नागपुर के सेमिनरी हिल्स बाल उद्यान में झूलों पर जंग, 4.5 करोड़ खर्च के बाद भी देखभाल नहीं
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पश्चिम नागपुर के सेमिनरी हिल्स बाल उद्यान में करोड़ों के विकास कार्यों के बाद भी कई झूले जंग खा रहे हैं और कुछ टूटे हुए हैं। लोग बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं।
पश्चिम नागपुर के सेमिनरी हिल्स में बना बाल उद्यान इन दिनों बदहाली की वजह से चर्चा में है। शहर को स्मार्ट सिटी बनाने और विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन काम पूरा होने के बाद सुविधाओं की नियमित देखभाल नहीं हो रही। इस उद्यान की हालत उसी का एक उदाहरण बताई जा रही है।
कुछ समय पहले करोड़ों रुपये की लागत से इस उद्यान को विकसित किया गया था। अब यहां कई झूलों और उपकरणों पर जंग लगने लगा है। कुछ जगहों पर झूले क्षतिग्रस्त हालत में दिख रहे हैं। इसी वजह से बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है।
सेमिनरी हिल्स का बाल उद्यान नागपुर शहर के प्रमुख मनोरंजन स्थलों में गिना जाता है। प्रकृति का आनंद लेने और बच्चों के साथ वक्त बिताने के लिए यहां रोजाना सैकड़ों लोग पहुंचते हैं। विकास कार्यों के बाद उद्यान में नई सुविधाएं दी गई थीं और उम्मीद थी कि आने वाले लोगों को बेहतर अनुभव मिलेगा। लेकिन रखरखाव की कमी की वजह से अब लोगों को निराशा हाथ लग रही है।
स्थानीय लोगों और उद्यान में आने वाले पर्यटकों का कहना है कि प्रशासन को यहां नियमित सफाई, मरम्मत और उपकरणों की देखभाल पर ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक जंग लगे और टूटे झूले बच्चों के लिए खतरा बन सकते हैं। इसलिए ऐसे उपकरणों की समय पर मरम्मत होनी चाहिए, या जरूरत पड़ने पर उन्हें इस्तेमाल से हटा देना चाहिए।
पर्यटकों की एक शिकायत यह भी है कि उद्यान में प्रवेश के लिए शुल्क लिया जाता है, फिर भी झूलों और दूसरी सुविधाओं के रखरखाव पर पूरा ध्यान नहीं दिया जा रहा। लोग पूछ रहे हैं कि जब आने वालों से शुल्क वसूला जा रहा है, तो सुविधाओं की सुरक्षा और नियमित देखभाल पक्की क्यों नहीं की जा रही।
बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से झूलों की नियमित जांच, जंग हटाना, पेंटिंग और टूटे उपकरणों की मरम्मत जरूरी है। साथ ही इन समस्याओं पर प्रशासन क्या कार्रवाई कर रहा है, इसकी साफ जानकारी सामने आना भी जरूरी है।
बताया जाता है कि वर्ष 2024 में बाल उद्यान के विकास के लिए 4.5 करोड़ रुपये का फंड मंजूर हुआ था। उस वक्त तत्कालीन उप वन संरक्षक ने जानकारी दी थी कि उद्यान में नए झूले लगाए जाएंगे, नागरिकों के लिए वॉकिंग ट्रैक बनेगा, बैठने की व्यवस्था की जाएगी और अलग-अलग खेल गतिविधियों से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
अब इन कामों के बाद झूलों पर जंग लगने और कुछ उपकरणों के टूटने की शिकायतें आ रही हैं। करोड़ों रुपये खर्च करके तैयार की गई सुविधाओं की ऐसी हालत ने रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिकों की मांग है कि संबंधित प्रशासन उद्यान का निरीक्षण करे, खराब झूलों की मरम्मत कराए और आगे के लिए नियमित देखभाल की व्यवस्था पक्की करे।
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