16 अक्टूबर से नागपुर में पानी की सप्लाई 10% घटेगी, अगस्त 2027 तक लागू रहेगा नियम
कम बारिश और अल-नीनो के असर से राज्य सरकार ने प्राथमिकता आधारित जल आवंटन योजना लागू की है। नागपुर मनपा को रोजाना 74 एमएलडी कम पानी मिलेगा।
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नागपुर जिले में कम बारिश और अल-नीनो के असर से पानी का संकट गहरा रहा है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने प्राथमिकता आधारित जल आवंटन योजना लागू कर दी है। यह योजना नागपुर समेत पूरे राज्य में अगस्त 2027 तक चलेगी।
नए निर्देशों के मुताबिक राज्य के सभी शहरी स्थानीय निकायों को 16 अक्टूबर से पानी की सप्लाई में कम से कम 10% कटौती करनी होगी। नागपुर महानगरपालिका (मनपा) अभी रोजाना 740 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) पानी सप्लाई करती है। 10% कटौती लागू होने के बाद शहर को हर दिन 74 एमएलडी कम पानी मिलेगा।
जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) नागपुर मंडल की मुख्य अभियंता सोनाली चोपड़े ने बताया कि सरकार के आदेश के अनुसार पीने के पानी को सबसे ऊपर रखा जाएगा। उसके बाद उद्योग और खेती की जरूरतों के लिए पानी दिया जाएगा।
नागपुर को पेंच प्रणाली से 520 एमएलडी और कन्हान प्रणाली से 220 एमएलडी पानी मिलता है। 31 अगस्त 2027 तक पीने के पानी के लिए 259 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी पहले ही आरक्षित किया जा चुका है।
पहले स्तर पर, यानी पेयजल और आपातकालीन रिजर्व में, जलाशयों से सबसे पहले पीने के पानी का कोटा अलग रखा जाएगा। वाष्पीकरण और गाद से होने वाले नुकसान को भी अलग किया जाएगा। इसके अलावा उपलब्ध पानी का 10% आपातकालीन रिजर्व के तौर पर रखा जाएगा, जो सिर्फ आपात स्थिति में पीने के पानी के लिए इस्तेमाल होगा।
दूसरी प्राथमिकता उद्योगों की है। नागपुर जिले में पीने के पानी की जरूरत पूरी होने के बाद जो पानी बचेगा, वह उद्योगों को दिया जाएगा। ताजे पानी पर निर्भरता घटाने के लिए उद्योगों को कम से कम 30% पानी का पुनर्चक्रण करना जरूरी किया गया है।
खेती में सबसे पहले बीज उत्पादन को पानी मिलेगा। फिर रबी चारा फसलों, रबी सिंचाई, मौसमी और द्विमासिक फसलों का नंबर आएगा। सबसे आखिर में बहुवर्षीय फसलों को पानी दिया जाएगा।
स्थानीय निकायों को पानी का रिसाव रोकने, जल संरक्षण करने और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को पूरी क्षमता से चलाने के निर्देश दिए गए हैं। योजना पर अमल के लिए जिले के पालक मंत्री की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है। इसमें जिलाधिकारी, मनपा आयुक्त डॉ. विपिन इटनकर और जिला परिषद के सीईओ सदस्य होंगे, जो बांध-वार जल उपयोग योजना को मंजूरी देंगे। सरकार के ये निर्देश 16 अक्टूबर से लागू होकर 31 अगस्त 2027 तक प्रभावी रहेंगे।
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