नागपुर में दिवाली पर सिर्फ ग्रीन पटाखे, लड़ियों पर पूरी पाबंदी, 15 जगह नो क्रैकर जोन
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर पुलिस ने हाई कोर्ट में अनुपालन हलफनामा दाखिल किया है। शहर की 15 प्रमुख सड़कों और इलाकों में पटाखों के अस्थायी लाइसेंस नहीं मिलेंगे।
नागपुर में इस दिवाली पर बाजार में सिर्फ ग्रीन पटाखे ही बिकेंगे और फूटेंगे। हवा और शोर का प्रदूषण कम रखने के लिए पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है। पटाखों की लड़ियों, यानी सीरीज क्रैकर्स या आम बोलचाल की लड़ी, को बेचना और जलाना दोनों पूरी तरह बंद कर दिया गया है। पुलिस ने यह कदम राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) के निर्देशों को देखते हुए उठाया है।
शहर पुलिस के उपायुक्त संदीप पखाले ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक लंबा अनुपालन हलफनामा जमा किया है। इसमें पुलिस ने बताया कि नियम लागू कराने के लिए क्या इंतजाम किए गए और जिन लोगों ने नियम तोड़े, उन पर क्या कार्रवाई हुई।
यह सब हाई कोर्ट की सुनवाई के बाद शुरू हुआ। सुनवाई में अदालत ने कई बातों पर गहरी फिक्र जताई थी। सड़कों पर कान फोड़ने वाले पटाखे फूट रहे थे, कुछ गाड़ियों में सिलेंसर बदलवाकर तेज और कर्कश आवाज निकाली जा रही थी, और शहर में शोर तथा हवा की गंदगी लगातार बढ़ रही थी। अदालत की इस नाराजगी के बाद पुलिस ने नियम तोड़ने वालों के खिलाफ अपनी मुहिम तेज कर दी।
प्रशासन ने फैसला किया है कि शहर के 15 बड़े रास्तों और नाजुक इलाकों में पटाखे बेचने के लिए अस्थायी लाइसेंस दिए ही नहीं जाएंगे। इन जगहों को अब नो क्रैकर जोन माना जाएगा, यानी यहां पटाखों की एक भी दुकान नहीं लगेगी।
इस सूची में बर्डी का मुख्य रोड, महल से गांधी गेट चौक तक का हिस्सा, भोसले वाड़ा, बड़कस चौक और कल्याणेश्वर मंदिर का इलाका शामिल है। इसके साथ गोलीबार चौक से टिमकी के तीन नल चौक तक का रास्ता, शहीद चौक, हंसापुरी, मस्कासाथ और मारवाड़ी चौक भी हैं। बाकी जगहों में मेयो और डागा अस्पताल का परिसर, मेडिकल कॉलेज का परिसर, इंदोरा से कमल टॉकीज चौक तक की सड़क, गोकुलपेठ का बाजार और सदर का रेजिडेंसी रोड आते हैं।
जिन दुकानदारों ने लाइसेंस की शर्तें नहीं मानीं, उन पर पुलिस पहले ही हाथ डाल चुकी है। ऐसे 10 पटाखा विक्रेताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 में केस दर्ज हुए हैं।
पुलिस का जोर सिर्फ डंडे पर नहीं है। बच्चों, स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों और नौजवानों को समझाने के लिए अब तक स्कूलों और कॉलेजों में 363 जागरूकता कार्यक्रम हो चुके हैं। इनमें उन्हें बताया गया कि पटाखों से सेहत और माहौल को क्या नुकसान होता है और पर्यावरण को कैसे बचाया जाए।
पुलिस ने हाई कोर्ट को यह भी बताया है कि त्योहार के पूरे दौरान निगरानी जारी रहेगी और जो भी तय नियमों को तोड़ेगा, उस पर आगे भी कार्रवाई होती रहेगी, ताकि शोर और हवा का प्रदूषण काबू में रहे।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।