नागपुर में पानी की कटौती के बीच सतपुड़ा बॉटनिकल गार्डन को नया कनेक्शन, पार्षद झा का एतराज
सेमिनरी हिल्स के सतपुड़ा बॉटनिकल गार्डन में निजी व्यावसायिक परियोजना के लिए 40 मिमी का नया जल कनेक्शन देने की तैयारी पर पार्षद अभिजीत झा ने रोक और जांच की मांग की है।
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नागपुर शहर में 16 अक्टूबर से 10 प्रतिशत पानी कटौती के निर्देश लागू होने की जानकारी दी गई है और जल संकट की आहट अभी से सुनाई दे रही है। इसी बीच सेमिनरी हिल्स स्थित सतपुड़ा बॉटनिकल गार्डन में निजी व्यावसायिक परियोजना के लिए महानगरपालिका और ऑरेंज सिटी वाटर की ओर से 40 मिमी व्यास का नया जल कनेक्शन देने की कवायद चल रही है।
इसकी भनक लगते ही स्थायी समिति के सदस्य और पार्षद अभिजीत झा ने कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि जब आम नागरिकों को पीने के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है, तब निजी ठेकेदार की व्यावसायिक परियोजना के लिए महानगरपालिका की जलापूर्ति व्यवस्था से कनेक्शन देने की इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। उन्होंने इस कनेक्शन पर तत्काल रोक लगाने और पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की है।
जानकारी के मुताबिक डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय के अधीन सतपुड़ा बॉटनिकल गार्डन की जमीन करीब 6 वर्ष पहले मनीष मेहाडिया की कंपनी सत्यगीता इन्फ्रा डील्स प्राइवेट लिमिटेड को 10 वर्षों के लिए संचालन हेतु दी गई थी। इस परिसर में होटल, रिसॉर्ट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। परिसर में बोरवेल के रूप में पानी का अपना स्वतंत्र स्रोत पहले से मौजूद है, फिर भी जलापूर्ति व्यवस्था से नया व्यावसायिक कनेक्शन लेने की प्रक्रिया शुरू की गई।
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार सत्यगीता इन्फ्रा डील्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर 31 अगस्त 2026 को 40 मिमी व्यास के नए कनेक्शन के लिए 48,061 रुपये का अनुमानित खर्च तैयार किया गया था। इसमें वाटर मीटर, पाइपलाइन, बॉल वॉल्व, खुदाई और सड़क को पहले जैसा करने के काम शामिल हैं।
इसके बाद 23 सितंबर 2026 को नागपुर महानगरपालिका के जलापूर्ति विभाग में 15,000 रुपये सुरक्षा जमा और 14,379 रुपये सेवा कनेक्शन शुल्क, यानी कुल 29,379 रुपये जमा किए जाने की रसीदें उपलब्ध हैं। इस तरह 48,061 रुपये के अनुमानित खर्च और असल में जमा हुए 29,379 रुपये के बीच 18,682 रुपये का अंतर है, जिस पर प्रशासन से साफ जवाब मांगा गया है। अनुमानित राशि पूरी तरह देय थी या उसमें कुछ खर्च अलग से शामिल थे, इसकी जांच जरूरी है।
पार्षद अभिजीत झा ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक नागपुर शहर के कई इलाकों में गंभीर जल संकट के कारण लोगों को कम दबाव और अनियमित जलापूर्ति झेलनी पड़ रही है। ऐसे वक्त में निजी व्यावसायिक परियोजना के लिए 40 मिमी की नई जलापूर्ति लाइन देने की जरूरत क्या है, यह गंभीर सवाल है।
उनका सवाल यह भी है कि जमीन कृषि विश्वविद्यालय की होने के कारण क्या विश्वविद्यालय से अनापत्ति प्रमाणपत्र लिया गया था और क्या मूल अनुबंध में होटल, रिसॉर्ट या दूसरे व्यावसायिक उपयोग की इजाजत दी गई है। साथ ही परियोजना के लिए कितना पानी मंजूर किया गया है और क्या आसपास के नागरिकों की जलापूर्ति प्रभावित न होने की पुष्टि की गई है। इन सभी पहलुओं की जांच जरूरी है।
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