मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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बारिश 70 फीसदी कम, ठेकेदारों और कर्मचारियों का बकाया बाकी; दिवाली पर सवाल

बारिश 70 फीसदी कम, ठेकेदारों और कर्मचारियों का बकाया बाकी; दिवाली पर सवाल तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

प्रा. अशोक डोईफोडे के मुताबिक कम बारिश, बकाया और वेतन आयोग में देरी से किसान, ठेकेदार, एस टी कर्मचारी और पेंशनर परेशान हैं।

प्रा. अशोक डोईफोडे के मुताबिक राज्य में मौसम विभाग ने पहले से जो वैज्ञानिकों की रिपोर्ट जारी की थी, वह बिल्कुल सही निकली। उनका कहना है कि मुंबई, पुणे और नाशिक को छोड़कर बाकी राज्य में मानसून की बारिश 70 फीसदी कम हुई है और इससे अभूतपूर्व संकट खड़ा हो गया है। उनके शब्दों में करोड़ों किसान मुश्किल में हैं, किसानों की आत्महत्याएं बढ़ रही हैं, जो बेहद चिंता की बात है, और 2026 का बरसात का मौसम गायब हो गया है।

डोईफोडे बताते हैं कि शुरुआत में विपक्ष और अलग-अलग पार्टियों के नेताओं ने सरकार से संकट में फंसे किसानों को हेक्टेयर पीछे 50 हजार से एक लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की जायज मांग की थी। आखिर में राज्य सरकार ने किसानों को सिर्फ पांच हजार रुपये की मदद का ऐलान किया। डोईफोडे इसे किसानों के जख्म पर नमक छिड़कने की कोशिश बताते हैं और कहते हैं कि "ऊंट के मुंह में जीरा" जैसी यह मदद है। उनके मुताबिक विपक्ष और नेता इसके बाद कैसे शांत हो गए, यह एक पहेली ही है।

सरकारी ठेकेदारों का मामला भी उन्होंने उठाया है। डोईफोडे के अनुसार ठेकेदारों के 96 हजार करोड़ रुपये राज्य सरकार के पास बाकी हैं और इसी वजह से ठेकेदारों की आत्महत्याएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने इसे गंभीर बात कहा। साथ ही उनका कहना है कि देश में सबसे ज्यादा 35 हजार 150 करोड़ रुपये का जीएसटी केंद्र को देने वाले राज्य के लिए यह शोभा नहीं देता।

एस टी यानी महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल के 86 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों के हक के 7500 करोड़ रुपये भी राज्य सरकार के पास बाकी बताए गए हैं।

वेतन आयोग को लेकर डोईफोडे ने कुछ आंकड़े दिए हैं। राज्य सरकारी कर्मचारियों की संख्या 17 लाख है और पेंशनधारकों की करीब 7 लाख। देश में केंद्र सरकार के 50 लाख कर्मचारी और 69 लाख पेंशनधारक हैं। केंद्र सरकार हर 10 साल बाद सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन का पुनर्गठन करती है, और पहला वेतन आयोग 1946 में बना था। 8वें वेतन आयोग की सिर्फ घोषणा जनवरी 2025 में हुई, पर आयोग के गठन में काफी देर की गई। डोईफोडे के मुताबिक असल में जनवरी 2026 के नए साल में वेतन आयोग की सिफारिशें लागू हो जानी चाहिए थीं, लेकिन केंद्र सरकार की उदासीन नीति की वजह से केंद्र और राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारकों को दिवाली अंधेरे में मनानी पड़ रही है।

उनकी मांग है कि वेतन आयोग की सिफारिशें केंद्र की तरह राज्य में भी लागू हों और केंद्र इसके लिए फंड दे। डोईफोडे का कहना है कि राज्य में डबल इंजन सरकार होने के बावजूद राज्य सरकार ने राज्य के कर्मचारियों और पेंशनधारकों को केंद्र के कर्मचारियों जैसा न्याय कभी नहीं दिया। उनके अनुसार 6वें और 7वें वेतन आयोग का फायदा राज्य ने 3 साल की देरी से दिया और बकाया केंद्र की तरह एकमुश्त नकद देने के बजाय बिना ब्याज के 5 बराबर किस्तों में बांट दिया। उन्होंने इसे राज्य कर्मचारियों के साथ छलावा कहा। अब राज्य इसे दोहराने से बचे और न्याय करे, यह मांग है।

महंगाई भत्ते पर भी सवाल है। केंद्र सरकार ने मौजूदा महंगाई भत्ता हाल ही में 63 फीसदी घोषित किया है, पर दिवाली के वक्त भी राज्य सरकार ने जुलाई 2026 का महंगाई भत्ता घोषित नहीं किया। इससे बढ़ती महंगाई में आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। यह बात राज्य आदर्श शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित प्रा. विजय राठी ने कही। उनका आरोप है कि सिर्फ चुनाव जीतने के लिए सरकारी तिजोरी में पैसा है, पर किसान, मेहनतकश, ठेकेदार और कर्मचारियों को उनका हक देने के लिए तिजोरी खाली है। राठी ने मांग की है कि राज्य सरकार राजधर्म का पालन करे।

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