गुरूवार, 5 नवंबर 2026

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नागपुर में खुलेआम बिक रहे सुतली बम पर हाई कोर्ट की फटकार, जोन-3 के DCP को फौरन एक्शन का आदेश

नागपुर में खुलेआम बिक रहे सुतली बम पर हाई कोर्ट की फटकार, जोन-3 के DCP को फौरन एक्शन का आदेश तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

मुंबई हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने 55 डेसिबल से तेज पटाखों की बिक्री पर पुलिस को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए और पुलिस आयुक्त से हलफनामा मांगा।

मुंबई हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने शहर में तेज आवाज वाले पटाखों और खतरनाक सुतली बम की खुलेआम हो रही बिक्री पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा कि 55 डेसिबल से ज्यादा आवाज वाले पटाखे बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

मामला बुधवार की सुनवाई में सामने आया। अदालत मित्र अधि. अब्दुल सुभान ने तस्वीरों के साथ हाई कोर्ट को बताया कि नियमों की किस तरह धज्जियां उड़ रही हैं। नियम के हिसाब से पटाखों की दो दुकानों के बीच 3 मीटर का फासला रखना जरूरी है, लेकिन तस्वीरों में दुकानें एक-दूसरे से सटी हुई दिख रही थीं।

यह हालत देखने के बाद न्यायाधीश उर्मिला जोशी फालके और न्यायाधीश राज वाकोडे ने जोन-3 के पुलिस उपायुक्त को तुरंत सख्त कार्रवाई करने के मौखिक आदेश दिए। अदालत ने यह भी कहा कि 55 डेसिबल से ऊपर की आवाज वाले पटाखे बेचने वालों पर संबंधित जोन के पुलिस उपायुक्त कठोर कार्रवाई करें।

ऑनलाइन शिकायतों पर देरी से नाराजगी

ध्वनि प्रदूषण को लेकर ऑनलाइन पोर्टल पर जो शिकायतें आती हैं, उन पर पुलिस से फौरन कदम उठाने की उम्मीद थी। मगर पुलिस प्रशासन ने तकनीकी कारणों का हवाला दिया, जिस पर हाई कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई। अदालत ने पुलिस आयुक्त को मौखिक निर्देश दिए कि वे खुद पूरे मामले की जांच करें।

हाई कोर्ट ने पुलिस आयुक्त को हलफनामा दाखिल करने का भी आदेश दिया है। इसमें उन्हें बताना होगा कि 55 डेसिबल की सीमा का पालन हो रहा है या नहीं, और नियम तोड़ने वाले विक्रेताओं और होलसेलर्स पर अब तक क्या कार्रवाई की गई।

अदालत ने फिर दोहराया कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करवाने की पूरी जिम्मेदारी पुलिस की है। इसके लिए पुलिस को विशेष दस्ते बनाने चाहिए और दुकानों का नियमित निरीक्षण करना चाहिए।

अवमानना की चेतावनी

नागपुर खंडपीठ ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी भी दी है कि अगर नियमों का पालन करवाने में कोई लापरवाही मिली, तो उसे अदालत की अवमानना माना जाएगा। अदालत के मुताबिक सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ किसी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं होगा। इसलिए पटाखों की अवैध बिक्री रोकने के लिए पुलिस को तुरंत जमीनी स्तर पर कड़े कदम उठाने होंगे।

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