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21:13 IST

कोस्टा रिका के गोल पत्थर: एलियन की निशानी या डिक्विस लोगों की कारीगरी, रहस्य अब भी बरकरार

दक्षिण कोस्टा रिका के डिक्विस डेल्टा के जंगलों में मिले सैकड़ों गोल पत्थर करीब सौ साल बाद भी लोगों को हैरान करते हैं।

कोस्टा रिका के गोल पत्थर: एलियन की निशानी या डिक्विस लोगों की कारीगरी, रहस्य अब भी बरकरार तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मध्य अमेरिका का देश कोस्टा रिका अपनी कुदरती खूबसूरती के लिए जाना जाता है, लेकिन दुनिया भर में उसकी एक और पहचान है। यह पहचान है एक ऐसे रहस्य की, जिसने वैज्ञानिकों और पुरातत्वविदों को लंबे समय से उलझा रखा है। मामला वहां मिले गोल पत्थरों का है।

करीब सौ साल पहले दक्षिण कोस्टा रिका के डिक्विस डेल्टा इलाके के घने वर्षावनों में केले के बागान के लिए जंगल साफ किए जा रहे थे। उसी दौरान मजदूरों को ज़मीन के नीचे और जंगल में दबे सैकड़ों पत्थर मिले। ये पूरी तरह गोल थे और इतने चिकने कि देखने वाले हैरान रह गए। स्थानीय भाषा में इन्हें 'लास बोलस दे पिएद्रा' (Las Bolas de Piedra) कहा जाता है, यानी 'पत्थर के गोले'।

इन गोलों का आकार एक जैसा नहीं है। कुछ टेनिस की गेंद जितने हैं, यानी कुछ इंच व्यास के। कुछ बहुत बड़े हैं, 6 से 8 फुट व्यास के और 15 से 16 टन वजन के। ये गैब्रो (Gabbro) नाम की ज्वालामुखी चट्टान से बने हैं, जो बेहद सख्त होती है। आधुनिक तकनीक और मशीनों के बिना सैकड़ों साल पहले ऐसे गोल पत्थर कैसे बने होंगे, यह सवाल पिछले सौ साल से शोधकर्ताओं के लिए पहेली बना हुआ है। इनकी बनावट इतनी सटीक और चिकनी है कि लगता है जैसे किसी अत्याधुनिक लेथ मशीन पर तराशे गए हों।

जब ये पत्थर दुनिया के सामने आए तो इनके बनने और मकसद को लेकर कई किस्से और कहानियां चल पड़ीं। कुछ लोगों ने दावा किया कि इतने सटीक और भारी गोले इंसानी हाथों से बन ही नहीं सकते, इसलिए दूसरे ग्रह के प्राणियों (Aliens) ने इन्हें धरती पर रखा होगा या अपने यान को रास्ता दिखाने के लिए लगाया होगा। एक और मशहूर कहानी यह रही कि ये पौराणिक काल में समुद्र में डूबे 'अटलांटिस' (Atlantis) नाम के उन्नत शहर के अवशेष हैं।

इन कहानियों के साथ एक खतरनाक अंधविश्वास भी फैला। इलाके में अफवाह उड़ी कि इन गोलों के ठीक बीच में सोने-चांदी का भारी खजाना छिपा है। इसी लालच में कई स्थानीय लोगों और खजाना खोजने वालों ने डायनामाइट से धमाके करके सैकड़ों साल पुराने कई गोले तोड़ डाले। लेकिन पत्थर टूटने पर अंदर सिर्फ पत्थर और मिट्टी निकली। खजाने के इस लालच ने इंसानी इतिहास की एक बड़ी धरोहर को ऐसा नुकसान पहुंचाया जिसकी भरपाई नहीं हो सकती।

अंधविश्वास और एलियन की कहानियों को किनारे रखकर पुरातत्वविदों ने जब इलाके का गहराई से अध्ययन किया तो दिलचस्प इंसानी इतिहास सामने आया। शोधकर्ताओं के मुताबिक ये गोले करीब इसवी सन 700 से इसवी सन 1535 के बीच इस इलाके में रहने वाली 'डिक्विस' (Diquis) नाम की प्राचीन स्थानीय संस्कृति के लोगों ने तराशे थे। वे छोटे पत्थरों से बड़ी चट्टानों पर चोट करते और फिर रेत और पानी से घिसकर उन्हें चिकना और पूरी तरह गोल बना देते थे। यह सब्र और हुनर की इंसानी कला थी।

15वीं सदी में स्पेनी हमलावरों और दूसरी वजहों से यह उन्नत डिक्विस संस्कृति खत्म हो गई और लोगों ने ये इलाके छोड़ दिए। समय के साथ इन बस्तियों पर घने जंगल उग आए और ये ऐतिहासिक पत्थर सदियों तक दुनिया की नज़र से छिपे रहे। अनुमान है कि इनका इस्तेमाल उस दौर के कबीले के सरदारों के घरों की शोभा बढ़ाने, ग्रहों की स्थिति पर आधारित खगोलीय कैलेंडर (Astronomical Calendar) के तौर पर या धार्मिक रस्मों के लिए होता रहा होगा।

बार-बार होने वाली तोड़फोड़, चोरी और नुकसान को रोकने के लिए कोस्टा रिका सरकार ने 1980 के दशक में पूरे इलाके को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित किया। उसके बाद 2014 में संयुक्त राष्ट्र की संस्था 'यूनेस्को' (UNESCO) ने डिक्विस के इन पत्थर के गोलों को आधिकारिक तौर पर 'विश्व धरोहर स्थल' (World Heritage Site) घोषित किया, जिससे आज यह ऐतिहासिक विरासत सुरक्षित है।

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