वाई के पश्चिमी गांवों में तेंदुए का डर, पंचायत समिति सभापति ने की पिंजरे-कैमरे की मांग
न्हाळेवाडी पुनर्वसन में बच्चे की मौत के बाद वन विभाग से ठोस कदम उठाने की मांग।
वाई तालुका के कई गांवों में, खासकर पश्चिमी हिस्से में, तेंदुए की बढ़ती आवाजाही लोगों की चिंता की वजह बन गई है। तेंदुआ बार-बार दिख रहा है, इसलिए महिलाओं, किसानों, खेतमजदूरों और छोटे बच्चों में डर का माहौल है।
सातारा इलाके के न्हाळेवाडी पुनर्वसन में तेंदुए के हमले में एक छोटे बच्चे की दुखद मौत हो गई थी। इसी के बाद पंचायत समिति वाई के सभापति विक्रांत उर्फ भैय्या डोंगरे ने मांग की है कि वन विभाग सिर्फ मुआयना करके न रह जाए, बल्कि तुरंत ठोस रोकथाम के कदम उठाए।
डोंगरे की मांग है कि वाई तालुका में जहां-जहां तेंदुए की हलचल लगातार दिख रही है, वहां फौरन पिंजरे लगाए जाएं। उनका कहना है कि तेंदुए की हरकत पर नजर रखने के लिए ट्रैप कैमरे, नाइट विजन कैमरे और जरूरी तकनीकी इंतजाम भी मुहैया कराने की जरूरत है।
उन्होंने यह भी मांग की है कि पश्चिमी हिस्से में जंगल से सटे गांवों, खेतों वाले इलाकों और जहां लोगों की आवाजाही रहती है, वहां वन विभाग नियमित गश्त बढ़ाए।
बताया जा रहा है कि पश्चिमी हिस्से में बंदरों की बड़ी टोलियों की वजह से जंगली जानवरों की हलचल बढ़ रही है। इसलिए तेंदुए की गतिविधियों का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन करके रोकथाम के उपाय करने की जरूरत बताई गई है। साथ ही गांव वालों के बीच बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने की मांग भी की गई है। लोगों को यह समझाना जरूरी बताया गया है कि रात में खेत में जाते समय सावधानी रखें, छोटे बच्चों को अकेले बाहर न भेजें और अंधेरी जगहों पर जाने से बचें।
अपील यह भी की गई है कि तेंदुआ दिखे तो उसका पीछा न करें और तुरंत वन विभाग को खबर दें।
डोंगरे ने कहा, "जनता ने मुझ पर भरोसा करके पंचायत समिति के सभापति पद की जिम्मेदारी दी है। यह सिर्फ पद नहीं है, लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है। मेरे तालुका के एक भी परिवार को तेंदुए के खौफ में जीना न पड़े।"
न्हाळेवाडी पुनर्वसन जैसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए उन्होंने वन विभाग से कहा है कि जिस-जिस गांव में तेंदुए की मौजूदगी है, वहां जाकर मुआयना किया जाए, खतरनाक जगहों को दर्ज किया जाए और पिंजरे व कैमरे लगाने समेत स्थायी उपाय किए जाएं।