दीक्षाभूमी पर उमड़ा अनुयायियों का सैलाब, धम्मचक्र प्रवर्तन दिन पर किताबों की दुकानों में भीड़
70वें धम्मचक्र प्रवर्तन दिन पर दीक्षाभूमी पर 40 से ज़्यादा देशों के अनुयायी जुटे हैं।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर की ऐतिहासिक दीक्षाभूमि पर 70वें धम्मचक्र प्रवर्तन दिन के मौके पर देश और विदेश से आए बौद्ध अनुयायियों की भारी भीड़ जमा हुई है। नीले और पंचशील झंडे, बाबासाहेब की तस्वीरें और उनके विचारों की गूंज, इन सबसे पूरा इलाका भीममय हो गया है। इस बार दीक्षाभूमि पर किया गया नियोजन और इंतज़ाम भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। दूसरी तरफ़ किताबों की दुकानों में खरीदारी के लिए अनुयायियों की बड़ी भीड़ उमड़ पड़ी है।
इस दिन की पृष्ठभूमि यह है कि हिंदू धर्म के अत्याचार और उस वक़्त के सामाजिक व राजनीतिक माहौल में दलितों को जगह न मिलने की वजह से डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर ने काफ़ी सोच-विचार के बाद दशहरे के दिन अपने लाखों अनुयायियों के साथ नागपुर की दीक्षाभूमि पर दीक्षा ली और हिंदू धर्म छोड़ दिया। तब से हर साल दशहरे पर आंबेडकरी समाज दीक्षाभूमि पर इकट्ठा होकर यह दिन मनाता है।
धम्मचक्र प्रवर्तन दिन के लिए देश के अलग-अलग राज्यों के साथ विदेश से भी बड़ी संख्या में बौद्ध बांधव नागपुर पहुंचे हैं। 40 से ज़्यादा देशों के भंते, विचारक, शोधकर्ता, अध्येता और मीडिया प्रतिनिधि दीक्षाभूमि पर हाज़िर हुए हैं। रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन से दीक्षाभूमि की तरफ़ आने वाले रास्तों पर अनुयायियों की बड़ी भीड़ दिख रही है।
दीक्षाभूमि इलाके की किताबों की दुकानों में इस साल ख़ास भीड़ है। साल भर में छपे अलग-अलग वैचारिक साहित्य को अनुयायियों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। ख़ासकर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की लिखी 'बुद्ध एंड हिज धम्म' और भारतीय संविधान की प्रतियां खरीदने के लिए पाठकों की भीड़ लगी है। यह किताब खरीदी बताती है कि बात सिर्फ़ धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, ज्ञान, शिक्षा और वैचारिक बदलाव का संदेश भी इससे उभर रहा है।
इस साल की ख़ासियतों में प्रशासन का नियोजन और प्रबंधन शामिल है, जो 8.92 करोड़ के विशेष फंड से किया गया है। अनुयायियों के आराम के लिए परिसर में 7 और दूसरी अलग-अलग जगहों पर कुल 24 डोम बनाए गए हैं। छोटे बच्चे खो न जाएं, इसके लिए सुरक्षा कवच के तौर पर उनके हाथ में मोबाइल नंबर वाला बेल्ट बांधा जा रहा है।
साफ़ पानी के लिए आरओ की व्यवस्था है। पुलिस, नगर निगम, स्वास्थ्य सुविधाओं और सामाजिक संस्थाओं के तालमेल से नियोजन किया गया है। ट्रैफिक के सही नियोजन के लिए हर चौक पर तैयारी रखी गई है। कई जगह भोजनदान और अल्पाहार का इंतज़ाम है, और अनुयायियों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों का स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया है।