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मार्च तक महाराष्ट्र के सारे खेती पंपों को दिन में सौर बिजली, महावितरण प्रमुख का दावा

मार्च तक महाराष्ट्र के सारे खेती पंपों को दिन में सौर बिजली, महावितरण प्रमुख का दावा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

महावितरण के अध्यक्ष लोकेश चंद्र ने नई दिल्ली में कहा कि राज्य में अभी 80 फीसदी कृषि पंपों को दिन में बिजली मिल रही है और मार्च के आखिर तक यह आंकड़ा 100 फीसदी हो जाएगा।

नागपुर, 5 नवंबर 2026: महाराष्ट्र में अभी 80 फीसदी कृषि पंपों को दिन में बिजली मिल रही है। आने वाले मार्च के आखिर तक सौर ऊर्जा के जरिए सौ फीसदी कृषि पंपों को दिन में बिजली दी जाएगी। यह बात मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव और महावितरण के अध्यक्ष तथा प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्र ने मंगलवार (3 नवंबर) को कही।

लोकेश चंद्र के मुताबिक यह सब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई में शुरू हुई मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 के दम पर हुआ है। योजना का मकसद किसानों को खेती के पंपों के लिए दिन में बिजली देना है।

वे नई दिल्ली में भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 में बोल रहे थे। यह अंतरराष्ट्रीय परिषद केंद्र सरकार के नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने आयोजित की थी। "डिस्ट्रीब्यूटेड एनर्जी फॉर एनर्जी सिक्योरिटी, सेल्फ रिलायंस एंड विकसित भारत 2047" नाम के चर्चा सत्र में उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र ने जगह-जगह छोटे-छोटे सौर बिजली प्रोजेक्ट खड़े करके कृषि पंपों को दिन में बिजली देने में क्या काम किया है। इस सत्र में प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर का मुख्य भाषण हुआ।

इंटरनेशनल सोलर अलायंस असेंबली के नौवें सत्र में "पंप्स टू प्रोग्राम्स: स्केलिंग सोलराइजेशन ऑफ एग्रीकल्चर इन द ग्लोबल साउथ" नाम का एक और अंतरराष्ट्रीय चर्चा सत्र हुआ। यहां लोकेश चंद्र ने मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना और मागेल त्याला सौर कृषि पंप योजना की सफलता की कहानी विदेशी प्रतिनिधियों के सामने रखी। सोलर अलायंस के महानिदेशक आशीष खन्ना ने इस मौके पर उनसे बातचीत की।

लोकेश चंद्र ने बताया कि महाराष्ट्र में यह योजना केंद्र की पीएम कुसुम योजना के आधार पर शुरू की गई है। इसमें 16 हजार मेगावॉट क्षमता के सौर बिजली प्रोजेक्ट अलग-अलग जगह बनाए जा रहे हैं। अब तक करीब 7 हजार मेगावॉट के प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं। इनसे मिलने वाली बिजली और कुछ दूसरे तकनीकी उपायों की बदौलत अभी 80 फीसदी कृषि पंपों को दिन में बिजली चल रही है। सौ फीसदी कृषि पंपों को दिन में सौर बिजली देने का लक्ष्य रखा गया है और उनके मुताबिक यह मार्च के आखिर तक पूरा हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि कृषि पंपों को दिन और रात, दो पालियों में बिजली देने से जो दिक्कत खड़ी होती है, वह देश की सभी बिजली वितरण कंपनियों के सामने है। कृषि पंपों को बिजली देने के लिए अब सौर ऊर्जा की तरफ मुड़ना ही आगे का रास्ता है। इससे वितरण कंपनियों की परेशानी दूर होगी और कृषि पंपों को दिन में अच्छी क्वालिटी की बिजली मिलेगी। साथ ही राज्य सरकार का सब्सिडी पर होने वाला खर्च भी घटेगा।

लोकेश चंद्र ने यह भी बताया कि नया निवेश आने और लोगों का रहन-सहन बढ़ने से महाराष्ट्र में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। आगे की मांग पूरी करने के लिए राज्य ने एक प्लान तैयार किया है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर देकर बिजली की जरूरत पूरी की जाएगी।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना के लिए किए गए नियोजन और तकनीकी उपायों की जानकारी दी। उनका कहना था कि सौर कृषि पंप लगाने में राज्य सबसे आगे है। देश के कुल सौर कृषि पंपों में से 65 फीसदी महाराष्ट्र में लगे हैं। सौर ऊर्जा से किसानों को सिंचाई का भरोसेमंद साधन मिल रहा है। जब चाहें तब सिंचाई कर पाने से पानी की बर्बादी टल रही है, और लोकेश चंद्र के मुताबिक खेती की पैदावार भी बढ़ने का अनुभव आ रहा है।

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