सूखे से परेशान चंद्रपुर के मछुआरों के लिए मुनगंटीवार ने मांगी आर्थिक मदद
विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने मुख्यमंत्री और मत्स्यव्यवसाय मंत्री को पत्र लिखकर मछुआरों के लिए आर्थिक मदद और तालाबों का भाड़ा माफ करने की मांग की है।
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चंद्रपुर जिले में सूखे जैसे हालात का असर सिर्फ खेती तक नहीं रहा है। मछली पालन पर निर्भर हजारों परिवार भी इसकी मार झेल रहे हैं। विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने इसी को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मत्स्यव्यवसाय मंत्री नितेश राणे को पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने सूखे से प्रभावित मछुआरों को आर्थिक मदद देने की मांग रखी है।
पत्र में बताया गया है कि इस साल चंद्रपुर जिले में बारिश कम हुई। इसकी वजह से कई तालाबों में पानी का स्टॉक घट गया है। पत्र के मुताबिक इससे मत्स्यसंवर्धन पर असर पड़ा है। मुनगंटीवार का कहना है कि पानी काफी कम हो जाने से मछलियों का पालन और उत्पादन ठप पड़ गया है। मछुआरा सहकारी संस्थाएं और उनके रजिस्टर्ड सदस्य गंभीर आर्थिक संकट में आ गए हैं।
पत्र में यह भी लिखा है कि स्थानीय मछुआरा सहकारी संस्थाओं ने ये तालाब भाड़े पर लिए थे। उन्होंने तालाबों में मछली के बीज यानी मत्स्यबीज डालने और मछलियों के पालन-पोषण पर बड़ी रकम लगाई थी। लेकिन सीजन के बीच में ही तालाबों का पानी सूख गया। अब मछली के बीज की खरीद, खाद्य और तालाब के भाड़े पर किया गया खर्च निकालना भी संस्थाओं के लिए मुमकिन नहीं रहा। आमदनी घटने से मछुआरों के सामने पूरे साल की रोजी-रोटी का सवाल खड़ा हो गया है।
मुनगंटीवार ने सरकार से प्रभावित तालाबों का इस साल का भाड़ा पूरी तरह माफ करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने खास आर्थिक मदद मंजूर करने को कहा है। उनका कहना है कि मछुआरों की लगाई हुई रकम बेकार नहीं जानी चाहिए।
पत्र में मुनगंटीवार ने सरकार का ध्यान इस ओर भी खींचा है कि मत्स्यव्यवसाय करने वालों को सरकार ने किसान का दर्जा दिया है। इसलिए उनके मुताबिक प्राकृतिक आपदा में नुकसान झेलने वाले मछुआरों को भी किसानों की तरह आर्थिक मदद और जरूरी रियायतें पाने का पूरा हक है।
उन्होंने पत्र में साफ लिखा है कि जलसंपदा और राजस्व विभाग प्रभावित तालाबों का तुरंत वस्तुनिष्ठ सर्वे करें और नुकसान का आकलन करें। मछली के बीज की खरीद और मत्स्यसंवर्धन पर हुए खर्च तथा घटी हुई आमदनी को देखते हुए प्रभावित संस्थाओं और सदस्यों को सीधे आर्थिक सानुग्रह अनुदान दिया जाए। सूखे की हालत को देखते हुए इस साल का तालाब भाड़ा पूरी तरह माफ कर इस फैसले पर जल्द अमल किया जाए, यह भी उनकी मांग है।
मुनगंटीवार ने कहा है कि प्राकृतिक संकट की वजह से मछुआरों की साल भर की मेहनत और पूंजी खतरे में पड़ गई है। ऐसे में उन्हें सिर्फ आश्वासनों पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए, बल्कि सीधी आर्थिक मदद का ठोस सहारा मिलना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मत्स्यव्यवसायियों की आर्थिक स्थिति किसानों की तरह टिकी रहे और यह कारोबार फिर से खड़ा हो सके, इसके लिए वे इस मुद्दे को सरकार के दरबार में अंजाम तक पहुंचाने में मजबूती से साथ खड़े हैं।