सुपारी के धंधे में 300 करोड़ का घाटा!
कागजों पर खेल, हजारों करोड़ के रैकेट की जांच, आधी कीमत पर बिक्री दिखाकर कंपनियों में घाटा दर्शाने का आरोप, आयकर विभाग को गुमराह करने की आशंका, बड़े खुलासों के संकेत
नागपुर.
सुपारी तस्करी के कथित नेटवर्क में केवल कस्टम ड्यूटी बचाने का ही खेल नहीं था, बल्कि कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड में भी बड़े पैमाने पर हेराफेरी किए जाने की आशंका जताई जा रही है. डीआरआई की जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क से संबंधित कुछ कंपनियों ने अपने कारोबार में करीब 250 से 300 करोड़ रुपये तक का घाटा दिखाया है. अब जांच का अहम पहलू यह है कि आखिर कारोबार में इतना बड़ा घाटा कैसे हुआ और इन कंपनियों के वास्तविक वित्तीय लेन-देन क्या थे?
खरीद महंगी, बिक्री आधी कीमत पर!
सूत्रों के अनुसार, कथित फर्जीवाड़े का तरीका भी जांच के दायरे में है. बताया जाता है कि दस्तावेजों में सुपारी को बांग्लादेश से अधिक कीमत पर खरीदा हुआ दर्शाया जाता था, जबकि भारत में उसकी बिक्री कथित तौर पर आधी कीमत पर दिखाई जाती थी. कागजों पर खरीद और बिक्री की कीमत में भारी अंतर होने से कंपनी को घाटा होता दिखाई देता था. इसी तरीके से कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड में भारी नुकसान दिखाई देता है. जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस तरह की हेराफेरी का इस्तेमाल वास्तविक कारोबार और मुनाफे को छिपाने के साथ-साथ आयकर विभाग को गुमराह करने के लिए किया जाता था. हालांकि, यह आरोप दस्तावेजों की जांच और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर ही प्रमाणित हो सकेंगे.
300 करोड़ का घाटा या मुनाफे पर पर्दा डालने की कोशिश?
इस कथित नेटवर्क में कंपनियों के खातों में दर्शाए गए भारी घाटे ने जांच को एक नया मोड़ दे दिया है. यदि दस्तावेजों में खरीद-बिक्री की कीमतों को जानबूझकर गलत तरीके से दर्शाया गया है, तो यह मामला केवल आयात शुल्क की चोरी तक सीमित नहीं रह सकता. इसमें आयकर संबंधी अनियमितताओं और वित्तीय लेन-देन की भी गहन जांच की जरूरत होगी. डीआरआई के लिए अब यह पता लगाना अहम होगा कि सुपारी की वास्तविक खरीद कीमत क्या थी, भारत में उसे किस भाव पर बेचा गया और कंपनियों के खातों में घाटा किस आधार पर दर्ज किया गया.
दिनेश अग्रवाल की तलाश, नागपुर के कारोबारियों पर नजर!
सूत्रों के अनुसार, कोलकाता के दिनेश अग्रवाल को इस कथित नेटवर्क का सूत्रधार बताया जा रहा है. उसके पकड़े जाने और वित्तीय दस्तावेजों की गहन जांच से नेटवर्क की कार्यप्रणाली और दूसरे कारोबारियों की भूमिका पर अधिक स्पष्टता आ सकती है. टिक्कू पंचमतिया की गिरफ्तारी के बाद नागपुर के सुपारी बाजार में हलचल तेज है. सूत्रों के मुताबिक, इस नेटवर्क से कथित रूप से जुड़े कुछ कारोबारी जांच की संभावित कार्रवाई को लेकर चिंतित हैं. हालांकि, किसी कारोबारी की संलिप्तता केवल संबंधों या बाजार में चल रही चर्चाओं के आधार पर नहीं मानी जा सकती.
अब खुलेंगी कारोबार की परतें?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इंडोनेशिया से बांग्लादेश और फिर भारत तक सुपारी पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में किन कंपनियों ने क्या भूमिका निभाई साथ ही, कथित फर्जी दस्तावेजों, आयात रिकॉर्ड, बैंक खातों और कंपनी के वित्तीय विवरणों के बीच क्या संबंध है? यदि जांच में इन कड़ियों की पुष्टि होती है, तो मामला कस्टम ड्यूटी की कथित चोरी से आगे बढ़कर बड़े वित्तीय अनियमितता प्रकरण का रूप ले सकता है. फिलहाल, डीआरआई की कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर सबकी निगाहें टिकी हैं. इस प्रकरण में लिप्त नागपुर के अनिस, टिंकू और सन्नी के हाथ लगने के बाद डीआरआई जांच का दायरा बढ़ानेवाली है.
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