मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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महाराष्ट्र की कई कोर्ट को एक साथ बम की धमकी के ईमेल, अमरावती समेत विदर्भ भी निशाने पर

महाराष्ट्र की कई कोर्ट को एक साथ बम की धमकी के ईमेल, अमरावती समेत विदर्भ भी निशाने पर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जुर्म PT24 टीम

सोमवार दोपहर राज्य के कई जिला एवं सत्र न्यायालयों को धमकी भरे ईमेल मिले। कोर्ट खाली कराई गईं, शुरुआती तलाशी में कोई विस्फोटक नहीं मिला।

नागपुर/मुंबई: सोमवार दोपहर महाराष्ट्र के कई जिला एवं सत्र न्यायालयों को एक ही समय पर बम की धमकी वाले ईमेल मिले। इससे राज्य की न्याय व्यवस्था में हड़कंप मच गया। एहतियात के तौर पर कोर्ट का कामकाज रोककर परिसर खाली कराया गया और पूरे राज्य में सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया।

बताया गया है कि ये धमकियां मुंबई, कोंकण, पश्चिम महाराष्ट्र, उत्तर महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ की कोर्ट को भेजी गई थीं। प्रभावित कोर्ट में अमरावती का जिला एवं सत्र न्यायालय भी है। इलाके की कुछ और जिला कोर्ट भी कथित तौर पर इन धमकी भरे संदेशों के दायरे में थीं।

सोमवार हफ्ते का पहला कामकाजी दिन होता है, इसलिए कोर्ट में वादी, वकील, जज और कर्मचारियों की अच्छी-खासी भीड़ थी। अचानक आई धमकी से सामान्य सुनवाई ठप हो गई और अधिकारियों को कामकाज रोककर परिसर खाली कराना पड़ा।

पुणे के शिवाजीनगर में जिला एवं सत्र न्यायालय भी निशाने पर आई प्रमुख कोर्ट में शामिल थी। कोर्ट के आधिकारिक इनबॉक्स में धमकी वाला ईमेल पहुंचते ही वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों ने तुरंत परिसर खाली करने के निर्देश दिए। पुणे पुलिस ने पूरे कोर्ट कॉम्प्लेक्स को अपने कब्जे में लिया और जजों, वकीलों, कर्मचारियों और सैकड़ों वादियों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया। आने-जाने के सभी रास्तों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई।

शिवाजीनगर कोर्ट परिसर में बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड (BDDS), डॉग स्क्वॉड और क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे। सभी मंजिलों, जजों के चैंबर, बार रूम, रिकॉर्ड रूम, शौचालयों और बाकी जगहों की गहन तलाशी ली गई। परिसर में खड़ी सैकड़ों गाड़ियों की भी मेटल डिटेक्टर से जांच की गई।

विदर्भ की कोर्ट की सुरक्षा पर सवाल: राज्य के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ आई इन धमकियों के बाद विदर्भ की कोर्ट की सुरक्षा तैयारियों पर भी ध्यान गया है। प्रभावित कोर्ट की सूची में अमरावती का नाम खास तौर पर था। इससे यह चिंता उठी है कि कहीं इलाके की न्यायिक इमारतों में दहशत फैलाने की मिलीजुली कोशिश तो नहीं हुई।

स्थानीय पुलिस और बम निरोधक दस्तों को प्रभावित कोर्ट की इमारतें सुरक्षित करने, लोगों को बाहर निकालने और पूरी तलाशी लेने के लिए लगाया गया। राज्य के दूसरे हिस्सों में भी ऐसे ही एहतियाती कदम उठाए गए, जिनमें ठाणे, मुंबई का दिंडोशी, नाशिक, रत्नागिरी, सातारा, सांगली, सोलापुर, अहिल्यानगर, बीड, परभणी और हिंगोली शामिल हैं।

इतनी बड़ी सुरक्षा कार्रवाई के बावजूद शुरुआती रिपोर्ट वाली जगहों पर हुई प्रारंभिक तलाशी में कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली।

साइबर एजेंसियां जांच में जुटीं: कई कोर्ट को एक साथ निशाना बनाए जाने से इन धमकियों के स्रोत, मकसद और इनके पीछे संभावित तालमेल पर गंभीर सवाल उठे हैं। पुणे साइबर पुलिस, महाराष्ट्र राज्य साइबर विभाग और आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) ने ईमेल भेजने वाले अज्ञात लोगों की पहचान के लिए गहन जांच शुरू की है।

जांचकर्ता तकनीकी सुराग खंगाल रहे हैं कि ये संदेश VPN नेटवर्क, प्रॉक्सी सर्वर, फर्जी डोमेन या भेजने वाले की पहचान छिपाने के किसी और तरीके से भेजे गए या नहीं। एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि यह कोर्ट का कामकाज ठप करने और लोगों में दहशत फैलाने के लिए की गई सिर्फ अफवाह थी या न्याय व्यवस्था को डराने की किसी बड़ी साजिश का हिस्सा।

इस घटना ने दिखाया है कि अहम न्यायिक ढांचा साइबर माध्यम से दी जाने वाली मिलीजुली धमकियों के सामने कितना कमजोर है। राज्य भर में सुनवाई रुकने और आपात सुरक्षा जांच करनी पड़ने के बाद अब अधिकारियों पर जिम्मेदार लोगों का पता लगाने और ऐसी धमकियां दोबारा न आने देने का दबाव है।

पुलिस ने नागरिकों और वादियों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि वाली जानकारी पर यकीन न करें और उसे आगे न फैलाएं। जांच और सुरक्षा जांच जारी रहने तक शांति बनाए रखें।

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