सातारा जिला बैंक चुनाव में भाजपा 9 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी, राष्ट्रवादी को 8 सीटें
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
21 सीटों के नतीजे आ गए हैं। भाजपा को 9, राष्ट्रवादी कांग्रेस को 8 और शिवसेना को 4 सीटें मिली हैं।
सातारा जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव का नतीजा आखिरकार साफ हो गया है। कुल 21 सीटों में से भाजपा को 9 सीटें मिली हैं और वह सबसे बड़ी पार्टी बनी है। राष्ट्रवादी कांग्रेस के हिस्से में 8 और शिवसेना के हिस्से में 4 सीटें आईं। भाजपा और शिवसेना महायुति के घटक दल हैं और दोनों को मिलाकर बैंक में 13 संचालक पहुंचे हैं। राष्ट्रवादी को 8 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा।
सातारा शहर के जरंडेश्वर नाका में नागरी सहकारी बैंक असोसिएशन के मतगणना केंद्र पर कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच वोटों की गिनती हुई। नतीजे आते ही जीते हुए उम्मीदवारों के समर्थकों ने गुलाल उड़ाया, पटाखे फोड़े और नारेबाजी की। कई जगह नतीजे उम्मीद के उलट रहे, जिससे सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई।
सबसे ज्यादा नजर पाटण तहसील की लड़ाई पर रही। प्रभारी मंत्री शंभूराज देसाई ने भाजपा के सत्यजितसिंह पाटणकर को 12 वोट से हराया। देसाई को 58 और पाटणकर को 46 वोट मिले। पिछले चुनाव में देसाई 14 वोट से हारे थे और इस बार उन्होंने उसका हिसाब बराबर कर दिया। पाटण के इस निर्वाचन क्षेत्र में देसाई गुट को 42 साल बाद जीत मिली है।
माण तहसील में ग्रामीण विकास मंत्री जयकुमार गोरे 53 वोट लेकर बड़े अंतर से जीते। राष्ट्रवादी के मनोज पोळ को 14 और शिवसेना के शेखर गोरे को 7 वोट मिले। फलटण में संजीवराजे नाईक निंबाळकर ने सोसायटी निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की। उन्होंने पूर्व सांसद रणजितसिंह नाईक निंबाळकर के भाई समशेरसिंह नाईक निंबाळकर को हराया। इस मुकाबले से फलटण में नाईक निंबाळकर परिवार की आपसी सियासी खींचतान फिर चर्चा में आ गई है।
कोरेगांव में राष्ट्रवादी के सुनील माने और भाजपा के सुनील खत्री के बीच कांटे की टक्कर रही। एक मतपत्र पर आपत्ति उठाई गई और उसे रद्द कर दिया गया। इसके बाद दोनों उम्मीदवारों के 44-44 वोट रह गए। फिर पर्ची निकालकर फैसला किया गया, जो सुनील माने के पक्ष में गया और उन्हें विजेता घोषित किया गया। इस दौरान दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई, जिससे कुछ देर तनाव रहा।
कराड में दिवंगत पूर्व मंत्री विलासकाका उंडाळकर के बेटे उदयसिंह पाटील-उंडाळकर ने 100 वोट लेकर धनाजी पाटील को भारी अंतर से हराया। सावली में भाजपा के ज्ञानदेव रांजणे को 38 वोट मिले और उन्होंने राष्ट्रवादी के विठ्ठल गोळे को हराया, जिन्हें 8 वोट मिले। खंडाळा में राष्ट्रवादी के अजय भोसले ने 28 वोट लेकर भाजपा के संजीव गाढवे को 7 वोट से हराया।
महाबलेश्वर में राष्ट्रवादी की रूपाली राजपुरे ने 8 वोट लेकर शिवसेना के संजय मोरे को 4 वोट से हराया। औद्योगिक बुनकर निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के चंद्रकांत जाधव 19 वोट लेकर जीते। अनुसूचित जाति-जनजाति निर्वाचन क्षेत्र से शिवसेना के दीपक प्रल्हाद चव्हाण को 618 वोट मिले। घुमंतू-विमुक्त जनजाति निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के अर्जुन काळे ने 349 वोट लेकर निर्दलीय सुनील वाघ को हराया, जिन्हें 284 वोट मिले।
पार्टी के हिसाब से तस्वीर देखें तो चुनाव से पहले भाजपा के 5, राष्ट्रवादी के 3 और शिवसेना का 1 उम्मीदवार निर्विरोध चुना जा चुका था। बाकी सीटों के मुकाबलों में भाजपा ने 4, राष्ट्रवादी ने 5 और शिवसेना ने 3 सीटें जीतीं। भाजपा भले 9 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन बैंक की सत्ता का गणित अब महायुति की एकजुटता पर टिका रहेगा। महायुति के पास 13 का संख्याबल है, फिर भी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अहम समितियों पर कब्जे के लिए नेताओं के बीच के अंदरूनी सियासी समीकरण फैसला करेंगे।
जयकुमार गोरे, शंभूराज देसाई, उदयसिंह उंडाळकर और संजीवराजे नाईक निंबाळकर ने अपने-अपने इलाकों में अपनी ताकत दिखाई। राष्ट्रवादी ने 8 सीटें जीतकर अपनी मौजूदगी बनाए रखी। अब देखना यह है कि भाजपा की बड़ी पार्टी वाली भूमिका को शिवसेना का कितना साथ मिलता है और विपक्ष में बैठकर राष्ट्रवादी कितना असर डालती है। जिला बैंक की आगे की सियासत इन्हीं बातों पर निर्भर करेगी।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।