नागपुर वन विभाग की कार्यशाला में सिखाया गया एआई का सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल
वन विभाग ने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एआई पर संवादात्मक कार्यशाला आयोजित की। साथ में पीपीटी स्पर्धा और वन्यजीव अधिवासों पर सत्र भी हुए।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर में वन विभाग ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के प्रभावी और जिम्मेदार इस्तेमाल पर एक संवादात्मक कार्यशाला रखी। इसका मकसद यह था कि विभाग के रोजमर्रा के काम में नई तकनीक का इस्तेमाल हो और उससे कार्यक्षमता, उत्पादकता और डिजिटल दक्षता बढ़े।
एआई विशेषज्ञ प्रतीक राजूरकर ने एआई की बुनियादी बातें समझाईं और अलग-अलग एआई टूल्स के बारे में बताया। दफ्तर का काम आसान करने, समय बचाने और कार्यक्षमता बढ़ाने में एआई कैसे काम आता है, इसके उदाहरण भी दिखाए गए। कार्यशाला में सबसे ज्यादा जोर इस बात पर रहा कि एआई का इस्तेमाल सुरक्षित और जिम्मेदारी से किया जाए।
यह कार्यक्रम वन विभाग की उप वन संरक्षक डॉ. विनीता व्यास के मार्गदर्शन में हुआ। महाराष्ट्र राज्य जैवविविधता मंडल के सदस्य सचिव डॉ. भारत सिंह हाडा, सहायक वन संरक्षक यश काले, विभागीय वन अधिकारी रूपाली सावंत और सहायक वन संरक्षक श्वेता अडे मौजूद थीं। इनके अलावा विभागीय वन अधिकारी मंगेश टेंगडी (बौर व्याघ्र प्रकल्प) भी कार्यक्रम में पहुंचे।
वन्यजीवों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 'अधिवास जोड़ें, वन्यजीव बचाएं' विषय पर पीपीटी प्रस्तुति स्पर्धा भी हुई। आरटीएम नागपुर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने वन्यजीव संरक्षण, अधिवासों की कनेक्टिविटी और पर्यावरणीय जुड़ाव को बचाने से जुड़े विषयों पर प्रेजेंटेशन दिए। स्पर्धा के समन्वयक मानद वन्यजीव रक्षक अविनाश लोंढे थे, जबकि निर्णायक के तौर पर विभागीय वन अधिकारी नंदकिशोर आर राऊत और सहायक वन अधिकारी अक्षय म्हेत्रे मौजूद रहे।
वन विभाग ने यह कार्यशाला सेमिनरी हिल्स के हरि सिंह सभागृह में की। वहां सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) नितिन काकोडकर ने 'प्रबंधन प्रभावशीलता मूल्यांकन' (एमईई) पर मार्गदर्शन किया। उन्होंने बताया कि संरक्षित क्षेत्रों और वन्यजीव अधिवासों के प्रबंधन का आकलन कैसे होता है। एमईई की प्रक्रिया, उसके मुख्य मानदंड और संकेतक, प्रबंधन की कमियों की पहचान और संरक्षण के नतीजे बेहतर करने के लिए जरूरी सुधारों की जानकारी भी उन्होंने दी।
आईएफएस हेमंत कामडी ने वन्यजीव भ्रमण मार्गों की पृष्ठभूमि और उनके पीछे के वैज्ञानिक आधार को समझाया। मानद वन्यजीव रक्षक अजिंक्य भटकर ने इन भ्रमण मार्गों की अवधारणा, उनके सामने मौजूद मुख्य खतरों और संरक्षण के उपायों पर जानकारी दी।
कार्यशाला में दूसरे विभागों के अधिकारी और प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इनमें राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की पर्यावरण सहयोगी याजेश्वा कानेरिया, कलेक्टर ऑफिस के अभियंता श्रीकांत समर्थ, वरिष्ठ सहायक विभागीय अभियंता वीके असाटी और मध्य रेलवे के सहायक विभागीय अभियंता केओ पोतदार थे। पुलिस की तरफ से सहायक पुलिस निरीक्षक एनबी गौरखेड़े और पुलिस उपनिरीक्षक बीआर पालवे भी मौजूद रहे।