नागपुर में 96,777 फेरीवालों को स्वनिधि का कर्ज, 56,580 ने चुका दिया पूरा
नागपुर नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक पीएम स्वनिधि योजना से 153 करोड़ रुपये से ज्यादा बंटे और 56,580 लाभार्थियों ने अपना लोन खाता बंद कर लिया।
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नागपुर में सड़क किनारे ठेला और फेरी लगाने वालों के लिए पीएम स्वनिधि योजना बड़ा सहारा बनी है। छह साल से ज्यादा वक्त में इस योजना के जरिए शहर के फेरी और ठेले वालों तक 153 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम पहुंची है। योजना का मकसद इन छोटे कारोबारियों को अपना धंधा संभालने और आगे बढ़ाने के लिए पैसा मुहैया कराना है।
ये आंकड़े आरटीआई कार्यकर्ता अभय कोल्लहाकर को नागपुर महानगरपालिका ने उपलब्ध कराए हैं। इन्हीं आंकड़ों से पता चला कि नगर निगम के समाज विकास विभाग ने कुल 96,777 फेरी वालों को आर्थिक सहायता दी है। इस सहायता की कुल रकम 1,53,57,04,129 रुपये बैठती है।
समाज विकास विभाग के मुताबिक 1 जून 2020 से 31 अगस्त 2026 के बीच स्वनिधि योजना के तहत बड़ी तादाद में आवेदन आए। यानी करीब साढ़े छह साल के इस दौर में नागपुर के हजारों छोटे व्यापारियों ने योजना का रुख किया।
योजना में कर्ज एक साथ नहीं, बल्कि अलग-अलग चरणों में दिया जाता है। पहले चरण में लाभार्थी को 10,000 रुपये मिलते हैं। दूसरे चरण में 20,000 रुपये और तीसरे चरण में 50,000 रुपये की रकम दी जाती है।
सबसे अहम बात यह है कि इतने लोगों में से 56,580 लाभार्थियों ने अपना पूरा कर्ज चुका दिया है और अपना लोन खाता बंद करवा लिया है। नगर निगम से मिली जानकारी के मुताबिक इन फेरी और ठेले वालों ने रकम बांटने के लिए बैंकों की बनाई मार्गदर्शक सूचनाओं का पालन किया।
इस तरह नागपुर में 96,777 लाभार्थियों में से 56,580 आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होते हुए अपना कर्ज पूरी तरह उतार चुके हैं। यह योजना नागपुर जिले के आम और छोटे कारोबारियों की जिंदगी में आर्थिक स्थिरता लाने का एक नया रास्ता खोलती दिख रही है।
समय पर कर्ज चुकाने वाले फेरीवालों की बढ़ती संख्या यही बताती है कि मेहनत करने वाले तबके को अगर सही वक्त पर पैसे का सहारा मिल जाए, तो वह अपने पैरों पर खड़ा होने की पूरी क्षमता रखता है। ऐसे लोग स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी अहम योगदान दे सकते हैं।
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