सोम‌वार, 19 अक्टूबर 2026

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06:08 IST

वोटर लिस्ट के दो रिवीजन: SIR और SSR में क्या फर्क है, वोटर को क्या करना होगा

चुनाव आयोग वोटर लिस्ट को सही रखने के लिए दो तरह के रिवीजन करता है। दोनों का दायरा, जांच का तरीका और वोटर से मांगी जाने वाली मदद अलग है।

नागपुर: भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) समय-समय पर वोटर लिस्ट का रिवीजन करता है, ताकि लिस्ट सही रहे और हर पात्र नागरिक वोट डाल सके। इस प्रक्रिया में दो नाम अक्सर सुनने को मिलते हैं: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और स्पेशल समरी रिवीजन (SSR)।

दोनों का मकसद वोटर लिस्ट को ज्यादा सही बनाना है, लेकिन दायरे, जांच के तरीके और वोटर से होने वाली मेहनत के मामले में दोनों में काफी फर्क है। वोटर लिस्ट का रिवीजन अब एक अहम सार्वजनिक मुद्दा बन चुका है, इसलिए यह फर्क समझ लेना नागरिकों के लिए काम का है।

पहले SSR की बात। यह मौजूदा वोटर लिस्ट को अपडेट करने की रूटीन प्रक्रिया है। इसमें पात्र नागरिक वोटर के तौर पर नाम दर्ज करा सकते हैं और पहले से दर्ज वोटर अपनी जानकारी सुधार या अपडेट करा सकते हैं। SSR के दौरान आयोग वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट छापता है और तय समय के भीतर दावे और आपत्तियां मंगवाता है।

SSR में आमतौर पर चार काम होते हैं। पहला, नए वोटर जोड़ना: जो पात्र नागरिक तय उम्र तक पहुंच गए हैं, वे रजिस्ट्रेशन के लिए अर्जी दे सकते हैं। दूसरा, नाम, पते और दूसरी जानकारी की गलतियां ठीक करना। तीसरा, तय प्रक्रिया के हिसाब से डुप्लीकेट एंट्री, मृत वोटरों की एंट्री और दूसरी अपात्र एंट्री की पहचान कर उन पर कार्रवाई करना। चौथा, जिन वोटरों ने घर बदला है, उनके लिए जरूरी बदलाव की अर्जी। यहां मौजूदा लिस्ट ही शुरुआती आधार होती है और दावों-आपत्तियों का निपटारा लागू नियमों के तहत होता है।

SIR इससे कहीं व्यापक कवायद है। यह वोटर लिस्ट तैयार करने या उसकी गहराई से जांच करने के लिए की जाती है। समरी रिवीजन के उलट, इसमें वोटरों की पात्रता और चुनावी रिकॉर्ड की विस्तृत जांच हो सकती है। आयोग के खास निर्देशों के मुताबिक इसमें घर-घर जाकर गणना, तय फॉर्म और जहां जरूरी हो वहां अतिरिक्त दस्तावेज भी शामिल हो सकते हैं।

SIR के मुख्य मकसद ये हैं: वोटर रिकॉर्ड की ज्यादा पूरी जांच करना, डुप्लीकेट, शिफ्ट हो चुके, मृत या किसी और वजह से अपात्र एंट्री की पहचान करना, यह पक्का करना कि पात्र नागरिक लिस्ट में जुड़ें और वोटर लिस्ट की सटीकता और भरोसेमंदी बढ़ाना। सटीक प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और जांच के पैमाने उस खास SIR के लिए जारी निर्देशों पर निर्भर करते हैं।

फर्क को एक नजर में देखें तो SSR रूटीन रिवीजन है और मौजूदा लिस्ट को अपडेट करता है। इसमें दावे, आपत्तियां और तय जांच होती है। वोटर रजिस्ट्रेशन, सुधार और दूसरे बदलावों के लिए अर्जी देते हैं और दस्तावेज उसी अर्जी के हिसाब से लगते हैं। SIR व्यापक रिवीजन है, जिसमें रिकॉर्ड की ज्यादा गहरी जांच होती है। वोटरों को तय गणना और जांच में हिस्सा लेना पड़ सकता है और दस्तावेजों की जरूरत लागू SIR निर्देशों और हर व्यक्ति के हालात पर निर्भर करती है।

क्या SIR का मतलब है कि मौजूदा वोटर अपना वोट देने का हक खो देंगे? जवाब है, नहीं। SIR का मकसद वोटर लिस्ट की जांच करना और उसे बेहतर बनाना है। इसका यह मतलब अपने आप नहीं कि हर मौजूदा वोटर का नाम हटा दिया जाएगा। हां, अगर किसी वोटर की पात्रता या जानकारी की जांच जरूरी हो, तो उसे लागू प्रक्रिया के तहत नोटिस का जवाब देना या जानकारी देनी पड़ सकती है।

किसी भी नाम को हटाने के लिए तय कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है। इंटेंसिव रिवीजन चल रहा है, सिर्फ इस वजह से यह मान लेना ठीक नहीं कि आपका नाम हट गया है। वोटरों को आधिकारिक वोटर लिस्ट देखनी चाहिए, संबंधित नोटिस का जवाब देना चाहिए और जमा की गई अर्जियों या दस्तावेजों की रसीद संभालकर रखनी चाहिए।

रिवीजन चाहे SSR हो या SIR, नागरिकों को कुछ बुनियादी कदम उठाने चाहिए: देखें कि नाम मौजूदा वोटर लिस्ट में है या नहीं; जांचें कि नाम, पता और बाकी जानकारी सही है; रजिस्ट्रेशन या सुधार की जरूरत हो तो तय प्रक्रिया से अर्जी दें; आधिकारिक नोटिसों का जवाब दें और उस रिवीजन के निर्देशों का पालन करें; और रिवीजन पूरा होने के बाद फाइनल वोटर लिस्ट देखें। आधिकारिक जानकारी और वोटर सेवाओं के लिए भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट https://www.eci.gov.in/ या नेशनल वोटर्स सर्विसेज पोर्टल https://voters.eci.gov.in/ देखी जा सकती है।

अलग से दी गई जानकारी के मुताबिक भारत निर्वाचन आयोग ने 14 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों, यानी कुल 17 जगहों की वोटर लिस्ट के स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) का ऐलान किया है। इसमें योग्यता तिथि 1 जनवरी 2027 रखी गई है।

राज्य (14): असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल। केंद्र शासित प्रदेश (3): अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, लक्षद्वीप और पुडुचेरी।

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