नागपुर में RRT और TTC टीमों की रेस्क्यू ट्रेनिंग, विश्वविद्यालय के छात्रों की निबंध स्पर्धा भी
नागपुर वन विभाग ने सेमिनरी हिल्स के हरि सिंह सभागार में RRT और TTC सदस्यों को वन्यजीव बचाव की ट्रेनिंग दी, साथ में छात्रों की निबंध प्रतियोगिता भी हुई।
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नागपुर वन विभाग ने रैपिड रिस्पॉन्स टीम (RRT) और ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर (TTC) के सदस्यों के लिए एक ट्रेनिंग कार्यक्रम रखा। यह क्षमता वृद्धि और प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम सेमिनरी हिल्स के हरि सिंह सभागार में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का मकसद वन्यजीव बचाव और आपात हालात में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता, तत्परता और आपसी तालमेल को मजबूत करना था। प्रशिक्षण उप वन संरक्षक डॉ. विनीता व्यास के मार्गदर्शन में हुआ। इसमें सहायक वन संरक्षक यश काले और गोविंद लुचे मौजूद रहे।
ट्रेनिंग में राज्य वन्यजीव मंडल के पूर्व सदस्य कुंदन हाते, डब्ल्यूआरटीसी के डॉ. मयूर पावशे और पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रियल चौरागडे ने RRT और TTC के सदस्यों को जानकारी दी। उन्होंने वन्यजीव बचाव, सुरक्षित हैंडलिंग और आपात हालात में कैसे प्रतिक्रिया देनी है, इन सब पर बात की। घायल, संकट में पड़े या फंसे हुए वन्यजीवों को, और मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति में भी, सुरक्षित तरीके से कैसे बचाया जाए, यह प्रक्रिया भी समझाई गई।
इसी आयोजन में छात्रों के लिए निबंध स्पर्धा भी रखी गई थी। स्पर्धा में राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इसके जरिए विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण, आवासों की कनेक्टिविटी और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बचाए रखने के महत्व पर अपनी बात रखने का मौका मिला।
स्पर्धा का समन्वय मानद वन्यजीव रक्षक अविनाश लोंढे और अजिंक्य भटकर ने किया। निबंधों की जांच विभागीय वन अधिकारी नरेंद्र चांदेकर और वन परिक्षेत्र अधिकारी अरुण पेंदोरकर ने की।
कार्यक्रम के आखिर में निबंध प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को मेहमानों के हाथों प्रमाण-पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
वहां मौजूद अधिकारियों ने विद्यार्थियों और प्रशिक्षण में शामिल सदस्यों की कोशिशों की तारीफ की। उनका कहना था कि वन्यजीव संरक्षण सिर्फ वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर नागरिक का कर्तव्य है।
अधिकारियों के मुताबिक ऐसे आयोजनों से आपात हालात में फौरन राहत दिलाने में मदद मिलेगी। साथ ही युवाओं में पर्यावरण और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और जागरूकता भी बढ़ेगी।