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किसानों की दिवाली काली नहीं होने देंगे, कर्ज वसूली वालों को शिंदे की सख्त चेतावनी

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कैबिनेट बैठक के बाद कहा कि सूखे से जूझ रहे किसानों के साथ सरकार खड़ी है और जबरदस्ती वसूली करने वाली कंपनियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

किसानों की दिवाली काली नहीं होने देंगे, कर्ज वसूली वालों को शिंदे की सख्त चेतावनी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

महाराष्ट्र में सूखे की हालत गंभीर हो गई है। बारिश नहीं हुई, इसलिए पानी की भारी किल्लत अभी से महसूस होने लगी है। किसान परेशान हैं और फसल न होने की वजह से उन पर बड़ा संकट आ गया है। पहले से कर्ज के बोझ तले दबे किसानों को कर्ज वसूली के लिए बहुत तंग किए जाने की घटनाएं भी राज्य में हुई हैं।

इसी को लेकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि सूखे से जूझ रहे किसानों के पीछे सरकार मजबूती से खड़ी है और किसानों की दिवाली काली नहीं होने दी जाएगी। आज, मंगलवार 27 अक्टूबर को हुई कैबिनेट बैठक के बाद शिंदे मीडिया से बात कर रहे थे।

मीडिया से बात करते हुए शिंदे ने कहा, "किसानों की दिवाली काली नहीं होने देंगे। सूखे से परेशान किसानों के पीछे सरकार है। राज्य सरकार 31 अक्टूबर को केंद्र को प्रस्ताव भेजने वाली है। माइक्रो फायनान्स कंपनियां जबरदस्ती वसूली न करें। कर्ज वसूली के लिए तगादा लगाने वाली कंपनियों पर सख्त कार्रवाई होगी। साहूकार हो या फायनान्स कंपनी, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।"

शिंदे ने यह भी बताया कि पीने के पानी को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं और चारा लगाने के लिए हमीभाव घोषित किया जाएगा। उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि जो किसान के आड़े आएगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों के लिए 5 हजार रुपये की तुरंत मदद घोषित हो चुकी है।

इसी प्रेस बातचीत में शिंदे ने मल्लिकार्जुन खर्गे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए गए बयान का विरोध भी किया। उन्होंने कांग्रेस को चेतावनी देते हुए कहा कि खर्गे को पार्टी से निकाल देना चाहिए।

शिंदे ने कहा, "खर्गे को पार्टी से निकाल दो। यह नेपाल, बांग्लादेश नहीं, नया भारत है। खर्गे के मोदी पर दिए बयान का विरोध है। मोदी देश को जोड़ने वाले हैं, जबकि विरोधी देश को तोड़ने वाले हैं।"

एक तरफ किसानों की मदद का मुद्दा था और दूसरी तरफ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप, इसलिए शिंदे की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों बातें चर्चा में रहीं। अब राज्य के किसान इस बात पर नजर गड़ाए बैठे हैं कि जो आश्वासन उन्हें दिए गए हैं, वे असल मदद में कब बदलते हैं।

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