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नागपुर के खरबी में किराए के मकान से 37 लाख के नकली नोट मिले, ATS भी जांच में

खरबी के चैतन्येश्वर नगर में किराए के मकान से 37 लाख रुपये अंकित मूल्य के संदिग्ध नकली नोट मिलने के बाद एटीएस ने समानांतर जांच शुरू की है। किराएदार फरार है।

नागपुर के खरबी में किराए के मकान से 37 लाख के नकली नोट मिले, ATS भी जांच में तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर के खरबी इलाके के चैतन्येश्वर नगर में एक किराए के मकान से 37 लाख रुपये अंकित मूल्य के संदिग्ध नकली नोट बरामद हुए हैं। इसके बाद आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) ने भी अपनी अलग जांच शुरू कर दी है। जांच करने वाले यह पता लगा रहे हैं कि यह सिर्फ एक अकेली प्रिंटिंग यूनिट थी या नकली नोटों के किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा।

मामला सबसे पहले वाठोडा पुलिस के सामने आया था। मकान में रहने वाला किराएदार पुष्पम कृष्णा बांदणे (30) फरार है। पुलिस उसके कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाल रही है, मोबाइल की लोकेशन का डेटा देख रही है और उससे बार-बार बात करने वालों की पड़ताल कर रही है, ताकि उसकी आवाजाही का पता चले और उसके साथियों की पहचान हो सके।

जांच करने वाले यह भी देख रहे हैं कि क्या ये नोट धोखाधड़ी वाले लेन-देन के जरिए बाजार में चलाने के लिए थे और क्या आरोपी के नागपुर के बाहर के लोगों से भी संबंध थे। हालांकि नेटवर्क कितना बड़ा है और नोट कितने चले, यह अभी तय नहीं हो पाया है।

मकान मालिक के शक से खुला मामला। मकान मालिक रमेश गंगाधर हर्डे को शक हुआ, क्योंकि बांदणे कई दिन से मकान पर नहीं आया था। त्रिमूर्ति नगर का रहने वाला बांदणे कथित तौर पर करीब डेढ़ साल से प्लॉट नंबर 18, चैतन्येश्वर नगर के इस मकान में रह रहा था।

किराए का एग्रीमेंट जनवरी में खत्म हो चुका था और किराएदार ने कथित तौर पर किराया भी नहीं दिया था। किराए को लेकर बांदणे ने कथित तौर पर मकान मालिक को हथियार दिखाकर धमकाया था और यह विवाद पहले पुलिस तक पहुंच चुका था।

शक होने पर हर्डे ने आखिरकार बंद मकान का ताला तोड़ा। अंदर उन्हें प्रिंटिंग का सामान, छपाई की सामग्री और 500 रुपये के संदिग्ध नकली नोटों के बंडल मिले। बताया गया है कि सामान कमरे में बिखरा पड़ा था और कुछ बंडल एक बाल्टी में रखे थे।

शुरुआती जांच में पता चला कि सभी नोटों की छपाई एक जैसी नहीं है। कुछ नोट दोनों तरफ छपे थे, जबकि कुछ सिर्फ एक तरफ। जब्त माल की हालत जांच का अहम हिस्सा बन गई है, क्योंकि फोरेंसिक जांच से छपाई का तरीका और यह पता चल सकता है कि नोट चलाने लायक तैयार थे या नहीं। वाठोडा पुलिस ने पुलिस इंस्पेक्टर प्रमोद पोरे की अगुवाई में केस दर्ज कर जांच शुरू की है।

बांदणे के पकड़ में न आने से पुलिस डिजिटल और तकनीकी सबूतों के सहारे उसकी हरकतों की कड़ियां जोड़ रही है। कुछ बार-बार फोन करने वालों पर नजर है, ताकि पता चले कि छपाई की मशीन जुटाने, सामान का इंतजाम करने या नोट इधर-उधर पहुंचाने में किसी की भूमिका थी या नहीं। अधिकारी यह भी जानना चाहते हैं कि बांदणे अकेले काम कर रहा था या किसी के कहने पर। जांच करने वालों को शक है कि वह इस कथित रैकेट का बड़ा खिलाड़ी नहीं रहा होगा और छपाई किसी बड़ी कड़ी से जुड़ी हो सकती है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

ATS की समानांतर जांच यह देखेगी कि मामले का असर शहर के बाहर तक तो नहीं है। उसका फोकस छपाई के सामान और कच्चे माल के स्रोत, पैसों के लेन-देन, संभावित सप्लायर और नोट बांटने के किसी भी संदिग्ध रास्ते पर रहने की उम्मीद है। पुलिस यह भी पता कर रही है कि नकली नोटों के लेन-देन में किसी अनजान आदमी के साथ ठगी तो नहीं हुई। साथ ही इस संभावना की भी जांच हो रही है कि नकली नोट अंकित मूल्य से कम दाम पर देने के झांसे दिए गए हों। इससे खरीदारों या बिचौलियों तक पहुंचा जा सकता है। किसी खास लेन-देन या वितरण नेटवर्क से कोई पक्का संबंध अभी तक नहीं मिला है।

37 लाख की बरामदगी से कई सवाल खड़े हैं। यह छपाई कब से चल रही थी? मकान मिलने से पहले कितने नोट छप चुके थे? क्या कोई खेप घर के बाहर भेजी गई? और सामान किसने दिया? बरामद नोटों का अंकित मूल्य 37 लाख रुपये बताया गया है, पर इस कथित धंधे में असल में कितने नोट बने और कितने चले, यह साफ नहीं है। इन सवालों के जवाब के लिए नोटों और मशीनों की फोरेंसिक जांच और डिजिटल सबूतों का विश्लेषण अहम होगा।

बांदणे की गिरफ्तारी से ही इस कथित धंधे का दायरा, साथियों की पहचान और यह तय होगा कि मकान अकेली प्रिंटिंग यूनिट था या बड़े नेटवर्क की एक कड़ी। फिलहाल जांच फरार आरोपी को ढूंढने, संदिग्ध नोटों की जांच करने और यह पता लगाने पर टिकी है कि इस रैकेट के पीछे कोई संगठित नेटवर्क था या नहीं।

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