फर्जी कागजात के मामले में वन विभाग के आदेश पर अमल नहीं, जनार्दन मून ने लिखा पत्र
नागरी हक संरक्षण मंच के जनार्दन मून ने उप वन संरक्षक डॉ. विनिता व्यास को पत्र लिखकर कहा है कि सेमिनरी हिल्स के वन परिक्षेत्र अधिकारी और सहायक वन संरक्षक ने 12 अगस्त 2026 के आदेश का पालन नहीं किया।
नागपुर: नागरी हक संरक्षण मंच के केंद्रीय अध्यक्ष और पूर्व पार्षद जनार्दन मून ने नागपुर वन विभाग की उप वन संरक्षक डॉ. विनिता व्यास को एक पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने शिकायत की है कि एक गंभीर मामले में अफसरों ने ऊपर से मिले आदेश को माना ही नहीं। मून का कहना है कि प्रताप देवानी ने नकली कागजपत्रों के सहारे कार्यालय को फंसाकर फौजदारी गुनाह दर्ज करवाया था। इस शिकायत पर 9 दिसंबर 2025 को कार्रवाई की मांग की गई थी, पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा।
मंच के मुताबिक उप वन संरक्षक कार्यालय ने 12 अगस्त 2026 को आदेश जारी किया था। इसमें सेमिनरी हिल्स के वन परिक्षेत्र अधिकारी से कहा गया कि इस मामले में तुरंत रिपोर्ट भेजें। इस पत्र की एक प्रति सहायक वन संरक्षक (तेंदू व कैम्पा) नागपुर को भी भेजी गई थी। उन्हें निर्देश था कि उक्त प्रकरण की रिपोर्ट तत्काल मंगाई जाए और 7 दिनों के अंदर कार्यालय में जमा की जाए।
मंच का आरोप है कि सेमिनरी हिल्स के वन परिक्षेत्र अधिकारी ने अब तक न कोई कार्रवाई की और न ही कोई जानकारी दी। मंच यह भी कहता है कि सहायक वन संरक्षक ने भी उप वन संरक्षक के आदेश को नहीं माना और 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट नहीं भेजी।
6 अक्टूबर 2026 को लिखे पत्र में जनार्दन मून ने कहा है कि दोनों अधिकारियों का आदेश न मानना गंभीर लापरवाही है। उनकी मांग है कि नियम के हिसाब से यह प्रकरण किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपा जाए और उचित कार्रवाई हो। साथ ही प्रकरण वरिष्ठ अधिकारी के पास भेजकर उसका जल्द निपटारा किया जाए।
पत्र के साथ उप वन संरक्षक कार्यालय के 12 अगस्त 2026 के आदेश की प्रति भी लगाई गई है। उस आदेश के अनुसार श्री जनार्दन मून (पूर्व पार्षद) की 27 जुलाई 2026 की शिकायत कार्यालय को मिली थी। शिकायत में आरोप था कि वन परिक्षेत्र अधिकारी, सेमिनरी हिल्स कार्यालय में 9 दिसंबर 2025 को प्रताप देवानी ने नकली कागजपत्रों के आधार पर कार्यालय को फंसाकर फौजदारी गुनाह दर्ज करवाया।
आदेश में उप वन संरक्षक कार्यालय ने कहा था कि प्रकरण की सीधे जांच की जाए और उचित कार्रवाई हो। की गई कार्रवाई की रिपोर्ट स्पष्ट अभिप्राय के साथ सात दिनों के अंदर कार्यालय को सौंपनी थी। इस रिपोर्ट की जांच सहायक वन संरक्षक (तेंदू व कैम्पा) नागपुर को करनी थी। उन्हें भी अभिप्राय के साथ रिपोर्ट तत्काल कार्यालय को देने का निर्देश था।
मंच का कहना है कि आदेश को दो माह बीत चुके हैं और फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। मंच के अनुसार यह बात वन प्रशासन के कामकाज के तरीके पर सवाल खड़ा करती है।
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