शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद नागपुर ZP चुनाव की राह खुली, कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद नागपुर ZP चुनाव की राह खुली, कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

नागपुर समेत विदर्भ की जिला परिषदों और पंचायत समितियों के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा जल्द होने की उम्मीद है।

महाराष्ट्र की 20 जिला परिषदों और 211 पंचायत समितियों के लंबित चुनावों को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिल गई है। इसके बाद नागपुर समेत विदर्भ की सभी जिला परिषदों और पंचायत समितियों के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा जल्द होने की उम्मीद है। कोर्ट ने 50 फीसदी आरक्षण सीमा के भीतर रहकर चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं।

इस खबर से नागपुर जिले में सभी पार्टियों के कार्यकर्ताओं में उत्साह है। स्नातक चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद कांग्रेस खेमे में खास जोश दिख रहा है। नागपुर जिला परिषद में कांग्रेस के पास पूर्ण बहुमत था। जनवरी 2025 में कार्यकाल पूरा होने के बाद ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर मामला अदालत में चल रहा था, इसी वजह से चुनाव अटके हुए थे। नागपुर ZP में पिछले 21 महीने से प्रशासक राज चल रहा है। बीते साल 17 जनवरी को राज्य की 5 जिला परिषदों का कार्यकाल खत्म हुआ था, और अब उन सभी में चुनाव का रास्ता खुलता दिख रहा है। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग चुनाव की घोषणा कब करता है।

यह चुनाव जिला परिषद में सत्ता में रही कांग्रेस और विपक्ष में बैठी भाजपा, दोनों के लिए चुनौती भरा होगा। दोनों तरफ के बड़े नेताओं के लिए यह प्रतिष्ठा का सवाल भी होगा। जिले के दिग्गज कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सुनील केदार ने अपनी रणनीति से कई चुनावों में भाजपा को मात दी है। लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपना उम्मीदवार जिताया था। जिला परिषद में उनके गुट की एकतरफा सत्ता रही और विपक्ष में बैठी भाजपा काफी कमजोर थी।

57 सीटों वाली जिला परिषद में कांग्रेस के 32 और राकां के 8 यानी महाविकास आघाड़ी के 40 सदस्य थे। भाजपा के केवल 14 सदस्य चुनकर आए थे। शिवसेना, शेकाप, गोंगपा और निर्दलीय के 1-1 सदस्य थे।

विधानसभा चुनाव के बाद कमजोर रही भाजपा की जिले में वजनदारी बढ़ गई। सुनील केदार की पत्नी अनुजा केदार की विधानसभा चुनाव में हार से उनके समर्थकों में निराशा थी। राकां शरद पवार गुट के अनिल देशमुख के गढ़ में उनके बेटे सलिल देशमुख की हार से उनके समर्थकों में खलबली मच गई थी। लेकिन स्नातक चुनाव में कांग्रेस और महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार अभिजीत वंजारी की जीत ने इस खेमे में उत्साह भर दिया है।

इस हार के बाद ZP चुनाव जीतने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और राज्य मंत्री आशीष जायसवाल पूरा जोर लगाकर जिला परिषद हथियाने की कोशिश करेंगे। एक तरफ कांग्रेस और राकां के सामने सत्ता में वापसी की चुनौती होगी, तो दूसरी तरफ भाजपा के सामने सत्ता पर कब्जा जमाने की।

अध्यक्ष पद के आरक्षण की लॉटरी पहले निकलेगी। चुनाव से 6 महीने पहले ग्राम विकास विभाग को जिला परिषद अध्यक्ष पद की आरक्षण लॉटरी निकालनी जरूरी होती है। उसके बाद आपत्तियां मंगाई जाती हैं और प्रक्रिया पूरी होने पर ही चुनाव की घोषणा होती है। वर्ष 2019 में नागपुर ZP में अध्यक्ष पद एससी महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुआ था। ढाई साल रश्मि बर्वे और उनके बाद मुक्ता कोकडे को केदार ने यह जिम्मेदारी सौंपी थी।

50 फीसदी महिला आरक्षण होने से पिछली बार जो सर्कल ओपन वर्ग में था, वह अब महिलाओं के लिए आरक्षित होगा। मौजूदा महिला सदस्यों को दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा या नहीं, इस पर भी सबकी नजर रहेगी। फिलहाल सबको इंतजार है कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कब होती है।

पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष कुंदा राऊत ने कहा कि स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव की तरह जिला परिषद और पंचायत समितियों का चुनाव भी चुनाव आयोग को बैलेट पेपर से कराना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि सत्ताधारी पार्टी की गलत नीतियों की वजह से किसान और ग्रामीण जनता परेशान है। उनके मुताबिक जनता में सत्ताधारियों के प्रति भारी नाराजगी है, जिसका फायदा कांग्रेस और महाविकास आघाड़ी के दलों को मिलेगा। राऊत ने यह भी दावा किया कि चुनाव हुए तो जिला परिषद में कांग्रेस पूर्ण बहुमत से दोबारा वापसी करेगी।

#नागपुर#सियासत#PT24#Politics#Nagpur

विज्ञापन

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे