21 अक्टूबर को राष्ट्रीय सफरचंद दिन, सेहत और किसानों की मेहनत की याद
हर साल 21 अक्टूबर को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय सफरचंद दिन पर फल की खूबियों, उसकी किस्मों और बाग उगाने वाले किसानों की मेहनत की बात।
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"An apple a day keeps the doctor away", यानी रोज एक सेब खाओ और डॉक्टर को दूर रखो। यह पुरानी अंग्रेजी कहावत हम बचपन से सुनते आए हैं। इसे सिर्फ कहावत नहीं, इंसान की सेहत के लिए एक सुनहरा मंत्र भी कहा गया है। हर साल 21 अक्टूबर को दुनिया भर में और भारत में भी राष्ट्रीय सफरचंद दिन (National Apple Day) बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
इस खास दिन का मकसद सफरचंद जैसे पौष्टिक फल की अहमियत लोगों तक पहुंचाना है। साथ ही इसकी अलग अलग किस्मों की जानकारी देना और लोगों को रोज के खाने में फलों को शामिल करने के लिए बढ़ावा देना भी इसका मकसद है।
सफरचंद को सेहत की सच्ची निशानी माना जाता है। कहा जाता है कि कुदरत ने इस फल में इंसानी शरीर के लिए जरूरी सारे गुण भर दिए हैं। आज की भागदौड़ और मॉडर्न लाइफस्टाइल में जंक फूड और प्रोसेस्ड चीजें सेहत को नुकसान पहुंचा रही हैं। ऐसे में रोज एक ताजा सफरचंद खाना शरीर को कई बीमारियों से दूर रखने का आसान तरीका बताया गया है।
सफरचंद सिर्फ स्वाद में ही लाजवाब नहीं, उसे कई बीमारियों के लिए रामबाण भी माना जाता है। इसमें खास तौर पर विटामिन सी, विटामिन के, पोटैशियम और भरपूर फाइबर (पेक्टिन) मिलता है। इसके अलावा इसमें मौजूद ताकतवर एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की कोशिकाओं को होने वाले नुकसान से बचाते हैं।
दिल की सेहत के लिए भी सफरचंद को बहुत फायदेमंद बताया गया है। इसमें मौजूद फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स खून में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) की मात्रा घटाने में मदद करते हैं। इससे हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का खतरा काफी कम हो जाता है। जिन लोगों को पाचन की दिक्कत है या कब्ज की शिकायत है, उनके लिए इसका घुलनशील फाइबर पाचन को ठीक रखने में काम का बताया गया है। नियमित रूप से सफरचंद खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity System) मजबूत होती है और खून में शक्कर का स्तर काबू में रहता है। इसी वजह से इसे डायबिटीज के मरीजों के लिए भी सुरक्षित फल माना जाता है।
राष्ट्रीय सफरचंद दिन के मौके पर देश भर के स्कूल, सेहत से जुड़ी संस्थाएं और कई सामाजिक व पर्यावरण संस्थाएं खास कार्यक्रम करती हैं। स्कूलों में छोटे बच्चों को सफरचंद के फायदे बताए जाते हैं, ताकि उन्हें जंक फूड की जगह फल खाने की आदत पड़े। सेहत से जुड़ी संस्थाएं आहार विशेषज्ञों (Dietitians) के भाषण रखती हैं, जिनमें सफरचंद खाने के सही वक्त और तरीके के बारे में विस्तार से बताया जाता है।
इस दिन सफरचंद की अलग अलग किस्मों के बारे में भी जानकारी दी जाती है। भारत में हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड जैसे ठंडे इलाकों में सफरचंद की बड़ी खेती होती है। रेड डिलीशियस (Red Delicious), गोल्डन डिलीशियस (Golden Delicious), शिमला एप्पल, किन्नौर एप्पल और गाला (Gala) जैसी सैकड़ों किस्में बाजार में मिलती हैं। हर किस्म का स्वाद, बनावट और रंग अलग होता है।
सफरचंद हमारी थाली या हाथ में आसानी से आ जाता है, लेकिन उसे पेड़ पर उगाने के पीछे किसानों की बहुत बड़ी मेहनत छिपी होती है। बर्फ से ढके पहाड़ी इलाकों में, मुश्किल मौसम के बीच सेब के बाग तैयार करना आसान काम नहीं है। पौधे की देखभाल से लेकर सही वक्त पर फलों की छंटाई, कीटनाशकों का सुरक्षित इस्तेमाल और फल तोड़कर उन्हें सुरक्षित तरीके से बाजार तक पहुंचाने तक, किसान दिन रात मेहनत करते हैं।
राष्ट्रीय सफरचंद दिन इन मेहनती किसानों की मेहनत को शुक्रिया कहने और उनके योगदान को याद करने का एक खास मौका है। उन्हीं की मेहनत से हमें रोज ताजे और पौष्टिक फल मिल पाते हैं। इसीलिए इस दिन स्थानीय किसानों के उगाए फलों को तरजीह देना हमारा फर्ज बताया गया है।
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