शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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नागपुर खंडपीठ: पटाखा बंदी पर पुलिस सुस्त, 15 दिन की कार्रवाई की रिपोर्ट तलब

नागपुर खंडपीठ: पटाखा बंदी पर पुलिस सुस्त, 15 दिन की कार्रवाई की रिपोर्ट तलब तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

मुंबई हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने कहा कि पटाखा बंदी के आदेश को लागू करने में पुलिस गंभीर नहीं है। कोर्ट ने लाइसेंसधारी विक्रेताओं की सूची और पिछले 15 दिनों की कार्रवाई का ब्योरा मांगा है।

पटाखा बंदी के आदेश को लागू करने के मामले में पुलिस गंभीर नहीं है, यह टिप्पणी मुंबई हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने की है। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक सड़कों और दूसरी भीड़भाड़ वाली जगहों पर पटाखे फोड़ने पर रोक है, फिर भी आदेश का उल्लंघन हो रहा है।

खंडपीठ ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि जिन विक्रेताओं ने पटाखा बेचने का लाइसेंस लिया है, उनकी सूची पेश की जाए। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या लाइसेंस में ऐसी शर्त है कि 55 डेसिबल से ज्यादा आवाज वाले पटाखे नहीं बेचे जाएंगे। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने पिछले 15 दिनों में पुलिस ने क्या कार्रवाई की, इसका ब्योरा भी मांगा है।

इसी सुनवाई में नागपुर के अंबाझरी पुलिस थाने की हद में एक कंस्ट्रक्शन साइट के ध्वनि प्रदूषण की शिकायत का मामला भी उठा। शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, इस पर कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई। पुलिस और प्रशासन को 3 नवंबर तक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया है। सुनवाई न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाळके और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ के सामने हुई।

इससे पहले सोमवार (26 अक्टूबर) को मुंबई हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। महाराष्ट्र सरकार ने पटाखे फोड़ने के खिलाफ एक मुहिम का प्रस्ताव रखा था, लेकिन कोई भी बॉलीवुड अभिनेता मदद के लिए आगे नहीं आया। कोर्ट ने सेलिब्रिटियों को याद दिलाया कि समाज का कर्ज चुकाने का यही वक्त है। साथ ही राज्य सरकार को साफ कहा गया कि मुहिम में किसी सेलिब्रिटी को जोड़ने के लिए सरकारी खजाने का पैसा 'बर्बाद' न किया जाए।

गृह राज्यमंत्री पंकज भोयर ने इन्हीं मुद्दों पर कहा कि कोर्ट की सूचना का पूरी तरह पालन किया जाएगा। उनके मुताबिक जरूरत पड़ी तो पटाखा विक्रेताओं की जांच भी की जाएगी।

चिंता इसलिए भी बढ़ी है कि उल्लंघन पकड़ने के लिए कोई साफ व्यवस्था नहीं दिखती। नागपुर महानगरपालिका ने 16 अक्टूबर तक पटाखों की 831 दुकानों को इजाजत दी है। ऐसे में सवाल खड़ा है कि दिवाली के दौरान प्रदूषण के नियम कैसे लागू होंगे। हाई कोर्ट की टिप्पणी के बाद महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) ने 'ग्रीन क्रैकर्स' यानी पर्यावरण के अनुकूल पटाखों के इस्तेमाल पर गाइडलाइन जारी की है। शोर और उत्सर्जन की सीमा का पालन भी जरूरी किया गया है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक शहर में बिक रहे पटाखों की आवाज का स्तर या उनमें मौजूद केमिकल की कोई जांच नहीं हुई है।

महानगरपालिका का फायर ब्रिगेड विभाग विक्रेताओं को 'ना-हरकत प्रमाणपत्र' (NOC) देता है। इसके लिए पर्यावरण शुल्क के तौर पर 1000 रुपये और सुरक्षा इंतजामों के लिए 3000 रुपये लिए जाते हैं। फिर भी शोर और उत्सर्जन के मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इस पर निगरानी कैसे रखी जाएगी, यह अब तक साफ नहीं है।

महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल की गाइडलाइन के मुताबिक मुख्य सड़कों, गलियों, फुटपाथों और दूसरी सार्वजनिक जगहों पर पटाखे फोड़ना मना है। अस्पताल, शिक्षा संस्थान, सरकारी दफ्तर और कोर्ट जैसे 'साइलेंस जोन' के 100 मीटर के दायरे में भी पटाखों पर रोक है। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक आवाज करने वाले पटाखे फोड़ना मना है, और निजी परिसरों में भी ध्वनि के तय मानकों का पालन करना होगा।

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