ईस्टर्न स्पोर्ट्स क्लब में शिकायत करने वाले सदस्य को नोटिस, एंट्री बंद करने का आरोप
नागपुर के ईस्टर्न स्पोर्ट्स क्लब में कुछ सदस्यों ने मुख्य सचिव और अध्यक्ष पर मनमानी के आरोप लगाए हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर के ईस्टर्न स्पोर्ट्स क्लब में मैनेजमेंट के कामकाज को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। क्लब के कुछ सदस्यों ने मुख्य सचिव और अध्यक्ष पर कथित तौर पर मनमानी करने, शिकायत करने वाले सदस्य को निशाना बनाने और क्लब के नियमों का पालन न करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की अब तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सदस्यों का दावा है कि कथित वित्तीय गड़बड़ियों, चुनाव में देरी, साफ-सफाई और फायर सेफ्टी के मुद्दे उठाने के बाद शिकायत करने वाले सदस्य को शो-कॉज नोटिस थमाया गया और क्लब में उनकी एंट्री बंद कर दी गई। क्लब मैनेजमेंट का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी।
जानकारी के मुताबिक क्लब के एक सदस्य ने कथित अनियमितताओं को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) और संबंधित सरकारी विभागों में शिकायत की थी। आरोप है कि इसके बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी हुआ और क्लब में आने से रोक दिया गया। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि उन पर अलग-अलग आरोप लगाकर दबाव बनाने की कोशिश हो रही है। बताया जा रहा है कि ये सदस्य लोहे के कारोबार से जुड़े एक प्रतिष्ठित व्यापारी हैं।
सवाल यह उठ रहा है कि सदस्य के खिलाफ कार्रवाई क्लब के नियमों के मुताबिक हुई या शिकायत वापस लेने के लिए दबाव डाला जा रहा है। इसका जवाब संबंधित दस्तावेजों और मैनेजमेंट के स्पष्टीकरण से ही मिलेगा।
चुनाव को लेकर भी विवाद है। शिकायत करने वाले सदस्यों के अनुसार क्लब के उपनियमों में हर दो साल में चुनाव कराने का प्रावधान है, लेकिन कथित तौर पर पिछले चार साल से चुनाव नहीं हुए। उनका आरोप है कि इससे मौजूदा पदाधिकारियों के कामकाज और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं। देरी की वजह और जिम्मेदारी तय करने के लिए उपनियमों, पिछले चुनाव के रिकॉर्ड और मौजूदा मैनेजमेंट की स्थिति की जांच जरूरी बताई गई है।
पैसों के लेन-देन पर भी सदस्यों ने सवाल उठाए हैं। आरोप है कि क्लब में लाखों रुपये की हेराफेरी हुई और मैनेजमेंट अपनी कथित नाकामियां छिपाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि करने वाले लेखा दस्तावेज, ऑडिट रिपोर्ट या दूसरे सबूत फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में आय-व्यय के रिकॉर्ड और ऑडिट रिपोर्ट की निष्पक्ष जांच अहम होगी।
क्लब परिसर की गतिविधियों पर भी सवाल हैं। आरोपों के अनुसार कार्ड रूम में जुआ खेला जाता है, ऑर्केस्ट्रा के दौरान डांस प्रोग्राम होते हैं और बार रूम चलता है। सदस्यों का कहना है कि इनके लिए जरूरी अनुमतियां ली गई हैं या नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए। यह साफ करना जरूरी है कि कार्ड रूम में ताश खेलना अपने आप में जुआ होने का सबूत नहीं है, और बार या मनोरंजन कार्यक्रमों की वैधता लाइसेंस, अनुमतियों और लागू नियमों पर निर्भर करती है।
साफ-सफाई को लेकर भी नाराजगी है। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि परिसर में कई जगह गंदगी का अंबार है और कीड़ों की मौजूदगी है। इस पर नागरिक निकाय और स्वास्थ्य विभाग से निरीक्षण कर मानकों की जांच कराने की जरूरत बताई गई है।
फायर सेफ्टी पर शिकायतकर्ताओं का दावा है कि क्लब के पास नागपुर महानगरपालिका के अग्निशमन विभाग का जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) नहीं है। उनके मुताबिक दो दिन पहले अग्निशमन विभाग की टीम ने क्लब का निरीक्षण किया और उसके बाद नोटिस जारी हुआ। निरीक्षण और नोटिस की असल स्थिति, उसमें दर्ज कमियों और पालन के लिए दी गई समय-सीमा की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
शिकायतकर्ताओं का सबसे गंभीर आरोप यही है कि सरकारी विभागों में शिकायत के बाद सदस्य को नोटिस देकर क्लब में आने से रोका गया, ताकि वे शिकायत वापस ले लें। इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नोटिस किन कारणों से जारी हुआ और एंट्री रोकने का क्या आधार मैनेजमेंट ने बताया, यह भी साफ नहीं है।
इस बीच कुछ सदस्य क्लब मैनेजमेंट के खिलाफ चैरिटी कमिश्नर के सामने शिकायत करने की तैयारी में हैं। इसमें चुनाव प्रक्रिया, कथित वित्तीय अनियमितताओं और मैनेजमेंट के कामकाज की जांच की मांग हो सकती है। औपचारिक शिकायत दाखिल होने पर संबंधित प्राधिकरण दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर विचार कर सकता है।
फिलहाल क्लब के अध्यक्ष और मुख्य सचिव का पक्ष सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं और शिकायत करने वाले सदस्यों की मांगों पर क्या कार्रवाई होती है।