चामोर्शी में एमआईडीसी के लिए 2,096 हेक्टेयर जमीन पर किसान अड़े, येनापूर में धरना शुरू
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
चामोर्शी तालुका में प्रस्तावित एमआईडीसी के फेज नंबर 2 और 5 की 2,096 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण प्रस्ताव रद्द कराने के लिए 13 गांवों के किसान येनापूर के मंडल अधिकारी कार्यालय के सामने धरने पर बैठे हैं।
गडचिरोली जिले के चामोर्शी तालुका में प्रस्तावित एमआईडीसी के लिए होने वाले जमीन अधिग्रहण के खिलाफ किसान और गांव वाले सड़क पर उतर आए हैं। गुरुवार से येनापूर के मंडल अधिकारी कार्यालय के सामने किसानों ने धरना शुरू कर दिया है। उनकी मुख्य मांग है कि फेज नंबर 2 और 5 की कुल 2,096 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण का प्रस्ताव रद्द किया जाए।
आंदोलन करने वालों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें मान नहीं ली जातीं, वे धरना खत्म नहीं करेंगे। किसानों की जमीन, उनकी रोजी-रोटी और आगे का भविष्य अब सवालों के घेरे में है। इस धरने की वजह से चामोर्शी तालुका में एमआईडीसी के लिए जमीन लेने का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है।
येनापूर और जयरामपूर इलाके समेत 13 गांवों के किसान, जमीन के मालिक और गांव वाले इस मसले पर एक साथ आ गए हैं। वे अपने हक के लिए लोकतांत्रिक तरीके से लड़ाई लड़ रहे हैं। प्रस्तावित एमआईडीसी परियोजना के फेज नंबर 2 में 492 हेक्टेयर और फेज नंबर 5 में 1,604 हेक्टेयर जमीन आती है। यानी कुल 2,096 हेक्टेयर इलाके का अधिग्रहण प्रस्ताव रद्द करके यह क्षेत्र परियोजना से बाहर रखा जाए, यह आंदोलनकारियों की पक्की मांग है।
गांवों में ज्यादातर परिवारों का गुजारा खेती से चलता है। पीढ़ियों से जो जमीन वे जोतते आ रहे हैं, वह चली गई तो परिवारों के सामने रोजी का गंभीर सवाल खड़ा हो सकता है। प्रभावित किसानों का कहना है कि औद्योगिक विकास के नाम पर उनके भविष्य पर संकट नहीं आना चाहिए। आंदोलनकारियों के मुताबिक उन्हें विकास से दिक्कत नहीं है, एतराज इस बात पर है कि किसानों के हक को अनदेखा करके जमीन ली जा रही है। उनकी अपील है कि सरकार किसानों की आपत्तियों को गंभीरता से ले और प्रस्तावित अधिग्रहण पर दोबारा विचार करे।
धरने की मांगों में अधिग्रहण प्रस्ताव रद्द करना, संबंधित अधिसूचना पर पुनर्विचार करना और किसानों की मांगों पर लिखित फैसला देना शामिल है। किसानों का कहना है कि यह मामला सिर्फ जमीन का नहीं है, यह उनके गुजारे, परिवार की सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है। अब सबकी नजर इस पर है कि प्रशासन 13 गांवों के किसानों के इस आंदोलन को कितनी गंभीरता से लेता है और सरकार अधिग्रहण को लेकर क्या रुख अपनाती है।
आंदोलनकारियों ने एक और आरोप लगाया है। उनके मुताबिक मुधोली चक नंबर 1 के किसानों ने अधिग्रहण के लिए सहमति नहीं दी है, फिर भी उन जमीनों की प्रक्रिया में आगे की कार्रवाई की जा रही है। सहमति से समझौता हो चुका है, यह मानकर नोटिस देने की कार्रवाई कर दी गई। किसानों ने इस प्रक्रिया पर एतराज जताते हुए संबंधित राजपत्र की अधिसूचना रद्द करने की मांग की है। बताया गया कि 29 सितंबर 2026 के पत्र का हवाला देकर भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। किसानों की मांग है कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच हो, उनकी शिकायतें दूर की जाएं और उन्हें इंसाफ मिले।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।