बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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20:50 IST

तुकाराम मुंढे होंगे एमपीएससी जांच समिति के सचिव, पुणे आंदोलन के बीच मंत्री का ऐलान

मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने पुणे में आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों से मुलाकात कर कई घोषणाएं कीं, लेकिन एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग अब भी कायम है।

तुकाराम मुंढे होंगे एमपीएससी जांच समिति के सचिव, पुणे आंदोलन के बीच मंत्री का ऐलान तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पुणे में महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग यानी एमपीएससी की मांगों को लेकर चल रहे विद्यार्थियों के आंदोलन में अब एक अहम मोड़ आया है। आंदोलन को 11 दिन हो चुके हैं। विद्यार्थियों को मनाने के लिए राज्य सरकार की तरफ से मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले उनसे मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विद्यार्थियों की मांगों को लेकर सकारात्मक हैं और इसी के साथ कुछ बड़ी घोषणाएं भी कीं।

सबसे अहम घोषणा यह रही कि एमपीएससी की जांच समिति के सचिव पद पर वरिष्ठ अधिकारी तुकाराम मुंढे की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा आंदोलन के दौरान विद्यार्थियों पर जो केस दर्ज हुए थे, उन्हें वापस लेने पर भी सरकार ने अपना रुख साफ किया।

विद्यार्थी एमपीएससी के कामकाज से जुड़ी कई मांगें लेकर पुणे के एस. एम. जोशी पुल पर धरने पर बैठे हैं। इस आंदोलन की सबसे बड़ी मांग यह है कि आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार इस्तीफा दें। मसले का हल निकालने के लिए मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक रोहित पवार और आंदोलन करने वालों से बात की। इसके बाद वे धरने पर बैठे विद्यार्थियों से मिले और बताया कि सरकार उनकी समस्याओं का हल निकालने की कोशिश कर रही है।

पांच सदस्यों की जांच समिति में बी डी नाईक अध्यक्ष होंगे और तुकाराम मुंढे सचिव। बाकी तीन सदस्य गणेश पाटील, लखमी गौतम और दिलीप भोसले हैं। अब सबकी नजर इस पर है कि इस फैसले से जांच में कितनी पारदर्शिता आती है और विद्यार्थियों की शिकायतों का निपटारा कैसे होता है।

शिवेंद्रराजे ने यह भी कहा कि एमपीएससी के मामले में जांच के दौरान जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही आने वाले समय में ग्रुप-सी के पदों के लिए होने वाली परीक्षाओं में पदों की संख्या बढ़ाने की जानकारी भी उन्होंने दी। सरकारी नौकरी के इंतजार में बैठे उम्मीदवारों के लिए यह बात अहम मानी जा रही है।

मंत्री ने सरकार की मंजूर की हुई मांगों का मसौदा रोहित पवार को सौंपा। रोहित पवार ने वह मसौदा आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों को पढ़कर सुनाया। लेकिन सामने आया कि मसौदे में एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे को लेकर कोई साफ जिक्र नहीं है।

इसी पर रोहित पवार ने सवाल उठाया कि विद्यार्थियों की मुख्य मांग तो अभी पूरी ही नहीं हुई। उन्होंने एक बार फिर कहा कि अध्यक्ष विवेक भीमनवार का इस्तीफा लिया जाए। यानी सरकार की घोषणाओं के बावजूद आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा जस का तस बना हुआ है।

11 दिनों के इस आंदोलन में तुकाराम मुंढे की नियुक्ति का ऐलान, केस वापस लेने का आश्वासन और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा, ये तीन बड़ी बातें हुई हैं। फिर भी भीमनवार के इस्तीफे की मांग कायम है। अब देखना यह है कि विद्यार्थी सरकार के आश्वासनों से संतुष्ट होते हैं या नहीं और आंदोलन वापस लिया जाता है या नहीं। समाधान की उम्मीद जरूर बनी है, पर विद्यार्थियों की सभी मांगों पर अंतिम फैसला होना अभी बाकी है।

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