पोप लिओ के फेफड़े में कैंसर की पुष्टि, सर्जरी के बाद 20 अक्टूबर तक सारे कार्यक्रम रद्द
वेटिकन के मेडिकल बुलेटिन के मुताबिक पोप लिओ के दाएं फेफड़े का बाधित हिस्सा सर्जरी से निकाल दिया गया है और उनकी हालत खतरे से बाहर है।
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दुनिया के करीब 140 करोड़ (1.4 अरब) कैथोलिक ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप लिओ को फेफड़े का कैंसर होने की खबर आई है। इससे पूरी दुनिया में चिंता फैल गई है। 71 साल के पोप लिओ मई 2025 में पोप फ्रांसिस के निधन के बाद इस पद पर बैठे थे, यानी उन्हें पद संभाले अभी सिर्फ 17 महीने हुए हैं।
वेटिकन के जारी किए आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन के मुताबिक पोप लिओ के दाएं फेफड़े में गांठ मिली थी। हाल ही में हुई एक सर्जरी के दौरान डॉक्टरों को इस ट्यूमर का पता चला। बुलेटिन में कहा गया है कि दाएं फेफड़े का बाधित हिस्सा सर्जरी से कामयाबी के साथ निकाल दिया गया है।
होली सी प्रेस ऑफिस की ओर से जारी बयान डॉ. लुइजी कार्बोन और प्रोफेसर स्तेफानो मार्गारितोरा के नाम से है। इसके मुताबिक पोप की थोरेसिक सर्जरी मंगलवार दोपहर जेमेली अस्पताल में तय कार्यक्रम के हिसाब से हुई। सर्जनों ने दाएं फेफड़े का निचला लोब निकाला। ऑपरेशन के दौरान जांचे गए टिशू से "लंग एडेनोकार्सिनोमा" की पुष्टि हुई, जिसका शक पहले की जांचों में पहले से था।
बयान के मुताबिक पोप करीब तीन घंटे ऑपरेशन थिएटर में रहे, जबकि ऑपरेशन खुद करीब 90 मिनट चला। डॉक्टरों ने कहा कि सर्जरी कामयाब रही और कोई दिक्कत नहीं आई। पोप सर्जरी के बाद सामान्य तरीके से होश में आए और थोड़ी देर निगरानी में रखे जाने के बाद अस्पताल की 10वीं मंजिल पर अपने कमरे में लौट गए। वेटिकन के मुताबिक उनकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर है और वे इलाज का अच्छा जवाब दे रहे हैं।
डॉक्टर की राय के तौर पर वॉशिंगटन के जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के हेमेटोलॉजी-ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. स्टीफन लिऊ ने कहा कि अगर फेफड़े का कैंसर शुरुआती स्टेज में है और लिम्फ नोड्स या शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं फैला है, तो सिर्फ सर्जरी करके बाधित हिस्सा निकाल देना उसका बहुत असरदार इलाज हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर आखिरी लैब रिपोर्ट में कैंसर दूसरे अंगों में फैला दिखे, तो मरीज की हालत ज्यादा गंभीर हो सकती है।
वेटिकन के प्रेस ऑफिस की शुरुआती रिपोर्ट में कैंसर के स्टेज या उसके फैलाव के बारे में तकनीकी ब्योरा नहीं दिया गया है। फिर भी डॉक्टरों की टीम ने पोप की मौजूदा हालत पर संतोष जताया है।
वेटिकन प्रशासन के मुताबिक पोप लिओ 20 अक्टूबर तक अस्पताल में ही रहकर इलाज कराएंगे। इस दौरान उनके सारे तय दौरे, खास धार्मिक सभाएं, कूटनीतिक मुलाकातें और जनता के दर्शन के कार्यक्रम तुरंत असर से रद्द कर दिए गए हैं। वेटिकन ने दुनियाभर के श्रद्धालुओं से पोप की जल्द सेहतयाबी की दुआ करने की अपील की है और कहा है कि उनकी सेहत में सुधार को लेकर समय समय पर मेडिकल बुलेटिन जारी होते रहेंगे।
पोप की गैरमौजूदगी में फैसले कौन लेगा, यह सवाल भी उठा है। वेटिकन के सदियों पुराने नियमों और कैनन लॉ के दायरे में पोप के जीवित और पद पर रहते उनकी जगह किसी अंतरिम उत्तराधिकारी या कार्यवाहक पोप को नियुक्त करने का प्रावधान नहीं है। यानी जिन फैसलों या नीतिगत समझौतों पर सीधे पोप के दस्तखत या मंजूरी चाहिए, वे पोप के पूरी तरह ठीक होने तक टाल दिए जाएंगे। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वेटिकन का रोज का काम रुक जाएगा। वेटिकन के अलग अलग प्रशासनिक विभागों (क्यूरिया) का रोजमर्रा का कामकाज, पैसों के मामले और नियमित इंतजाम पहले की तरह चलते रहेंगे।
पोप लिओ ने अपने 17 महीने के छोटे कार्यकाल में दुनिया में शांति, मानवाधिकार और ईसाई समुदाय में एकता का संदेश दिया है। उनकी बीमारी की खबर मिलते ही सिर्फ कैथोलिक ही नहीं, बल्कि अलग अलग धर्मों के नेताओं और दुनिया के राष्ट्राध्यक्षों ने भी उनके जल्द ठीक होने के लिए शुभकामना संदेश भेजे हैं।
अब सबकी नजर 20 अक्टूबर के बाद आने वाली मेडिकल रिपोर्ट और पोप लिओ के अस्पताल से डिस्चार्ज पर टिकी है। वेटिकन प्रशासन ने साफ किया है कि मेडिकल सलाहकार मंडल की हरी झंडी मिलने के बाद ही पोप लिओ अपनी सार्वजनिक जिम्मेदारियों पर लौटेंगे।