से कुछ बदलाव आगे चलकर कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। ऐसी हालत को कैंसर से पहले की अवस्था, या कैंसर का खतरा बढ़ाने वाले विकार कहा जाता है।

सुपारी से जुड़ा एक अहम विकार ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस है। डॉक्टर के मुताबिक इसमें गाल के अंदर के ऊतक धीरे-धीरे सख्त हो जाते हैं और उनकी लचक कम हो जाती है, जिससे अंदर रेशेदार पट्टियां बनने लगती हैं। शुरू में तीखा खाने पर जलन, गालों के अंदर खिंचाव या मुंह पूरा न खुल पाना जैसे लक्षण दिख सकते हैं। वक्त के साथ मुंह खोलने की क्षमता और घट सकती है। डॉ. चक्रवर्ती ने कहा कि इन लक्षणों को सुपारी की वजह से होने वाली आम तकलीफ समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

मुंह के अंदर सफेद चट्टा दिखना ल्यूकोप्लाकिया का लक्षण हो सकता है। डॉक्टर के अनुसार जांच में जब साफ हो जाए कि यह दाग किसी और वजह से नहीं बना है, तभी इसका निदान किया जाता है। कुछ सफेद दागों में कोशिकाओं के असामान्य बदलाव मिल सकते हैं। इसी तरह मुंह के अंदर दिखने वाले लाल चट्टे भी अहम होते हैं, जिन्हें एरिथ्रोप्लाकिया कहा जाता है। डॉ. चक्रवर्ती के मुताबिक ऐसे कुछ चट्टों में कैंसर से पहले के बदलाव मिलने की आशंका ज्यादा रहती है, इसलिए उनकी फौरन जांच जरूरी है।

डॉक्टर ने बताया कि मुंह में जख्म, सफेद या लाल चट्टे, लगातार जलन, बिना वजह खून आना, गांठ महसूस होना या मुंह खोलने में दिक्कत जैसे लक्षणों को आम समझकर टालना नहीं चाहिए। जिन लोगों को सुपारी, पान या गुटखे की आदत है, उन्हें खास तौर पर सतर्क रहने को कहा गया है। मुंह के अंदर कोई भी असामान्य बदलाव दो हफ्ते से ज्यादा टिके, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। जांच में कोई संदिग्ध हिस्सा मिले तो आगे की जांच या बायोप्सी की सलाह दी जा सकती है। डॉ. चक्रवर्ती के अनुसार वक्त पर निदान हो जाए तो उस हिस्से पर नजर रखना, जरूरी जांच करना और सही इलाज शुरू करना मुमकिन हो पाता है।

डॉ. चक्रवर्ती ने यह भी कहा कि तंबाकू छोड़ देने भर से मुंह के कैंसर का खतरा पूरी तरह नहीं टल जाता। सुपारी की आदत जारी रही तो मुंह के अंदर के ऊतकों को नुकसान हो सकता है। इसलिए सुपारी, पान और गुटखा बंद करना और तंबाकू से दूर रहना जरूरी है। उनके मुताबिक जिन लोगों को मुंह के कैंसर का खतरा है, उन्हें दर्द होने या साफ गांठ दिखने का इंतजार नहीं करना चाहिए।

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