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21:14 IST

तुकाराम मुंढे बोले, FDA से तबादला नहीं हुआ; MPSC जांच समिति के सचिव भी बने

आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वे अब भी महाराष्ट्र FDA के आयुक्त हैं। उन्हें MPSC पेपरफुटी मामले की जांच समिति का सचिव भी बनाया गया है।

तुकाराम मुंढे बोले, FDA से तबादला नहीं हुआ; MPSC जांच समिति के सचिव भी बने तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके साफ किया है कि वे अन्न व औषध प्रशासन (FDA) के आयुक्त पद पर बने हुए हैं। उनके तबादले को लेकर जो बातें चल रही थीं, उन पर उन्होंने खुद विराम लगा दिया। पोस्ट 12 अक्टूबर 2026 की है।

दरअसल महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) के पेपर लीक मामले की जांच के लिए बनी समिति के सचिव पद पर मुंढे की नियुक्ति की खबर आई थी। इसके बाद FDA में उनकी जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठने लगे थे। इन्हीं सवालों के बीच मुंढे ने अपनी बात रखी।

अपनी पोस्ट में मुंढे ने लिखा, "मेरा FDA से तबादला नहीं हुआ है। मैं अन्न व औषध प्रशासन, महाराष्ट्र में आयुक्त के तौर पर काम कर रहा हूं। मिलावटी खाने और घटिया दवाओं के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी है।"

मुंढे अपने कड़क अनुशासन के लिए जाने जाते हैं। दशहरा और दिवाली के मौसम में मिठाई, खाने का तेल, दूध और दूसरे खाने-पीने के सामान की मांग बढ़ जाती है। ऐसे वक्त में मिलावट के खिलाफ कार्रवाई की अहमियत बढ़ जाती है, और मुंढे के पद पर बने रहने से लोगों की अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं।

अब बात MPSC मामले की। कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों को लेकर पुणे में विद्यार्थियों ने करीब 11 दिन तक आंदोलन किया था। विद्यार्थी MPSC के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे और उन्होंने आंदोलन तेज कर दिया था।

जानकारी के मुताबिक 12 अक्टूबर को आधी रात के आसपास मंत्री शिवेंद्रराजे की मध्यस्थता के बाद आंदोलन वापस ले लिया गया। इसके बाद राज्य सरकार ने इस मामले की गड़बड़ियों की जांच के लिए समिति बनाई, जिसके सचिव पद पर तुकाराम मुंढे को नियुक्त किया गया है।

समिति में कुल पांच सदस्य हैं। बी डी नाईक अध्यक्ष हैं और तुकाराम मुंढे सचिव। गणेश पाटील सदस्य हैं, लखमी गौतम पुलिस अधिकारी के तौर पर शामिल हैं और दिलीप भोसले हाई कोर्ट के पूर्व जज हैं। यह समिति MPSC प्रकरण में कथित गड़बड़ी की जांच करेगी।

अब परीक्षार्थियों की नजर इस पर है कि उनकी शिकायतों और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच कैसे होती है। जांच का निष्कर्ष क्या निकलता है और उसके बाद सरकार क्या कदम उठाती है, यह भी अहम रहेगा। उधर आने वाले त्योहारों में FDA मिलावट करने वालों के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाता है, इस पर भी पूरे राज्य की नजर रहेगी। सुरक्षित खाने की गारंटी सिर्फ एक अधिकारी की नियुक्ति पर टिकी नहीं है। नियमित जांच, सैंपल टेस्ट और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है।

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