शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
20:20 IST

रशिया से डीजल खरीदने का दावा: भारत पर रोक, अमेरिका की नीति पर उठे सवाल

रशिया-यूक्रेन युद्ध के बीच ट्रम्प के रशिया के साथ कथित डीजल खरीद करार की चर्चा तेज है, पर करार की जानकारी साफ नहीं है।

रशिया से डीजल खरीदने का दावा: भारत पर रोक, अमेरिका की नीति पर उठे सवाल तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

रशिया और अमेरिका बरसों से पारंपरिक दुश्मन की तरह एक-दूसरे के सामने खड़े रहे हैं। दोनों के बीच का शीतयुद्ध तो मशहूर ही है। लेकिन रोज बदलती दुनिया में अब यह तय करना मुश्किल होता जा रहा है कि कौन किसका दुश्मन है और कौन किसका दोस्त। पहले दोनों देशों के बीच ग्लोबल महाशक्ति बनने की होड़ चलती थी, मगर रशिया के विघटन के बाद रशिया इस दौड़ में थोड़ा पीछे रह गया।

दूसरे महायुद्ध के बाद अमेरिका बिना किसी शक के महाशक्ति बन गया था। फिर भी रशिया और अमेरिका के झगड़े किसी तरह खत्म नहीं हुए। अब मिली जानकारी के मुताबिक रशिया और यूक्रेन के बीच जंग जारी है और इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के रशिया के साथ कथित डीजल खरीद करार की चर्चा जोरों पर है।

एक तरफ अमेरिका यूक्रेन का साथ दे रहा है, और दूसरी तरफ उसके रशिया से ईंधन खरीदने का दावा सामने आया है। इसी वजह से अमेरिका की नीति पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इस करार की सही जानकारी और उसकी शर्तें साफ नहीं हैं, इसलिए इन दावों की स्वतंत्र रूप से जांच होना जरूरी है।

रशिया-यूक्रेन युद्ध की वजह से रशिया पर कई आर्थिक पाबंदियां लगाई गई हैं। यूक्रेन का झुकाव पश्चिमी देशों की ओर होने लगा तो रशिया को यह बात हजम नहीं हुई। पुतिन की राय बनी कि यूक्रेन को आसानी से अपने कब्जे में लेकर मामला खत्म किया जा सकता है, और इसके बाद यूक्रेन पर हमला हुआ। तभी अमेरिका और यूरोपीय देश यूक्रेन की मदद के लिए आगे आए। अमेरिका ने यूक्रेन को हथियार दिए और रशिया पर कड़ी आर्थिक पाबंदियां लगाईं। इतना ही नहीं, भारत को भी रशिया के साथ तेल का लेन-देन करने से मना किया गया।

इसी तरह ईरान के साथ भी तेल का व्यापार करने पर रोक लगाई गई। लेकिन अब ग्लोबल राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा शुरू हुई है कि अमेरिका खुद रशिया से तेल खरीदने के करार करने लगा है। रशिया पर लगाई गई पाबंदियों का मकसद यही है कि जंग के लिए रशिया को मिलने वाले आर्थिक स्रोतों पर लगाम लगे।

ऐसे में अगर यह दावा सही निकला कि अमेरिका रशियाई डीजल खरीद रहा है, तो पाबंदियों के असर पर सवाल खड़े हो सकते हैं। ऊर्जा के व्यापार से होने वाली कमाई रशिया की अर्थव्यवस्था के लिए अहम है, इसलिए इस लेन-देन पर खास नजर रखी जा रही है।

यूक्रेन को समर्थन देना और रशिया पर आर्थिक दबाव बनाए रखना, अमेरिका की इस भूमिका को देखते हुए रशिया के साथ ईंधन का व्यापार करने का दावा विरोधाभासी लग सकता है। मगर करार का स्वरूप, उसमें शामिल कंपनियां, सौदे की तारीख और ईंधन का असली स्रोत जांचे बिना यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि ट्रम्प ने रशिया के साथ बड़ा डीजल खरीद करार किया है।

ग्लोबल ईंधन बाजार में कई देश और कंपनियां अलग-अलग सप्लायर से तेल और ईंधन खरीदती हैं। इसलिए किसी देश तक पहुंचने वाले ईंधन का मूल स्रोत और सौदे में कंपनियों की भूमिका अहम हो जाती है। रशियाई ईंधन से जुड़ा ऐसा कोई सौदा हो, तो पाबंदियों में उसे मिली छूट और कानूनी शर्तों को समझना जरूरी है। इसके बाद ही अमेरिका की नीति पर कोई आखिरी नतीजा निकाला जा सकेगा।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे