अकोला में सूखे से निपटने की तैयारी, पानी, चारे और जंगल के जानवरों के लिए इंतज़ाम शुरू
अकोला जिला प्रशासन ने कम बारिश से पैदा हुए सूखे के हालात में पानी, चारे और राहत कामों की योजना तैयार की है। कलेक्टर दफ्तर में 24 बाय 7 वॉर रूम शुरू हो गया है।
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इस साल बारिश कम हुई है और इसकी वजह से हर तरफ सूखे के हालात बन गए हैं। इस सूखे की मार सभी को झेलनी पड़ेगी। ऐसे में जिला प्रशासन जल संरक्षण, कृषि विकास और गांवों के बुनियादी ढांचे जैसे कामों के जरिए सूखे से निपटने के उपाय कर रहा है। अकोला जिला प्रशासन भी तैयार है।
व्हीबीजी, जीरामजी के तहत तालाबों को गहरा करना, नालों को गहरा करना, खेत तालाब, सिंचाई के कुएं, बांध बनाना, तालाबों से गाद निकालना, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और पेड़ लगाने जैसे काम हाथ में लिए जा रहे हैं।
सूखे को देखते हुए पानी की सप्लाई, चारे की उपलब्धता और तय विकास कामों की योजना बनाई जा रही है। सूखे में किन कामों को पहले करना है, इस बारे में सरकार ने जो निर्देश दिए थे, उनके हिसाब से योजना पूरी हो चुकी है। पानी का इंतज़ाम करने के साथ पानी बचाने पर भी जोर है और इसके लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। सूखे के दौरान लोगों की दिक्कतें समय रहते दूर करने के लिए कलेक्टर दफ्तर में 24 बाय 7 वॉर रूम शुरू किया गया है।
नागरिकों के लिए 8065909844 यह संपर्क नंबर दिया गया है। इसके अलावा सभी संबंधित विभागों की मौजूदगी में हर मंगलवार शाम 5 बजे पूरे जिले के हालात की समीक्षा की जाएगी।
जिले में बड़ा वनक्षेत्र है। उप वन संरक्षक सुमंत सोलंके ने बताया कि सूखे में जंगली जानवरों के लिए जंगल के प्राकृतिक पानी के ठिकानों के साथ-साथ मौजूद पानी के स्रोत जरूरत के हिसाब से विकसित किए जाएंगे।
आने वाले महीनों में पानी की किल्लत तेज होने की आशंका है। इसे देखते हुए अकोला शहर की पानी सप्लाई के लिए मोर्णा से महान तक 27 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन डाली जा रही है। नगर निगम आयुक्त सुनील लहाने ने बताया कि इसके जरिए मोर्णा परियोजना का पानी महान परियोजना में छोड़ा जाएगा और लोगों की प्यास बुझाई जाएगी।
मवेशियों के लिए चारा बना रहे, इसके लिए चारा विकास कार्यक्रम को रफ्तार दी गई है। इसके तहत 2 हजार 500 किसानों को बीज बांटे जाएंगे। साथ ही जिले के बाहर के जानवरों के चरने पर रोक लगा दी गई है। चारे को जिले से बाहर ले जाने और बेचने पर भी पाबंदी लगाई गई है।
सूखे के हालात में जिले के जरूरी जनहित के कामों के लिए जिला नियोजन समिति का फंड इस्तेमाल किया जाएगा। इससे पानी सप्लाई, जल संरक्षण और दूसरे जरूरी सूखा राहत कामों के लिए पैसे का रास्ता खुल गया है। आगे पानी और चारे की किल्लत और बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने फौरी उपायों के साथ लंबे समय की योजना पर भी जोर दिया है।