जापान में हुई सोने की स्पर्धा, मैट्रेस कंपनी ने कराया सबसे अच्छी नींद का मुकाबला
जापान में एक मैट्रेस कंपनी ने ऐसी स्पर्धा कराई जिसमें मुकाबला दौड़ या ताकत का नहीं, सबसे अच्छी नींद लेने का था।
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जापान में इन दिनों एक ऐसी स्पर्धा चर्चा में है, जिसमें न दौड़ना था, न खेलना और न ही ताकत दिखानी थी। यहां मुकाबला सोने का था। एक मैट्रेस कंपनी ने यह स्पर्धा आयोजित की थी।
स्पर्धा में वे लोग शामिल हुए जो खुद को कॉम्पिटिटिव स्लीपर्स, यानी स्पर्धात्मक नींद लेने वाले, कहते हैं। प्रतियोगियों के सामने चुनौती थी कि वे कम से कम वक्त में नींद में चले जाएं, गहरी नींद लें और शरीर को सबसे अच्छा आराम दें।
आम तौर पर किसी भी मुकाबले में रफ्तार, ताकत या हुनर को अहमियत दी जाती है। लेकिन इस स्पर्धा में चुपचाप सो जाना और शरीर को आराम देना ही हुनर माना गया। इसी वजह से यह स्पर्धा बाकी स्पर्धाओं से अलग रही और अब लोग इसे एक अनोखे विषय के तौर पर देख रहे हैं।
इस स्पर्धा की पृष्ठभूमि जापान में नींद की कमी की समस्या है। दुनिया भर में बढ़ते तनाव और भागदौड़ भरी जिंदगी की वजह से नींद की कमी बड़ी समस्या बनती जा रही है। खासकर जापान में बहुत मेहनती और लंबे वक्त तक काम करने वाले लोगों में पूरी नींद न मिलना चिंता की बात बन गया है।
जापान को दुनिया के सबसे ज्यादा काम करने वाले देशों में गिना जाता है। वहां की कॉर्पोरेट संस्कृति, काम के लंबे घंटे और पेशेवर जिम्मेदारियों की वजह से कई लोग पूरी नींद नहीं ले पाते। कई कर्मचारी काम के बोझ में अपनी सेहत और आराम पर ध्यान नहीं दे पाते।
नींद की कमी का असर शारीरिक और मानसिक सेहत पर भी पड़ता है। दिन भर काम करने के बाद थकान उतारने के लिए पूरा आराम मिलना जरूरी होता है। मगर जापान की भागदौड़ वाली जिंदगी में नींद भी कई लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है।
इस स्पर्धा के बहाने जापान में काम के दबाव और अधूरी नींद का सवाल फिर चर्चा में आ गया है। कहा जा रहा है कि लगातार काम करने का मतलब कार्यक्षमता नहीं होता, शरीर को पूरा आराम मिलना भी जरूरी है। नींद न मिलने पर ध्यान कम होता है, थकान महसूस होती है और काम करने की क्षमता पर असर पड़ता है।
ऐसे में काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन रखने की जरूरत बताई जा रही है। मैट्रेस कंपनी की यह स्पर्धा इसी वजह से हर जगह चर्चा का विषय बनी हुई है। इससे संदेश यह जा रहा है कि नींद सिर्फ निजी आदत नहीं, बल्कि सेहत से भी जुड़ी है।