कर्जत में पेड़ कटाई पर आदित्य ठाकरे का सरकार पर हमला, आज स्थानीय लोगों से मिलेंगे
आदित्य ठाकरे ने टोरेंट पॉवर के प्रोजेक्ट के लिए कर्जत में पेड़ कटाई पर सरकार को घेरा और वे आज स्थानीय लोगों से मिलेंगे।
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कोकण में पेड़ कटाई के मुद्दे पर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे) पार्टी के नेता आदित्य ठाकरे ने राज्य सरकार की पर्यावरण से जुड़ी नीतियों पर तीखी आलोचना की है। टोरेंट कंपनी के प्रोजेक्ट के लिए हजारों पेड़ काटे जाने की चर्चा को लेकर उन्होंने सरकार को निशाने पर लिया है।
आदित्य ठाकरे आज कर्जत के दौरे पर जा रहे हैं। वहां वे स्थानीय लोगों से बात करेंगे और पेड़ कटाई के सवाल पर अपनी भूमिका रखेंगे। उनके मुताबिक इस दौरे में लोगों की आपत्तियां और चिंताएं सुनी जाएंगी।
ठाकरे ने कहा, "महाराष्ट्र को रेगिस्तान बनाने का मुख्यमंत्री ने तय कर लिया है।" उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जा रहे हैं। उनका कहना है कि प्रोजेक्ट खड़े करते समय विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन रखना जरूरी है। इसी वजह से टोरेंट कंपनी के प्रोजेक्ट के लिए होने वाली पेड़ कटाई अब राजनीतिक बहस के बीच में आ गई है।
आंकड़ों को लेकर भी विवाद है। चर्चा में 48,000 पेड़ काटे जाने की बात है, लेकिन ठाकरे का दावा है कि यह आंकड़ा सिर्फ कागजों पर है। उनके हिसाब से असल में 4 से 5 लाख पेड़ कटने की आशंका है। यह दावा अलग से साबित नहीं हुआ है, इसलिए अधिकृत आंकड़े और प्रोजेक्ट के कागज देखना जरूरी होगा।
कर्जत तालुका में साई डोंगर, पाली तर्फे कोतवाल और खलाटी इलाके में टोरेंट पॉवर का 3,000 मेगावॉट क्षमता का पंप्ड स्टोरेज जलविद्युत प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। खबरों के मुताबिक इसके लिए 32,490 पेड़ काटने की मंजूरी मिली है और करीब 233 हेक्टेयर वनजमीन का इस्तेमाल होगा। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल की वेबसाइट पर मौजूद मसौदा पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट में करीब 48,000 पेड़ और दूसरी वनस्पति हटाने का जिक्र है। इसी वजह से अलग-अलग आंकड़े दिखते हैं।
वन विभाग का कहना है कि प्रोजेक्ट की जगह पर चल रही पेड़ कटाई का भीमाशंकर अभयारण्य से सीधा संबंध नहीं है। सरकार का दावा है कि प्रोजेक्ट की जगह अभयारण्य से करीब 16 किलोमीटर दूर है। वन विभाग ने अभयारण्य के अंदर अवैध पेड़ कटाई के दावे को खारिज किया है। फिर भी जानकारों के मुताबिक अभयारण्य के बाहर के जंगल का भी पर्यावरणीय महत्व होता है।
राज्य सरकार के मुताबिक कटाई के बदले कुल 90,000 पेड़ लगाने की योजना है। इनमें 30,000 पेड़ भरपाई वनीकरण के लिए और 60,000 प्रोजेक्ट के हरित पट्टे व दूसरी जगहों पर लगाए जाएंगे। लेकिन सिर्फ पेड़ गिनने से नुकसान की भरपाई तय नहीं होती, क्योंकि पुराने बड़े पेड़ और नए पौधे पर्यावरण के लिहाज से बराबर नहीं होते।
पेड़ कटाई का असर जैवविविधता, वन्यजीवों के रहने की जगह, मिट्टी, पानी के स्रोत और स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी पर पड़ सकता है। लेकिन ये संभावित खतरे हैं और हर असर सच में होगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता। अब सबकी नजर इस पर है कि कर्जत दौरे में लोग क्या मुद्दे उठाते हैं और सत्ताधारी और विपक्ष के बीच इस पर आरोप-प्रत्यारोप कैसे आगे बढ़ते हैं।
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