बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

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नाना पाटेकर के निधन के बाद भी जारी रहेगा नाम फाउंडेशन का काम, मकरंद अनासपुरे का रुख

नाना पाटेकर के निधन के बाद भी जारी रहेगा नाम फाउंडेशन का काम, मकरंद अनासपुरे का रुख तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
समाज PT24 टीम

नाना पाटेकर के निधन के बाद नाम फाउंडेशन के भविष्य को लेकर उठे सवालों पर मकरंद अनासपुरे का रुख सामने आया है। संस्था किसानों, जरूरतमंदों और ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए अपना काम जारी रखेगी।

वरिष्ठ अभिनेता नाना पाटेकर का 28 अक्टूबर को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनके अचानक चले जाने से सबको बड़ा सदमा लगा है। अब लोगों के मन में एक सवाल उठ रहा है कि नानाजी के बाद 'नाम फाउंडेशन' का क्या होगा।

नाम फाउंडेशन की शुरुआत नाना पाटेकर और मकरंद अनासपुरे ने मिलकर की थी। इस संस्था के जरिए अब तक कई किसानों और जरूरतमंद लोगों की मदद की गई है। महाराष्ट्र के किसानों और ग्रामीण इलाकों के जरूरतमंदों के लिए काम करने वाली इस संस्था के आगे के सफर को लेकर इन दिनों चर्चा चल रही है। लोग जानना चाहते हैं कि संस्था का काम आगे कैसे चलेगा।

बताया जा रहा है कि मकरंद अनासपुरे ने एक इंटरव्यू में नाम फाउंडेशन के आगे के काम पर अपनी बात रखी। जानकारी के मुताबिक उन्होंने कहा है कि समाजसेवा के इस काम में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए और नानाजी ने जो सपने देखे थे, वे पूरे होते रहने चाहिए। इसके लिए संस्था का काम और ज्यादा जोश के साथ आगे बढ़ाने का इरादा है।

इस रुख से जो भावना झलकती है, वह यह है कि जरूरतमंदों के चेहरे पर खुशी लाने के लिए जो सेवा का सिलसिला शुरू हुआ था, उसे बिना रुके चलाते रहना ही नानाजी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। जानकारी में यह भी कहा गया है कि संस्था के जरिए चल रहे सामाजिक काम को आगे ले जाने पर जोर रहेगा।

सूखे की मार झेल रहे किसानों की मदद पर खास जोर रहेगा। बताया जाता है कि महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित किसानों और ग्रामीण इलाकों के लोगों की मदद करना नाम फाउंडेशन के सामने एक अहम चुनौती है। सूखे के हालात में किसानों को तरह-तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे वक्त में उन्हें जरूरी मदद मिले, इसके लिए संस्था अपनी कोशिशें जारी रखने का मन बना रही है।

इससे पहले भी नाम फाउंडेशन ने मुसीबत के समय किसानों और जरूरतमंद लोगों की मदद की है। उसी अनुभव और सेवा भाव के सहारे आगे भी सूखा प्रभावित इलाकों के लोगों की मदद पर ध्यान दिया जाएगा, ऐसा बताया जा रहा है।

किसानों की मदद के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों के स्कूली और कॉलेज के विद्यार्थियों का भविष्य बनाने पर भी संस्था का जोर रहेगा। इस पहल का मुख्य मकसद यह है कि पैसों की तंगी की वजह से काबिल विद्यार्थी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं के मौकों से दूर न रह जाएं। ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए जरूरी मौके देना और उनकी पढ़ाई के सफर में हाथ बंटाना भी इस सामाजिक काम का एक अहम हिस्सा हो सकता है।

कुल मिलाकर, किसानों, जरूरतमंद लोगों और ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों के लिए चल रहे काम को आगे बढ़ाने पर नाम फाउंडेशन का जोर है।

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