मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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सातारा जिला बैंक चुनाव: जावली में ज्ञानदेव रांजणे ने विट्ठल गोले को 30 वोट से हराया

सातारा जिला बैंक चुनाव: जावली में ज्ञानदेव रांजणे ने विट्ठल गोले को 30 वोट से हराया तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

सोसायटी निर्वाचन क्षेत्र में रांजणे को 47 में से 38 वोट मिले, गोले को 8। नतीजे के बाद शशिकांत शिंदे की गैरहाजिरी जावली में चर्चा में है।

सातारा जिला बैंक के सोसायटी निर्वाचन क्षेत्र में ज्ञानदेव रांजणे ने बड़ी जीत दर्ज की है। उनका मुकाबला विट्ठल गोले से था और उन्होंने गोले को पूरे 30 वोट के अंतर से हराया। रांजणे मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले के निष्ठावान माने जाते हैं।

जिला बैंक के संचालक ज्ञानदेव रांजणे की राजनीति की शुरुआत मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले के मार्गदर्शन में हुई थी। दूसरी तरफ विट्ठल गोले को प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे का निष्ठावान माना जाता है। इस सीट पर रांजणे और गोले के बीच सीधा मुकाबला था।

रांजणे को इस बार जिला बैंक के लिए दूसरी बार उम्मीदवारी मिली थी। पूरे चुनाव का माइक्रो प्लानिंग उन्होंने मंत्री भोसले के मार्गदर्शन में किया। इसी माइक्रो प्लानिंग की वजह से आज के नतीजे में उन्हें 47 में से 38 वोट मिले, जबकि गोले के हिस्से में 8 वोट आए। मालचौडी सोसायटी के मतदाता नाम में बदलाव की वजह से वोट नहीं डाल सके।

चुनाव से पहले यह माना जा रहा था कि प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे खुद रांजणे के खिलाफ मैदान में उतरेंगे। लेकिन ऐन वक्त पर शिंदे ने अपने निष्ठावान समर्थक और माथाडी कामगार यूनियन के महासचिव विट्ठल गोले को उम्मीदवार बना दिया। गोले ने भी अपने नेता का आदेश मानकर, सिर्फ निष्ठा की वजह से चुनाव में कदम रखा। नतीजा एकतरफा रहा।

सातारा जिला परिषद चुनाव में कुसुंबी गुट से रांजणे की पत्नी अर्चना रांजणे हार गई थीं। उसके बाद कई लोगों ने दावा किया था कि इस गुट में उनकी राजनीतिक ताकत ज्यादा है। अब सामने आया है कि वह सिर्फ सूजन थी। गणपति उत्सव में आरती में हाजिरी लगाकर खुद को नेता बताने वाले लोग सोसायटी का एक साधारण प्रस्ताव भी नहीं ले पाए।

जीत के बाद रांजणे के समर्थकों ने जावली तालुका में गुलाल उड़ाया और आतिशबाजी करके जश्न मनाया।

शशिकांत शिंदे की गैरहाजिरी भी अब चर्चा का मुद्दा बन गई है। उनके गुट के कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि अपने समर्थक को उतारने के बाद शिंदे मतदान के दिन मौजूद रहेंगे और समर्थकों का हौसला बढ़ाएंगे। बताया जा रहा है कि वे मतदान के लिए आए ही नहीं और उन्होंने खुद भी वोट नहीं डाला। निष्ठावान समर्थक मैदान में हो तो कार्यकर्ताओं के लिए नेता की मौजूदगी मायने रखती है। इसीलिए जावली के राजनीतिक हलकों में शिंदे की गैरहाजिरी को लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं।

रांजणे की जीत में युवा कार्यकर्ताओं की भी भूमिका रही। सोसायटी के प्रस्ताव लेने से लेकर मतदाताओं को मतदान प्रक्रिया तक संभालने की जिम्मेदारी सागर धनावडे, जयदीप शिंदे और समीर अत्तार को सौंपी गई थी। मतदाताओं को सैर पर भेजने को लेकर विरोधी हल्ला मचा रहे थे, लेकिन यह चुनाव प्रक्रिया का ही एक हिस्सा था। करीब ढाई महीने तक सैर पर ले जाए गए इन मतदाताओं का परिवार की तरह ख्याल रखने का काम रांजणे के इन साथियों ने ईमानदारी से किया। इस मजबूत साथ से रांजणे की जीत की राह और आसान हो गई।

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