सोम‌वार, 19 अक्टूबर 2026

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23:24 IST

प्रकृति को नुकसान पहुंचाकर विकास नहीं: बावधन में डॉ. नीरज हातेकर, डीजे छोड़ने वाले 25 मंडलों का सम्मान

वाई के बावधन में ग्रामपंचायत के कार्यक्रम में अर्थशास्त्री डॉ. नीरज हातेकर ने कहा कि विकास में पर्यावरण और स्थानीय लोगों का हित भी गिना जाना चाहिए।

प्रकृति को नुकसान पहुंचाकर विकास नहीं: बावधन में डॉ. नीरज हातेकर, डीजे छोड़ने वाले 25 मंडलों का सम्मान तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

चौड़ी सड़कें और चमकदार इन्फ्रास्ट्रक्चर बन जाने भर से विकास हो गया, ऐसा नहीं माना जा सकता। यह बात जाने-माने अर्थशास्त्री डॉ. नीरज हातेकर ने वाई के बावधन में कही। उनके मुताबिक आम आदमी को रोजगार, अच्छी स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी सुविधाएं मिलना भी उतना ही जरूरी है। अगर विकास के चक्कर में प्रकृति को नुकसान हो रहा है और स्थानीय लोगों के हित की अनदेखी हो रही है, तो इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए।

यह कार्यक्रम बावधन ग्रामपंचायत और मंगलमूर्ति सोशल क्लब ने मिलकर ग्रामपंचायत दफ्तर में रखा था। यह मुख्यमंत्री समृद्ध पंचायतराज अभियान और सेवा संकल्प अभियान के तहत हुआ। इसमें गांव के उन 25 गणेशोत्सव मंडलों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने डीजे और डॉल्बी से दूर रहकर पारंपरिक तरीके से गणेशोत्सव मनाया। पेड़ों को बचाने में योगदान देने वाले तीन वृक्षमित्रों का भी सम्मान हुआ।

डॉ. हातेकर ने कहा कि विकास की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन उसके लिए पर्यावरण को जो कीमत चुकानी पड़ती है, उसे भी ध्यान में रखना होगा। उन्होंने सुरूर-वाई रोड को चौड़ा करने के लिए हो रही पेड़ों की कटाई, बढ़ते तापमान और आगे आ सकने वाली पानी की किल्लत के आपसी रिश्ते को समझने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि बड़े प्रोजेक्ट बनाते समय यह भी सोचना चाहिए कि स्थानीय लोगों की जिंदगी पर उनका क्या असर पड़ता है। समृद्धि महामार्ग का हवाला देते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे प्रोजेक्ट से किसानों की जिंदगी में जिस समृद्धि की उम्मीद थी, क्या वह सचमुच आई?

प्रकृति प्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत डोंगरे ने बावधन इलाके में प्रस्तावित पत्थर खदानों का मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक इन खदानों से उड़ने वाली धूल और उसका पर्यावरण तथा लोगों की सेहत पर पड़ने वाला संभावित असर देखा जाना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि यह मसला सिर्फ बावधन तक सीमित नहीं रहेगा, इसकी आंच वाई इलाके तक भी पहुंच सकती है। आज्ञापत्र में पेड़ों की रक्षा को लेकर जो विचार हैं, उनका हवाला देते हुए उन्होंने पेड़ों की संपदा को संभालकर रखने की अपील की। उदाहरण के तौर पर उन्होंने बताया कि वाई की सब्जी मंडी में पेड़ कटने के बाद विक्रेताओं को अब धूप में धंधा करना पड़ता है।

वाई के पुलिस निरीक्षक प्रदीप सूर्यवंशी ने ध्वनि प्रदूषण से बचकर गणेशोत्सव मनाने के लिए बावधन के लोगों की तारीफ की। उनका कहना था कि त्योहार की खुशी बनाए रखते हुए डीजे और डॉल्बी से दूर रहने का मंडलों का फैसला दूसरों के लिए मिसाल है। उन्होंने अपील की कि गांव यह परंपरा आगे भी जारी रखे।

ग्राम विकास अधिकारी प्रशांत धुमाल ने ग्रामपंचायत की एक पहल की जानकारी दी। इसमें विवाह रजिस्ट्रेशन के मौके पर एक पेड़ लगाया जाता है। उनके अनुसार पेड़ लगाने को परिवार के किसी अहम मौके से जोड़ने का मकसद लोगों की भागीदारी बढ़ाना और पेड़ों की देखभाल की जिम्मेदारी लोगों में बैठाना है।

कार्यक्रम में वृक्षमित्र संजय मदन भोसले, निलेश अरुणराव शिंदे और संजय बालकृष्ण कुंभार को सम्मान चिन्ह और प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया गया। नवयुग गणेश मंडल, अहिल्यादेवी गणेशोत्सव मंडल, अमर गणेशोत्सव मंडल, अजिंक्य गणेशोत्सव मंडल, श्रीराम गणेशोत्सव मंडल, श्री छत्रपति शिवाजी महाराज गणेशोत्सव मंडल, जय हिंद गणेशोत्सव मंडल और मानाचा गणपति गणेश मंडल समेत कुल 25 मंडलों का भी सम्मान हुआ।

इस मौके पर खंड विकास अधिकारी नारायण घोलप, मंगलमूर्ति सोशल क्लब के अध्यक्ष धनंजय भोसले, तंटामुक्त संगठन के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप कदम, मदन भोसले, चंद्रकांत भोसले, सयाजी पिसाळ पाटील, विजयकुमार रासकर, राजेंद्र कदम और बड़ी संख्या में गांव वाले मौजूद थे। अनिल पिसाळ ने प्रस्तावना रखी, केशव कोदे ने संचालन किया और राजेंद्र तरटे ने आभार जताया।

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