नांदगांव ऐश पॉन्ड ओवरफ्लो मामले में हाई कोर्ट ने प्रतिवादियों से मांगा जवाब
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कोराडी और खापरखेड़ा बिजलीघरों की राख से हो रहे प्रदूषण पर जनहित याचिका में अदालत ने जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।
नागपुर जिले के कोराडी और खापरखेड़ा ताप बिजलीघरों की राख से फैल रहे प्रदूषण का मामला अब बॉम्बे हाई कोर्ट में है। राजेश उर्फ धम्मेश चौहान ने इस बारे में जनहित याचिका दायर की है। अब नांदगांव ऐश पॉन्ड यानी राख तालाब के ओवरफ्लो होने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है।
न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर प्रतिवादी जवाब पेश नहीं करते, तो अदालत उनके खिलाफ जरूरी कार्रवाई करने पर विचार करेगी।
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में खापरखेड़ा थर्मल पावर स्टेशन (KTPS) से निकलने वाले जहरीले धुएं और उसके पर्यावरण पर घातक असर का मुद्दा उठाया है। याचिका में खास तौर पर नदियों में राख छोड़े जाने और नालों के पानी के जरिए होने वाले जल प्रदूषण की तरफ ध्यान दिलाया गया है।
सुनवाई के दौरान अदालत मित्र एनबी कलवाचे ने बताया कि नांदगांव ऐश पॉन्ड के ओवरफ्लो होने से गांव वालों और मछुआरों का भारी नुकसान हुआ है। उनके मुताबिक पास का एक तालाब भी प्रदूषित हो गया है, और कई मछुआरों की रोजी-रोटी इसी तालाब पर टिकी है। उन्होंने यह भी बताया कि इस घटना में एक गाय और एक भैंस की मौत हो चुकी है।
अदालत का ध्यान 29 अक्टूबर 2026 को छपी एक खबर की तरफ भी दिलाया गया। सुनवाई में यह बात भी सामने आई कि विशेषज्ञों ने इस समस्या से निपटने के लिए लैगून बनाने का सुझाव दिया था, लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ। अदालत मित्र ने कहा कि प्रतिवादी गांव वालों की परेशानियों को लेकर गंभीर नहीं हैं।
अदालत इससे पहले महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB), NEERI और IIT बॉम्बे की एक अहम रिपोर्ट का हवाला दे चुकी है। यह रिपोर्ट 8 जुलाई 2024 को पेश की गई थी। इसमें नागपुर, अमरावती और चंद्रपुर समेत राज्य के 10 शहरों की हवा की क्वालिटी और उत्सर्जन के स्रोतों का अध्ययन किया गया था। अध्ययन में साफ पाया गया कि सबसे ज्यादा उत्सर्जन का बोझ कोराडी और खापरखेड़ा जैसे थर्मल पावर प्लांटों से ही आता है।
शहर के वायु प्रदूषण को लेकर पहले छपी खबरों पर हाई कोर्ट खुद संज्ञान ले चुका है। उस स्वतः संज्ञान वाली याचिका को अब इस जनहित याचिका के साथ जोड़ने का आदेश भी कोर्ट ने दिया है।
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