शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

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13:33 IST

पुणे के एस. एम. जोशी पुल पर MPSC छात्रों को नोटिस, 12 घंटे में जगह खाली करने को कहा

आंदोलन के प्रतिनिधि प्रमोद दत्तात्रय पाटील को कानूनी नोटिस मिली है। तय वक्त में आंदोलन दूसरी जगह न गया तो मुंबई हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखल होगी।

पुणे के एस. एम. जोशी पुल पर MPSC छात्रों को नोटिस, 12 घंटे में जगह खाली करने को कहा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पुणे के एस. एम. जोशी पुल पर चल रहे MPSC छात्रों के आंदोलन के खिलाफ अब कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है। आंदोलन की जगह फौरन खाली करने के आदेश दिए गए हैं। आंदोलन के प्रतिनिधि प्रमोद दत्तात्रय पाटील को इस बारे में कानूनी नोटिस भेजी गई है, जिसमें अगले 12 घंटे के अंदर एस. एम. जोशी पुल और सड़क को ट्रैफिक के लिए खोलने को कहा गया है।

नोटिस में साफ चेतावनी दी गई है कि अगर दी गई मियाद में आंदोलन किसी दूसरी जगह नहीं ले जाया गया, तो मुंबई हाईकोर्ट में अवमानना याचिका (Contempt of Court) दाखल की जाएगी।

यह नोटिस मुंबई हाईकोर्ट के 7 अक्टूबर 2026 के आदेश पर अमल कराने के लिए दाखिल रिट याचिका के तहत भेजी गई है। पुणे की सार्वजनिक सड़कों और पुलों पर बिना इजाजत चल रहे आंदोलनों से आम नागरिकों और मुसाफिरों को बेवजह परेशानी झेलनी पड़ती है, यही मुद्दा उठाते हुए 6 अक्टूबर को हाईकोर्ट में याचिका डाली गई थी। इस पर अगली सुनवाई 25 नवंबर को होनी है। कोर्ट पहले ही आंदोलनकारियों से कह चुका है कि वे सार्वजनिक जगहें रोकने के बजाय शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से किसी दूसरी जगह पर आंदोलन करें।

नोटिस में दी गई जानकारी के मुताबिक पुणे पुलिस की स्पेशल ब्रांच के उपायुक्त ने 7 अक्टूबर को ही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत एस. एम. जोशी पुल और लडकत चौक पर धरना आंदोलन की इजाजत देने से मना कर दिया था। प्रशासन ने आंदोलनकारियों से यह जगह फौरन खाली करने को कहा था। साथ ही यह भरोसा भी दिया था कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर पुतले के आसपास के इलाके या पुणे जिलाधिकारी कार्यालय जैसी वैकल्पिक जगहों के लिए लिखित अर्जी दी गई तो उस पर सकारात्मक तरीके से विचार किया जाएगा।

नोटिस में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इजाजत नहीं मिलने के बावजूद एस. एम. जोशी पुल और आसपास की सड़कों पर बड़ी तादाद में लोग जमा हुए, जिससे इलाके का ट्रैफिक पूरी तरह चरमरा गया। नोटिस के मुताबिक आंदोलनकारियों की ओर से रात 2 से 3 बजे तक तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाया गया, इमरजेंसी सेवा की एम्बुलेंस को रोककर उनकी जांच की गई और पुणे बंद समेत शहर का ट्रैफिक रोकने की अपील भी की गई।

इसी वजह से नोटिस की मुख्य मांग यह है कि एस. एम. जोशी पुल फौरन खाली किया जाए, आधिकारिक इजाजत लेकर आंदोलन किसी दूसरी जगह ले जाया जाए और एम्बुलेंस जैसी इमरजेंसी गाड़ियों के रास्ते में कोई रुकावट न डाली जाए। तय 12 घंटे में कदम न उठाए गए तो हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखल की जाएगी। नोटिस में यह भी साफ किया गया है कि इस कार्रवाई का मकसद छात्रों की मांगों या आंदोलन का अनादर करना नहीं है, बल्कि सिर्फ कोर्ट के आदेश का पालन पक्का करना है।

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