नागपुर के दशहरा मेले में मोहन भागवत बोले, आजादी की लड़ाई से बड़ा बलिदान अब देना होगा
नागपुर में आरएसएस के दशहरा मेले में सरसंघचालक मोहन भागवत ने एकता, विविधता, सनातन परंपरा और नेपाल के प्राकृतिक संकट पर बात की।
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नागपुर में आरएसएस का दशहरा मेला हुआ। इस मेले में संघचालक मोहन भागवत ने कहा कि एकता का तत्व अटल और शाश्वत है, जबकि हमारी विविधता बदलती रहती है। उनके मुताबिक विविधता में एकता को भुला देने से हम कमजोर हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अपना आचरण भूल जाने की वजह से हमारी दुर्गति हुई है।
मोहन भागवत ने कहा कि विविधता में लचीलापन सनातन धर्म की खासियत है। इसलिए विवेक को जगाए रखकर नई चीजें सीखनी चाहिए, यह उनकी राय है। उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने की जिम्मेदारी अब नई पीढ़ी के कंधों पर है।
भागवत के अनुसार 'स्व' की रक्षा के लिए महापुरुषों ने बलिदान दिया है। सरसंघचालक मोहन भागवत ने देशवासियों से कहा कि अब हमें स्वतंत्रता आंदोलन से भी बड़ा बलिदान देना पड़ेगा।
संविधान की उद्देशिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उसमें हमने खुद को 'हम भारत के लोग' कहा है। भागवत ने कहा कि यह उस समाज की पहचान है, जो विविधता के बावजूद भावनात्मक रूप से एक है। उन्होंने कहा कि इस भावनात्मक बंधन को और मजबूत कैसे किया जाए, इसका मार्गदर्शन संविधान के मार्गदर्शक तत्वों से भी मिलता है। उनके मुताबिक विश्वगुरु की जगह से हमारी गिरावट होती चली गई और हमें कई साल पराधीनता झेलनी पड़ी।
नेपाल के बारे में भागवत ने कहा कि वहां प्राकृतिक संकट क्यों आया, इस पर सोचना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पूरे हिमालय क्षेत्र में ऐसे संकट आते रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विकास के नाम पर आगे बढ़ते गए तो विकास करने वाला इंसान ही नहीं बचेगा।
दुनिया के स्तर पर कई देशों से हमारा संपर्क बढ़ा है, इस पर भागवत ने कहा कि जो संबंध बने हैं, वे आगे भी चलते रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक की तरक्की हो रही है और होनी भी चाहिए। लेकिन उसके जरिए हर तरह की जानकारी सबके लिए खुल गई है, यह बात भी याद रखनी चाहिए।
भागवत ने कहा कि भारत में सनातन परंपरा पहले से इसी सच्चाई का एहसास कराती है। उनके मुताबिक यह परंपरा बताती है कि इस सृष्टि की विविधता जितनी स्वाभाविक और बदलने वाली है, पूरे अस्तित्व की एकात्मता उतना ही शाश्वत, दृढ़ और अटल सत्य है।